Enjoy reading सुनैना, a incest sex story in hindi. Desi Sex Stories has the best collection.
हेलो दोस्तों मेरा नाम सुनैना है। मेरे दो बच्चे हैं । बड़ी बेटी का नाम नीतू है और उसकी शादी हो चुकी है। बेटे का नाम सुधीर है वह भी b.a. के फाइनल ईयर का स्टूडेंट है मेरेपति का अपना बिजनेस है। हमएक उच्च मध्यम वर्गीय परिवार से ताल्लुक रखते हैं। बढ़िया घर बार है, ज़िन्दगी जीने की सभी सहूलतें हैं। किसी चीज की कोई कमी नहीं है।इसे टाइममेरी उम्र 43 वर्ष की है। अभी पिछले वर्ष ही मेरी बेटी की शादी हुई।
पिछले वर्ष मेरी जिंदगी मेंएक ऐसा मोड़ आया जिसने मेरी... Continue reading
हेलो दोस्तों मेरा नाम सुनैना है। मेरे दो बच्चे हैं । बड़ी बेटी का नाम नीतू है और उसकी शादी हो चुकी है। बेटे का नाम सुधीर है वह भी b.a. के फाइनल ईयर का स्टूडेंट है मेरेपति का अपना बिजनेस है। हमएक उच्च मध्यम वर्गीय परिवार से ताल्लुक रखते हैं। बढ़िया घर बार ह...
मेनेएक बार भी उस पराये पुरुष को रोकने की कोशिश नहीं की थी। मेरे दिल में ख़याल तक नहीं आया था के मैं अपने पति के संग धोखा कर रही हूँ। सुना था भगवान मन की मुराद पूरी कर देता है आज देख भी लिया था। आज शाम से बार बार मन में पराये पुरुष से चुदवाने का ख़याल आ रहा था...
Dear writer Juhi, Apun ne update pad Liya h. bole toh bilkul raapchik or dhaasu update diya h. bus Apun kaa doubt clear kr do. kahani adultary h ya fir incest. Agar kahani incest h toh fir obviously yeh uskah beta he h. joo Sunaina Ko dabochkar pel rah h....
"आआईईईईईई.ऊऊन्नन्नह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्.हाय बेदर्द.ऊऊन्नन्नह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्हूऊफ़्फ़्फ़्.चोद मुझे.ऐसे ही कस कस कर पेल अपना लौड़ा मेरी चूत में." मैं घोड़ी बनी चीखती अपनी चूत उसके लण्ड पर धकेल रही थी। वो भी पूरा ज़ोर लगा रहा था।एक एक धक्का खींच खींच कर लगा रहा था। पूरा...
"यही तो कह रहा हूँ डार्लिंग चूत तो बनी ही चोदने के लिए है" मेरे सामने मेरे बेटे का चेहरा था जो मुझ पर झुका हुआ मुझे ठोक रहा था। "हुम्. चूत तो बनी ही है चोदने के लिए.लण्ड लेने के लिए." मैं उन आँखों में देखतो बोली। "चोदो मुझे.मेरी चूत मारो.ऊऊम्मम्मह्ह्ह्ह्.चो...
