इस कहानी में भौतिक विज्ञान के पेचीदा सूत्र, रासायन विज्ञान की
रासायनिक पहेलि यां, विचित्र जीव-जन्तुओं का अनूठा संसार, वनष्पति विज्ञान के अनोखे पेड़-पौधे, पृथ्वी व ब्रह्मांड का भौगोलिक दर्शन, अतीत के मानव का इतिहास, जिंदगी दायिनी धरा का भूगर्भ विज्ञान, विशिष्ट ग्रहों से निकलने वाली ऊर्जा को ग्रहण करने वाला रत्न विज्ञान, अनोखी गणितीय उलझनें, भविष्य को बताने वाला ज्योतिष विज्ञान, अनन्त ब्रह्मांड की आकाश गंगाओं का नक्षत्र विज्ञान, जटिल मानव विज्ञान, अविश्वसनीय व रहस्यमयी परा विज्ञान, अंकशास्त्र का अद्भुत अंक विज्ञान, ईश्वरीय शक्ति का एहसास दिलाने वाला तंत्र-मंत्र विज्ञान व सागर की अथाह लहरों व उसमें छिपे रहस्यों को बताने वाला सागर विज्ञान कोएक ही माला में पिरोने का प्रयास किया है।
यह कहा नी विश्व के उन महत्वपूर्ण अनसुलझे रहस्यों को ध्यान में रखकर बनाई गयी है, जिनका रहस्य आज भी मानव मस्तिष्क से परे है। अपने तर्क को शक्ति प्रदान कर, उन सभी अनसुलझे रहस्यों की कड़ियों को,एक घटना क्रम देते हुए सुलझा ने का प्रयास किया है।
इसका हर पात्र आपके दिल-ओ-दिमाग पर छा जायेगा।
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नो टः
यह कहानी पूर्णतया काल्पनिक है। इसका किसी आदमी या घटना से कोई सम्बन्ध नहीं है।इसे कहानी का उद्देश्य किसी धर्म या संप्रदाय की भावनाओं को आहत पहुंचाने का भी नहीं है। यदि किसी स्थान या घटना की जानकारी दी गयी है तो
वह मात्र कौतूहल वर्धक व मनोरंजक बनाने के लिए की गयी है।
ब्रह्माण्ड में स्थित अरबों आकाश गंगाओं में तैरते असंख्य ग्रहों में सेएक ग्रह है पृथ्वी। पृथ्वी-जीवन से परिपूर्ण और रहस्यों से भरपूर। पृथ्वी की सबसे श्रेष्ठतम रचना है -मानव। मानव जिसके पास हैएक अति विकसित मस्तिष्क।
यही मस्तिष्क इसे पृथ्वी पर रहने वाले करोड़ों जीवों से श्रेष्ठ बनाता है। इसी विकसित मस्तिष्क के कारण आज वह हर समय विकास के नये आयामों को स्पर्श कर रहा है।
विज्ञान मन्थर गति से धीरे-धीरे धीरे अपने कदम बढ़ा रहा है। विकास की नयी
आधार शिला तैयार हो रही है।
वह मानव जो कभी पेड़ों और गुफाओं में रहता था, आज अपने अति विकसित मस्तिष्क के कारण अंतरिक्ष में निकलकर, दूसरा ग्रहों की तरफ जीवनरूपी पदचिन्हों को तलाश रहा है। प्रक्षेपास्त्र, लेजर व परमाणु बम बनाने वाले हाथ अब मानव क्लोनिंग कर, अंतरिक्ष में स्पेस सिटी बनाने का सपना देख, ईश्वरीय शक्ति को भी चुनौती प्रदान करने लगा है। उसका मानना है कि अब वो पहले से ज्यादा विकसित है।