Incest Sex Story : सुनैना
हेलो दोस्तों मेरा नाम सुनैना है। मेरे दो बच्चे हैं । बड़ी बेटी का नाम नीतू है और उसकी शादी हो चुकी है। बेटे का नाम सुधीर है वह भी b.a. के फाइनल ईयर का स्टूडेंट है मेरेपति का अपना बिजनेस है। हमएक उच्च मध्यम वर्गीय परिवार से ताल्लुक रखते हैं। बढ़िया घर बार है, ज़िन्दगी जीने की सभी सहूलतें हैं। किसी चीज की कोई कमी नहीं है।इसे टाइममेरी उम्र 43 वर्ष की है। अभी पिछले वर्ष ही मेरी बेटी की शादी हुई।
पिछले वर्ष मेरी जिंदगी मेंएक ऐसा मोड़ आया जिसने मेरी पूरी जिंदगी बदल कर रख दी। मुझे तो ये भी समझ नहीं आ रहा कि मैंइसे अनोखे मोड़ को सुखदायक कहूं या दुख दायक। उस घटना को बयान करने से पहले मैं उस घटना के असली कारण को बताना चाहती हूं जिसके कारण ये घटना घटी।इसे घटना का असली कारण था मेरे पति का हर दिन शराब पीना। मेरे पति हर रोज शराब पीते हैं। शादी के टाइममें वो ऐसे नहीं थे उस टाइमवह नौकरी करते थे। जिंदगी सुखी थी। बच्चों के जन्म के पश्चात उन्होंने अपना बिजनेस शुरुआत किया। शुरुआत में काम अत्यधिक होने के कारण दौड़ धुप करनी पड़ती थी। वो इतना थक जाते थे के कभी कभी थकान मिटाने के लिए दोएक दो पेग दारू के लगा लिया करते थे। धीरे-धीरे ये उनकी आदत बन गई। पहले पहले मैं उनको उनकीइसे आदत के लिए खूब कोसा करती थी मगर धीरे-धीरे धीरे मैंने उनकी आदत को स्वीकार कर लिया। इसके दो तीन कारण थे पहला कारण तो बता मैं स्वयं देख सकती थी कि वह दारू को अय्याशी के लिए नहीं बल्किएक जरूरत के हिसाब से पीते थे। दूसरा मुख्य कारण था कि वह दारू पीकर कभी भी हल्ला नहीं करते थे लड़ाई झगड़ा नहीं करते थे। वह काम से आते थे दारु पीते थे और उसके पश्चात सो जाते थे मगर सबसे बड़ा कारण ये था कि दारु पीने के पश्चात वह हर रोज मेरी खूब दम लगाकर चुदाई करते थे। मेरी हर हर रोज भरपुर ठुकाई होती थीर। अक्सर लोग कहते हैं कि जैसे जैसे पुरुष की जवानी ढलती है दिन बीतते हैं वैसे वैसे सेक्स की चुदाई की इच्छा कम होने लगती है। ये बात मेरे पति के हिसाब से बिल्कुल ठीक थी। धीरे-धीरे उनकी चोदने की इच्छा कम हो रही थी लेकिन मेरे बारे में जो बिल्कुल उल्टी बात थी जैसे-जैसे मेरी उम्र बढ़ रही थी मेरी चुदवाने की इच्छा और भी तेज होती जा रही थी ऐसे में जब मेरे पति रात को दारू से टुन्न होकर दनादन मेरी चूत मैं लंड पेलते थे और मेरी खूब दमदार चुदाई करते थे तो मैं भला उनकी दारू को बुरा भला कैसे कह सकती थी। बस उनके मुंह से आने वाली दुर्गन्ध अच्छी नहीं लगती थी। लेकिनएक बार जबाब उनका लण्ड मेरी चूत के अंदर उत्पात मचाना सुरु करता था तो दुर्गन्ध भी खुशबू लगने लगती थी। मेने कभी ये नहीं सोचा था के उनकी दारू की लत्त जिसका मुझे भरपूर लाभ मिलता था आगे चलकर कभी मेरे लिए इतनी बड़ी मुश्किल बन्न सकती थी के मेरी पूरी ज़िन्दगी ही बदल देगी।
हुआ यूँ के मेरी बेटी की शादी के टाइममेरे जेठ जी भी अपने पूरे परिवार सहित आये हुए थे। वो अमेरिका में रहते हैं। उनकाएक बेटा है जिसकी सगाई अमेरिका में हो चुकी थी मगर शादी दोनों परिवार भारत में ही करना चाहते थे। इसीलिए जब वो नीतू की शादी के लिए भारत आये तो उन्होनो संग में ही अपने बेटे की शादी करने का भी फैसला कर लिया। मेरी बेटी की शादी के ठीकएक महीने पश्चात उनके बेटे की शादी की तारिख निकली। अब हम बंगलौर में रहते हैं जबके मेरे जेठ के लड़के के सुसराल वाले पुणे के हैं। चूँकि हम लड़के वाले थेइसे लिए हमें बारात लेकर पुणे जाना था। मेरे जेठ जी ने पुणे काएक पूरा होटल बुक् करवा लिया था। शादी के दो दिन पहले हम होटल पहुंचे थे। दोनों परिवार इतने रईस थे और शादी पर इतना खर्च हुआ के शादी की चकाचोंध देख कर पूरी दुनिया विस्मित हो उठी। नीतू को अपने पति के संग अलग कमर मिला था और मुझे अपने पति के साथएक अलग कमरा जबके मेरे बेटे सुधीर को दो और लड़को के संग कमरा शेयर करना पड़ा था।
पहली रात तो सफ़र की थकान ने हमें इतना थक दिया था के उस रात में और मेरा पति घोड़े बेचकर सोते रहे। मगर दूसरे दिन मेरा मन मचल रहा था। पूरा दिन शादी की ररंगीनियों में गुज़रा था। घर की सजावट से लेकर खाने पीने तक सभ कुछ इतना शानदार था के बस मन वाह वाह कर उठे। वैसे भी विदेश में वसने के कारन शादी का माहोल भी बहुत खुलापन लिए था। लडकिया ऐसे छोटे छोटे और टाइट कपडे पहन कर घूम रही थी जैसे उन्होनो कपडे अपने अंगों को ढकने की बजायेउन्को दिखाने के लिए पहने हुए थे। मगर लडकिया तो लडकिया औरतें भी कम् नहीं लग रही थी। किसी की साड़ी का पल्लू पारदर्शी था और अंदर से पूरा ब्लाउज मोटे मोटे मम्मो के दर्शन करवा रहा था तो किसी का लहंगा इतना टाइट था के गांड का पूरा उभार खुल कर नज़र आता था। कोई डीप गले का सूट पहन कर आधे मम्मे दिखाती घूम रही थी तो कई बिना ब्रा के इतना टाइट सूट पहन कर घूम रही थी के देखने वाले को पूरे मम्मो के दर्शन हो जाये। निप्पल तक पूरे साफ़ साफ़ दिखाई दे रहे थे।
मर्दों की खूब चांदी थी। गानों पर नाचते हुए औरतों को खूब मसल रहे थे। और गाने भी कैसे.मुन्नी बदनाम हुयी, बीड़ी जला ले. उफ्फ्फ ऐसा माहोल मेने नहीं देखा था। जिस तरह खुलेआम मरद औरतेंएक दूसरे के संग ठरक भोर रहे थे उनको देख कर मेरी ठरक भी कुछ् जयादा ही बढ़ गयी थी। मेरे निप्पल कड़े हो गए थे और चूत भी खूब रस बहा रही थी। ऐसे मेंएक मनचले ने नाचते हुए बहाने से दो तीन बार मुझे रगड़ दिया। उफ़फ हरामी ने चिंगारी को हवा देकर भड़का दिया था अब मेरा पूरा जिस्म वासना की भीषण अग्नि में जल रहा था। वहां का माहोल गर्म और गर्म होता जा रहा था। हर कोई इशारों इशारों में बातें कर रहा था। हर मरद स्त्री टंका फिट कर रहे थे। आज कई औरतें पराये मर्दों के निचे लेटने वाली थी। कईयो की आज सील टूटने वाली थी। आज रात चुदाई का खूब दौर चलने वाला था। स्वयं मेरी बेटी मेरे सामने अपने पति से लिपटी हुयी थी। उसे तो लगता था मेरी मोजुदगी से कोई मतलब ही नहीं था। खैर उसका दोष भी कया था, नयी नयी शादी हुयी थी। चूत को लण्ड मिला था और जिस तरह से मेरा दामाद उसे स्वयं से चिपकाये हुए था, जैसे वो बार बार उसके अंगो को सहला रहा था, मसल रहा था लगता था मेरी बेटी की खूब दिल खोलकर ठुकाई करता था। इधर