परन्तु क्या ये सत्य है? इसका उत्तर तो सिर्फ अतीत की काली चादर में लिपटा कहीं गहराइयों मे दफन है। वह रहस्य, सागर की अथाह गहराइयों में भी हो सकता है, या दोबारा अंतरिक्ष में फैली करोड़ों आकाश गंगाओं की अनंत गहराइयों में भी।
रहस्य-एक ऐसा शब्द, जिसमें सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड जगत का सार छिपा हुआ है। आज भी मानव निरंतर रहस्यों की खोज के पीछे भाग रहा है, दोबारा चाहे वह सपनों का रहस्य हो, या दोबारा पुनर्जन्म का। ये सभी रहस्य मानव को अपनी ओर मोहित करते रहें हैं।
कालचक्र- जिसे हम समयचक्र भी कहते हैं, टाइमसमय पर अलर्ट स्वरूप, विकास की अन्धी दौड़ में भाग रहे मानव को कुछ ऐसे प्रमाण दिखा देता है, जो आज भी मानव मस्तिष्क से परे है। मानव लाख कोशिशों के पश्चात भी जब उस रहस्य को समझने में ना कामयाब हो जाता है, तो वह उसे परा विज्ञान का नाम देकर अनसुलझे रहस्यों की श्रेणी में ला कर खड़ा कर देता है और उससे दूर हट जाता है।
बारामूडा त्रिकोण इसका जीता जागता उदाहरण है। मिस्र में खड़े विशालकाय पिरामिड, ईस्टर द्वीप की दैत्याकार मूर्तियां, ओल्मेक सभ्यता, इंका सभ्यता, माया सभ्यता, व अटलांटिस द्वीप के मिले कुछ ध्वंशावशेष, नाज्का सभ्यता के रेखा चित्र और ना जाने कितने ऐसे प्रमाण हैं, जो आज भी अतीत के मानव अति विकसित होने की कहानी कह रहें हैं।
अब प्रश्न ये उठता है कि यदि अतीत का मानव इतना ही विकसित था, तो उसके नष्ट होने का कारण क्या था ? कहीं उसके नष्ट होने का कारण उसका प्रकृति से खिलवाड़, या उसका अतिविकसित होना ही तो नहीं था ? क्या विकास की ही आखिरी सीढ़ी विनाश है? यदि ऐसा ही है, तो क्या हमएक बार पुनः विनाश की ओर अपने कदम बढ़ा रहें हैं? इन सभी सवालों का उत्तर जानने के लिए हमेंएक बार दोबारा से अतीत में जाना पड़ेगा।
लेकिन क्या अतीत में जाना सम्भव है? क्या हम जिस टाइम मशीन की विचार इतने वर्षों से कर रहें हैं, वह सम्भव है? यदि नहीं , तो दोबारा कैसे इन रहस्यों से पर्दा उठ सकता है? आइये विचार करते हैं। लेकिन विचार तो कोरी विचार मात्र होगी। तो दोबारा क्या करें? तो दोबारा आइये क्यों नइसे कहानी को ही पढ़ा जाए, शायद हमारे सवालों का जवाबइसे कहानी में ही कहीं मिल जाए .।

जारी है.
बहुत ज्यादा शुभकामनाएँ नईं कहानी के लिए दोस्त ! इंतजार है पहले भाग के अपडेट की!
Sab ko he same dialogue chipkata ho yeh he umeed kafi h k ek din mai padhne aunga, Just like ek din Karan Arjun aye gye, Waise he mein bi padhne aunga Umeed kaa daman kabhi chhodna nahee
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#-1
22 दिसम्बर 2001, शनिवार, 22:00; न्यूयार्क शहर, अमेरिका !!