वो कम्बखत जिसने नाचने के दौरान कई बार मुझे मसला था मेरे आगे पीछे ही घूम रहा था। कमीने ने बड़े ज़ोर ज़ोर से मम्मो को मसला था। निप्पल मैं अभी भी हलकी हलकी चीस उठ रही थी। अभी भी मौका देखकर वो कई बार मेरे गाँड़ो में ऊँगली घुसा चूका था। मेने उसे घूर कर देखा मगर हद दर्जे का ढीठ इंसान था। वैसे भी जवान था। कोई पैंतीस के करीब का होगा। जिसम भी बालिश्ठ था। ऐसे पुरुष ज्यादा ज़ोरदार चुदाई करते हैं। वो जिस तरह से मुझे देख रहा था लगता था बस मौके की तलाश कर रहा था के कब् मुझे ठोकने का उसे मौका मिला। वो मेरी और देखते हुए ऐसे होंठो पर जीभ फिरा रहा था औरइसे तरह पेंट के उपरि से अपने लण्ड को मसल रहा था जेसे वहीँ मुझे खड़े खड़े ही चोद देना चाहता हो। पेंट का उभार देखकर लगता था खूब मोटा तगड़ा लण्ड था। मेरी चूत पानी पानी हो चुकी थी। पूरी देह कामाग्नि मैं जल रही थी। अब तो मेरा दिल भी खुल कर चुदवाने के लिए मचल रहा था। और मेरे सामने वो अजनबी पूरी तरह तयार था मेरी भरपूर चुदाई के लिए।एक तो पिछली रात को मेरी चुदायी नहीं हुयी थी और उपरि से आज के माहोल ने मुझे इतना गर्म कर दिया था के एकबारगी तो मेरा दिल भी मचल उठा के आज पराये लण्ड से चुद जायुं। उफ्फ्फ कामोन्माद मेरे सर चढ़कर बोल रहा था और मैं जिसने आज ताक अपने पति के सिवा किसी दूसरे लण्ड को छूआ तक नहीं था आज पराये मरद के नीचे लेटने के लिए मचल रही थी। दिल कर रहा था आज अपने जिसम को लूटा दूँ, उस अनजान पुरुष से अपना कांड करवा दूँ, अपनी चूत के संग साथ अपनी गांड भी उससे मरवायुं। और यकीनन ऐसा हो भी जाता यदि में वहां से चली न आती। यदि कुछ देर और वहां रूकती तोह जरूर उससे ठुकवा बैठती। मैं कमरे में आते ही नहाने चली गयी। ठन्डे पानी ने आग को और भड़का दिया। चूत लण्ड के लिए रो रही थी। मेरे मम्मे मैं कसाव भर गया था। निप्पल इतने अकड़े हुए थे के ज़ोर ज़ोर से मसल कर ही उनको ढीला किया जा सकता था।
मेरा दिल तो जरूर था ऊँगली से स्वयं को शांत करने का। मगर मेने अपने पति का इंतज़ार करना ही बेहतर समझा। आग तो आज उसके दिल में भी बराबर लगी होगी। कल रात उसके लण्ड को भी चूत नसीब नहीं हुयी थी। और वेसे भी वो आज खूब पिए हुए था। आज तो जरूर पतिदेव मेरी चूत की ऐसी तैसी कर देने वाले थे।उन्को भी मेरी चूत मारे बिना नींद कहाँ आती थी। जरूर आने ही वाले थे। मगर इंतज़ारएक समय का भी नहीं हो रहा था। मेने बदन पोंछा और कमरे की बत्ती बंद करके पूरी नंगी ही बेड पर लेट गयी।
मुझे नहाये हुए दस् मिनट ही गुज़रे होंगे के अचानक से कमरे का दरवाजा खुला और पतिदेव अंदर आये। मेने झट से अपने उपरि चादर खींच ली के कहीं उनके संग कोई हो ना। मगर वो अकेले थे उन्होनो दरवाजा खोला और अंदर कदम रखते ही वो गिर पड़े। लगता था दारू कुछ जयादा ही चढ़ा ली थी। मेने कुछ समय इंतज़ार किया के वो उठकर बेड की तरफ आ जाये। मगर जिस तरह उन्होनो पी रखी थी उससे तो उनका बेड ढूंढ पाना भी मुश्किल ही था। मुझे ही हिम्मत करनी थी। मैं चादर हटाकर बेड से निचे उतरी। दरवाजा हल्का सा खुला थाइसलिये मेने बत्ती नहीं जलायी। पूरी नंगी दरवाजे के पास गयी। दरवाजा बंद करके मेने पति को सहारा दिया और वो खांसता हुआ उठ खड़ा हुआ। उससे शराब की तेज़ महक आ रही थी। मुझे शक हो रहा था के वो इतने नशे में मुझे चोद भी पायेगा के नहीं। में किसी तरह पति को बेड तक लेकर गयी और वो उस पर गिर पड़ा। मेने जल्दी से।उसके बदन पर हाथ घुमाया तोह मेरा दिल ख़ुशी से झूम उठा। उसका लण्ड पत्थर की तरह कठोर था। मेने उसे हाथ में पकड़ कर मसला तोह उसने तेज़ ज़ोरदार झटका खाया। उफ्फ्फ आज तो उसका लण्ड कुछ जयादा ही तगड़ा जान पढता था। एकदम कड़क था। बल्कि मेरे मसलने से और भी कडा होता जा रहा था। अब मुझे परवाह नहीं थी। यदि पतिदेव कुछ नहीं भी करते तो में स्वयं लण्ड पर बैठकर दिल खोलकर चुदवाने वाली थी।
मेने पेंट को खोला और खींच कर टांगो से निकल दी। दोबारा मेने जांघिये को इलास्टिक से पकड़ खींचते हुए पैरों से निकाल कर निचे फेंक दिया। मैं बेड के किनारे बैठ लण्ड को हाथ में लेकर मसलने लगी।
"उफ्फ्फ्फ्फ़.कहाँ थे जी आप अब तक। यहां मेरी चूत जल रही है और आपको शराब के बिना कुछ नजर ही नहीं आता। कल रात भी आपने मुझे नहीं चोदा। वैसे आपको तो शायद याद न हो मगरइसे पूरे वर्ष में कल पहली रात थी जब अपने मेरी चूत नहीं मारी थी।" पतिदेव की तेज़ तेज़ भरी साँसे गूंज रही थी। वो जाग रहे थे मगर कुछ बोल नहीं रहे थे जा शायद जयादा शराब पिने के कारन बोलने लायक नहीं रहे थे।
"थोड़ी कम पी लेते।" मैं पतिदेव के टट्टो को हाथों मैं भर सहलाती बोली। मेने थोडा सा दवाब बढ़ाया तो उनके मुंह से तेज़ सिसकी निकली। वो जाग रहे थे अब कोई शक नहीं था। मेने अपना मुंह झुकाया और सुपाड़े को अपने होंठो में भर लिया। जैसे ही मेरी जिव्हा लण्ड की मुलायम त्वचा से टकराई पतिदेव के मुंह से 'आह्ह्ह्ह्ह्' की ज़ोरदार सिसकारी निकली। में मन ही मन मुस्करा उठी। लण्ड को होंठो में दबा में सुपाड़े को चाटती उसे चूसने लगी।एक हाथ से टट्टे सहलाती मैं मुख को धीरे-धीरे धीरे उपरि नीचे करने लगी। लण्ड और ज्यादा फूलता जा रहा था। मुझे हैरानी होने लगी थी मगर हैरानी से ज्यादा ख़ुशी हो रही थी। मेरा मुख और भी तेज़ी से उपरि नीचे होने लगा। तभी पतिदेव ने मेरे सर को पकड़ लिया और अपना पूरा लण्ड मेरे मुंह में घुसाने लगे। मेने उनके पेट पर हाथ रखकरउन्को ऐसा करने से रोका। पहले मैं उनका पूरा लण्ड मुंह में ले लेती थी मगर आज जिस तरह उनका लौड़ा फूला हुआ था मैं चाह कर भी उनका पूरा लण्ड मुंह में नहीं ले सकती थी। वैसे भी उस टाइममैं लण्ड मुंह में नहीं अपनी चूत में चाहती थी।
मेने लण्ड से अपना मुख हटाया और पतिदेव की टांगे उठाकर बेड के उपरि कर दी। दोबारा मैं फ़ौरन बेड के उपरि चढ़ गयी।एक हाथ से लण्ड पकडे मैं पतिदेव के उपरि सवार हो गयी। उनकी छाती परएक हाथ रखकर मैं उपरि को उठी जबके दूसरे हाथ से उनका लण्ड थामे रखा। जहां अंधेरे में मेने अपनी कमर हिलाकर अंदाज़े से लण्ड के निशाने पर रखी और दोबारा धीरे-धीरे धीरे कमर नीचे लाने लगी। लण्ड मेरे दोनों गाँड़ो के बिच घुसता हुआ आगे मेरी चूत की और सरकने लगा। जैसे ही लण्ड का सुपाड़ा मेरी भीगी चूत के होंठो से टकराया हम दोनों के मुख से आह निकल गयी। आज हम दोनों कुछ जयादा ही उत्तेजित थे। पतिदेव का लौड़ा तो कुछ जयादा ही मचल रहा था।