“हैलो मारथा !“ माइकल ने दरवाजे से प्रवेश करते हुए, अपनी पत्नी मारथा कोसंबोधित किया -
“पैकिंग पूरी हुई कि नहीं ? याद है ना कल ही हमें शिप से सिडनी जाना है।“
मारथा ने पहलेएक नजर अपनी सो रही बेटी शैफाली पर डाली और दोबारा मुंह पर उंगली रखकर, माइकल से धीरे-धीरे बोलने का इशारा किया -
“श् ऽऽऽऽऽ शैफाली, अभी - अभी सोई है, जरा धीरे-धीरे बोलिए।“
माइकल, मारथा का इशारा समझ गया।इसे बार उसकी आवाज धीमी थी –
“मैं तुमसे पैकिंग के बारे में पूछ रहा था।“
“अधिकतर पैकिंग हो चुकी है, बस शैफाली और ब्रूनो का ही कुछ सामान बचा हुआ है।“ मारथा ने धीमी आवाज में माइकल को जवाब दिया।
उधर ब्रूनो, माइकल की आवाज सुन, पूंछ हिलाता हुआ माइकल के पास
आकर बैठ गया । माइकल ने ब्रूनो के सिर पर हाथ फेरा और दोबारा मारथा से मुखातिब हुआ-
“ये तो अलबर्ट सर ने ब्रूनो के लिए 'सुप्रीम' पर व्यवस्था करवा दी, नहीं तो उस शिप पर जानवर को ले जाना मना है और ब्रूनो को छोड़कर शैफाली कभी नहीं जाती।“
“जाना भी नहीं चाहिए।“ मारथा ने मुस्कुरा कर ब्रूनो की तरफ देखते हुए कहा -
“शैफाली स्वयं भी छोटी थी, जब आप ब्रूनो को लाए। देखते ही देखते ये शैफाली से कितना घुल-मिल गया । इसके संग रहते हुए तो शैफाली को अपने अंधेपन का भी एहसास नहीं होता ।“
ब्रूनो दोबारा खुशी से पूंछ हिलाने लगा । मानो उसे सभी समझ आ गया हो।
“अलबर्ट __________सर, कॉलेज में मेरे प्रो फेसर थे। मैं उनका सबसे फेवरेट स्टूडेंट था ।“
माइकल ने पुनः बोलना शुरुआत किया - “जैसे ही मुझे पता चला कि वो भी न्यूयार्क से सिडनी जा रहे हैं, तो मैं अपने को रोक न पाया । इसीलिए मैं भी उनके संग इसी शिप से जाना चाहता हूं।“
“मगर ये सफर 65 दिनों का है।“ मारथा ने थोड़ा चिंतित स्वर में कहा–
“क्या 2 महीने तक हम लोगइसे सफर में बोर नहीं हो जाएंगे।“
“अरे, यही तो खास बात होती है शिप की । 2 महीने तक सभी झंझटों से
दूऱ.। कितना आनंद आएगा ।“ माइकल ने उत्साहित होकर कहा –
“और ये भी तो सोचो, कि अलबर्ट सर को भी टाइम मिल जाएगा, शैफाली के संग रहने का । वो जरूर इसकी परेशानियों को दूर करेंगे।“
इससे पहले कि मारथा कुछ और कह पाती । ब्रूनो की “कूं-कूं“ की आवाज ने उनका ध्यान भंग कि या।
ब्रूनो, सो रही शैफाली के पास खड़ा था और शैफाली को ज्यादा ध्यान से देख रहा था ।
दोनों की ही नजर अब शैफाली पर थी । जो पलंग पर सोते हुए कुछ अजीब से करवट बदल रही थी । संग ही संग वह कुछ बुदबुदा रही थी । माइकल और मारथा तेजी से शैफाली की ओर भागे। मारथा ने शैफाली को हिलाना शुरुआत कर दिया । पर वह बिल्कुल बेसुध थी ।
शैफाली अभी भी नींद में बड़बड़ा रही थी । पर अब वो आवाजें, माइकल व मारथा को स्वच्छ सुनाई दे रहीं थीं –
“अंधेरा . लहरें . प्रकाश . फायर