"ऊऊफ़्फ़फ़्फ़ देखिये ना आपका लण्ड कितनी बदमाशी कर रहा है।एक दिन चूत नहीं मिली तो कैसे अकड़ कर उछल कूद मचा रहा है। अभी इसको मज़ा चखाती हूँ।" मैं लण्ड को हाथ में दबाये मैंउस पर चूत का दबाव देने लगी। मेरी चूत के होंठ खुले और सुपाड़ा धीरे-धीरे धीरे अंदर सरकने लगा। उफ्फफ़फ़फ़ सुपाड़ा अंदर घुसते घुसते मुझे पसीना आने लगा। लण्ड इतना फूला हुआ था के मेरी चूत को बुरी तरह से फैला रहा था। मेने अपने सूखे होंठो पर जीभ फिराई और दोबारा से दबाव बढ़ाना शुरु किया। मेरी रस से सरोबर चूत में समय पल लण्ड अंदर धंसता जा रहा था। मुझे हलकी हलकी पीड़ा के संग अत्यधिक चुभन महसूस हो रही थी जिसने मुझे असमंजस में डाल दिया था। मगर मैं कामोन्माद के चरम पर थी और उस टाइमसिर्फ और सिर्फ चुदवाने के बारे में ही सोच रही थी। आज तक सिर्फ और सिर्फ मेरे पति ने ही मुझे चोदा है।एक इकलौता लण्ड मेरी हूत में हज़ारों हज़ारों दफा गया हैइसलिये मुझे बढ़िया खासा एहसास है के वो चूत के अंदर किस हद तक घुसता है। और आज जब वो लण्ड उस हद से बहुत आगे पहुँच चूका था तो मुझे हैरत होने लगी। शायद आज अतिउत्तेजना की वजह से उनका लण्ड कुछ अत्यधिक फूल गया था। जब मेने उसे मुठी में भरा था तो मुझे वो ज्यादा मोटा लगा था। अचानक नजाने कयों मुझे अजीब सा लगा और मैं अपनाएक हाथ नीचे हम दोनों के बीच ले गयी। उफ्फ्फ मेरे आस्चर्य की हद न रही। लण्ड तो अभी भीएक इंच से जयादाबाहर् था। मैं कुछ समझ पाती उसी टाइममेरे पति के दोनों हाथ मेरी कमर पर कस गए और आईईईईईईए. मेरे मुंह से तेज़ सिसकारी निकल गयी। कमीने ने दोनों हाथों में मेरी कमर जकड़ कर नीचे को दबाया और नीचे से अपनी कमर उपरि को उछाली और पूरा लण्ड मेरी चूत में पेल दिया। वो कमीना ही था। मेरे पति का लण्ड इतना लम्बा मोटा नहीं हो सकता था। वो कौन था मुझे कोई अंदाज़ा नहीं था और में सोचने की हालात में भी नहीं थी। कमीने ने लण्ड अंदर घुसाते ही धक्के लगाने सुरु कर दिए। मेरी कमर पकड़ वो नीचे से दनादन मेरी चूत में लण्ड पेलने लगा। मेरी कमर को उसने ज्यादा कस कर पकड़ा हुआ था के कहीं मैं भाग न जायुं। मगर मैं भागने की स्थिति में तो थी नहीं। कामोत्तेजना तो पहले ही मेरे सर चढ़ी हुयी थी और चूत में उस भयंकर लण्ड के ताकतवर धक्को ने मुझे पसत कर दिया। मेरे मुख से सिसकियाँ निकलने लगी। मैं आह उनन्ह उफ्फ्फ करती सिसकती कराहती चुदने लगी। सिसकियों के संग साथ में स्वयं अपनी कमर हिलती चुदाई में उसका संग देने लगी। मुझे राजी देखकर उसकी पकड़ धीरे-धीरे धीरे मेरी कमर पर हलकी पढने लगी। जैसे ही मेरी कमर पर उसकी पकड़ ढीली पड़ी मेने अपने दोनों हाथ उसकी छाती पर रखे और उछाल उछाल कर अपनी चूत उसके लण्ड पर पटकने लगी। वो भी ताल से ताल मिलाता मेरी चूत में लण्ड पेलने लगा। फच फच की आवाज़ कमरे में गूंजने लगी।
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मेनेएक बार भी उस पराये पुरुष को रोकने की कोशिश नहीं की थी। मेरे दिल में ख़याल तक नहीं आया था के मैं अपने पति के संग धोखा कर रही हूँ। सुना था भगवान मन की मुराद पूरी कर देता है आज देख भी लिया था। आज शाम से बार बार मन में पराये पुरुष से चुदवाने का ख़याल आ रहा था और अब हक़ीक़त मेंएक ताकतवर लण्ड मेरी चूत को बुरी तरह से रगड़ ररहा था। उफ्फ्फ्फ्फ़ ढ कहीं ये वही तो नहीं जिसने डांस के टाइमकई बार मेरे मम्मो को मसल दिया था। वही होगा। पूरी शाम मेरे आगे पीछे घूम रहा था।
मैं अभी सोच ही रही थी के उसने मेरी बाहें पकड़ी और मुझे अपने उपरि गिरा लिया। दोबारा वो मुझेएक तरफ को करके मेरे उपरि आ गया। मेरी टांगे के बीच आकर उसने मेरे पांव पकडे और उठाकर अपने कंधो पर रख लिए। मेने अपनी टांगे आगे कर उसकी गर्दन पर लपेट दी। उसने अपना लौड़ा मेरी चूत रखा औरएक करारा झटका मारा। कमीने ने पूरा लौड़ाएक ही झटके में जड़ तक पेल दिया था। मैं चीख ही पड़ी थी। मगर उसने कोई दया न दिखाई और मेरे कंधे थाम मेरी चूत में दोबारा से लण्ड पेलने लगा। 'आअह्ह्ह्ह्ह.ऊऊन्ग्गह्ह्ह्ह्ह्ह्.ऊऊऊम्मम्मम्म.' मेरी सिसकियां तेज़ और तेज़ होने लगी। वो और भी जोश में आ गया।
"ऊऊफ़्फ़फ़्फ़.हायययययययययय.मेरे मेरे मम्मे पकड़ो.मेरे मम्मे पकड़ो." मेने उसके हाथ कंधो से हटाकर अपने मम्मो पर रख दिए। उसने तृन्त मेरे मम्मो को अपने हाथो में कस लिया। "ऐसे ही मेरे मम्मो को मसल मसल कर मुझे चोदो। कस कस कर चोदो मुझे" मैं उस अनजान सख़्श से बोली। और जैसा मेने उसे कहा उसने वैसा ही किया। मेरी टांगे कंधो पर जमाये उसने ऐसे ताबड़तोड़ धक्के मेरी चूत में लगाये के में बदहवासी में चीखने लगी। उसका मोटा लण्ड मेरी चूत को इतनी बुरी तरह रगड़ रहा था और मुझे ऐसा असीम आनंद आ रहा था के में उसे उकसाती कमर उछाल उछाल कर चुदवाने लगी। वो भी धमाधम लण्ड पेले हा रहा था। कैसा जबरदस्त आनंद था और वो आनंद समय पल बढ़ता ही जा रहा था। अंततः मेरा बदन अकड़ने लगा। मैं हाथ पांव पटकने लगी।
"उफ्फ्फ्फ़.मारो.और ज़ोर ज़ोर से मारो.हाय चोदो मुझे जितना चाहे चोदो.पूरा लौड़ा पेलो.आआईईईईई." मैं ज्यादा देर तक टिक न सकी और मेरी चूत से रस फूटने लगा। वो अजनबी अभी भी मुझे पेले जा रहा था।एक एक धक्का खींच खींच कर लगा रहा था। और दोबारा वो भी छूट गया। मेरी जलती चूत में उसका गर्म गरम रस गिरने लगा। हुंगार भरता वो मेरी चूत को भरने लगा। वो अभी भी धक्के लगा रहा था। अंततः उसके धक्के बंद हो गए। मगर वो अब भी उसी हालात में था। अब भी उसके हाथ मेरे मम्मो को कस कर पकडे हुए थे। अब भी मेरी टांगे उसके कंधो पर थी। मेरी साँसे लौट चुकी थी। मेने उस अजनबी के चेहरे को पकड़ अपने चेहरे पर झुकाया और अगले ही समय हमारे होंठ मिल गए। मैं उसकी जिव्हा को अपने होंठो में भरकर चूसने लगी। वो भी मेरे मुखरस को पीता मेरे होंठो को काटता मुझे चूमने चाटने लगा। धेरे धीरे-धीरे उसके हाथ मेरे मम्मो पर दोबारा से चलने लगे। कभी मैं उसके होंठो को चूमती चुस्ती तो कभी वो। हमारी साँसे फूलने लगी। जब हम दोनों के चेहरे अलग हुए तो हम हांफ रहे थे। सांसे सँभालते ही हमारे होंठ दोबारा से जुड़ गए।