. लाम . कीड़े . द्वीप . ।“
मारथा , शैफाली की बड़बड़ाहट सुनकर अब ज्यादा घबरा गई थी । उसने तेजी से शैफाली को हिलाना शुरुआत कर दिया। अचानक शैफाली झटके से उठ गई।
“क्या हुआ मॉम? आप मुझे हिला क्यों रहीं हैं?“ शैफाली ने अपनी नीली - नीली आंखें चमकाते हुए कहा ।
“तुम शायद दोबारा से सपना देख रही थी ।“ माइकल ने व्यग्र स्वर में कहा।
“आप ठीक कह रहे हैं डैड। मैं कुछ देख तो रही थी, पर मुझे कुछ ठीक से याद नहीं आ रहा ।“ शैफाली ने कहा ।
“कोई बात नहीं बेटी, आप सो जाओ“ मारथा ने गहरी सांस लेते हुए कहा -
“परेशान होने की जरूरत नहीं है।“
शैफाली दोबारा से लेट गई। माइकल व मारथा अब शैफाली से दूर हट गए थे।
“ये कैसे संभव है मारथा ?“ माइकल ने दबी आवाज में कहा-
“शैफाली तो जन्म से अंधी है, दोबारा इसे सपने कैसे आ सकते हैं। हर महीने ये ऐसे ही सपने देखकर बड़बड़ाती है।“
“आप परेशान मत हो माइकल।“ मारथा ने गहरी साँस लेते हुए कहा -
“माना कि जन्म से अंधे आदमी सपने नहीं देख सकते, पर अपनी शैफाली भी कहां नॉर्मल है। देखते नहीं हो वह मात्र 12 वर्ष की उम्र में अंधी होकर भी, अपने सारे काम स्वयं करती है और अजीब-अजीब सी पहेलियां बनाकर हल करती रहती है। शैफाली दूसरों से अलग है, बस।“
माइकल ने भी गहरी सांस छोड़ी और उठते हुए बोला - “चलो बढ़िया ! तुम बाकी की पैकिंग करो , मैं भी मार्केट से कुछ जरूरी सामान लेकर आता हूं।“
23 दि सम्बर 2001, रविवार, 14:00; (“सुप्रीम “) न्यूयार्क का बंदरगाह छोड़कर मंथर गति से अपने लक्ष्य की ओर बढ़ रहा था। बंदरगाह को छोड़े हुए उसे करीब 5 घंटे बीत चुके थे। दिसंबर का ठंडा महीना था और सूर्य भी अपनी चमकती किरणें बिखेरता हुआ, आसमान से सागर की लहरों पर, अठखेलियां करती हुई, अपनी परछाई को देखकर खुश हो रहा था ।
मौसम ठंडा होने के कारण सूर्य की गुनगुनी धूप सभी को बड़ी अच्छी लग रही थी ।
'सुप्रीम' के डेक पर ज्यादा से यात्रियों का जमावड़ा लगा हुआ था । कोई डेक पर टहलकर,इसे गुनगुनी धूप का आनंद ले रहा था, तो कोई अपनेइसे खूबसूरत सफर औरइसे शानदार शिप के बारे में बातें कर रहा था।
सभी अपने-अपने काम में मशगूल थे। परंतु ऐलेक्स जो किएक पोल से टेक लगाए हुए खड़ा था, ज्यादा देर से, दूर स्लीपिंग चेयर पर लेटी हुईएक इटैलियन लड़की को देख रहा था। वह लड़की दुनिया की नजरों से बेखबर, बड़ी बेफिक्री से लेटी हुई, सुनहरी धूप का आनंद लेते हुए,एक किताब पढ़ रही थी ।
ऐलेक्स की निगाहें बार-बार कभी उस लड़की पर, तो कभी उसकी किताब पर पड़ रही थी । दोनों की बीच की दूरी ज्यादा ज्यादा ना होने के कारण उसे किताब का नाम बिल्कुल स्वच्छ दिखाई दे रहा था।
किताब का नाम ’वर्ल्ड फेमस बैंक रॉबरी ’ होने के कारण ना जाने, उसे क्यों बड़ा अटपटा सा महसूस हुआ।
उसे उस लड़की की तरफ देखते हुए ना जाने कितना टाइमबीत चुका था, परंतु उसकी नजर उधर से हटने का नाम ही नहीं ले रहीं थी। तभीएक आवाज ने उसका ध्यान भंग किया।
“हाय क्रिस्टी !“एक दूसरी लड़की अपना हाथ हिलाते हुए उस इटैलियन लड़की की तरफ बढ़ी, जिसका नाम यकीनन क्रिस्टी था –
“व्हाट ए सरप्राइज, तुमइसे तरह से यहां शिप पर मिलोगी, ये तो मैंने कभी सोचा ही नहीं था ।“
“ओऽऽऽ हाय लॉरेन!“ क्रिस्टी ने चैंक कर किताब को नजरों के सामने से हटाते हुए, लॉरेन पर नजर डालते हुए, खुशी से जवाब दिया –
“तुम यहां शिप पर कैसे? बढ़िया ये बताओ, कॉलेज से निकलकर तुमने क्या-क्या किया ? इतने वर्ष तक तुम कहां थी ? और .।“
“बस-बस.!“ लॉरेन ने क्रिस्टी के मुंह को अपनी हथेली से बंद करते हुए कहा- “अब सारी बातेंएक संग पूछ डालोगी क्या? चलो चलते हैं, कॉफी पीते हैं, दोबारा आऽऽराऽऽम सेएक दूसरे से सारी बातें पूछेंगे।“
“तुम ठीक कहती हो । हमें कहीं बैठकर आराम से बात करनी चाहिए और वैसे भी तुम मुझ से करीब 3 वर्ष पश्चात मिल रही हो । मुझे भी तो पता चले इन बीते हुए सालों में तुमने क्या-क्या तीर मारे?“
यह कहकर क्रिस्टी करीब खींचती हुई सी, लॉरेन को लेकर रेस्टोरेंट की ओर बढ़ गई।
ऐलेक्स, जो कि अब तक दोनों सहेलियों की सारी बातें ध्यान से सुन रहा था,
उसकी निगाहें अब सिर्फ और सिर्फ उस किताब पर थी, जो कि अनजाने में ही शायद वहां पर छूट गई थी । वह धीरे-धीरे धीरे चलता हुआ, उस स्थान पर पहुंचा, जहां पर वह किताब रखी हुई थी । अब उसने अपनी नजरें हवा में इधर-उधर घुमाई। जब उसेइसे बात का विश्वास हो गया, किइसे टाइमकिसी की नजरें उस पर नहीं है, तो उसने धीरे-धीरे से झुक कर उस किताब को उठा लिया । वहीं पर खड़े-खड़े ऐलेक्स ने उस किताब का पहला पृष्ठ खोला । जिस पर अंग्रेजी में ज्यादा ही खूबसूरत राइटिंग में
’क्रिस्टीना जोंस’ लिखा था।
ऐलेक्स ने चुपचाप किताब को बंद किया और धीरे-धीरे उस स्थान से दूर चला गया। लेकिन जाते-जाते वह अपने होंठों ही होंठों में बुदबुदाया-
“क्रिस्टी !“
जारी रहेगा.…
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बढ़िया
एक अंधी लड़की, जो सपने देखती है, शायद भविष्य के, और एक्स्ट्रा टैलेंटेड भी है।
एक और लड़की जो क्राइम नोवेल लिखती है।
एक प्रोफेसर, जो शायद आंखो का डॉक्टर है।
एक समुद्री यात्रा, वो भी दुनिया केएक कोने से दूसरे तक.
लगता है रोमांच भरपूर होगा।
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साथियों के बिछड़ने साथियों के बिछड़ने का सिलसिला ख़त्म ही नहीं हो रहा Nice update
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बहुत ही सुंदर लाजवाब और अद्भुत मनमोहक रोमांचकारी अपडेट है भाई आनंद आ गया
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