"मेरी टांगो में दर्द हो रहा है"इसे बार जब हमारे होंठ जुदा हुए तो मेने उसे धीमे से कहा। उसने तृन्त मेरे मम्मो से हाथ हटाये और आराम से मेरी टांगे अपने कंधो से उतार दी और दोबारा वो मेरे उपरि से हट गया। कुछ देर पश्चात वो उठा और अँधेरे में अपने कपडे ढूंढने लगा।
"दरवाजे के दायीं और स्विच है।" मेने उसे बताया। मगर उसने स्विच ओन नहीं किया और वहीँ अँधेरे में हाथ चलता रहा। मुझे उस पर हैरत हो रही थी। वो अभी अभी मुझे चोद कर हटा था और मुझे चेहरा दिखने में उसे डर लग्ग रहा था। जबकेएक स्त्री होने के नाते डरना मुझे चाहिए था। खैर उसे अपनी पेंट मिल गयी और वो पहनने लगा। मुझे उसकाइसे तरह से अचानक चला जाना बढ़िया नहीं लगा।
"सुनो." दरवाजे के हैंडल को पकडे वो वहीँ पर रुक गया। "तुमने अभी अभी मुझे चोदा है कम से कम मुझे अपना नाम तो बताकर जाओ." मगर वो कुछ नहीं बोला और उसने दरवाजे का हैंडल घुमाया। मुझसे रहा नहीं गया। "तुम डर क्यों रहे हो? तुमने चोरी से मेरे रूम में घुसकर जबरदस्ती मेरी चुदाई की है मगर मेने तुम्हे कुछ नहीं कहा बल्कि तुम्हारा पूरा संग दिया है। फिरइसे तरह घबरा कर भाग क्यों रहे हो।" वो दोबारा भी कुछ नहीं बोला। शायद वो मन में हालात का जायजा वे रहा था। मैं उसे अभी जाने नहीं देना चाहती थी। और उसे रोकने के लिए उसे विस्वास दिलाना जरूरी था के मैं उसका पकड़वाने वाली नहीं थी।
"देखो यदि मेने तुम्हे पकड़वाना होता तो में तुम्हे कब की पकड़वा चुकी होती.तुम्हे खुदइसे बात बात का एहसास होना चाहिये। तुम बेकार में डर रहे हो।" वो कुछ समय खड़ा अँधेरे में सोचता रहा और दोबारा जैसे उसने फैसला कर लिया। उसने हैंडल घुमाया। मैं बेड से निचे उतरी। कैसा गधा है यह, मैं इसे निमत्रण दे रही हूँ और ये भाग रहा है|
"देखो रुको.जाने से पहले मेरी बात सुनलो" उसके हाथ वहीँ ठिठक गए। अब आखिरी मौका था उसे रोकने का। "देखो मुझे लगता है तुम जानते हो के मैं कौन हूँ और तुम मुझे पहचानते हो.लेकिन मुझे नहीं मालूम तुम कौन हो नाही मैं तुम्हे पहचानती हूँ और यदि तुम बताना नहीं चाहते तो मुझे कोई एतराज़ नहीं है। मैं तुमसे नहीं पूछूंगी।"इसे बार मेरे शब्दों ने असर दिखाया और उसने हैंडल छोड़ दियाऔर वो मेरी तरफ घूम गया। "जो सुख जो आनंद आज तुमने मुझे दिया है मेरे पति ने आज तक मुझे नहीं दिया। इतना मज़ा.इतना मज़ा पहले कभी नहीं आया।"मैं चलते चलत्ते उसके पास पहुच गयी थी। हम दोनों आमने सामने थे। "मैं तुम्हारा सुक्रिया अदा करना चाहती थी। तुम्हारा नामइसलिये पूछ रही थी के यदि पश्चात में कभी.कभी भी.मेरा मतलब है यदि कभी दोबारा से तुम्हारा दिल करे तो मुझे कोई एतराज़ नहीं है" मैं सिसकती आवाज़ में बोली। अब वो मेरी बात सुन रहा था और वहां से जाने के बारे में भूल चूका था। मेने अपना हाथ आगे बढाकर उसके सीने पर रखा और दोबारा उसे निचे की और ले जाने लगी। उसकी सांसो की रफ़्तार तेज़ हो रही थी। शायद वो भी अभी वहां से जाने का इच्छुक नहीं था। मगर अपना भेद खुलने से डर रहा था। मेरा हाथ जब पेंट की जिपर पर गया तो वहां पर हलकी सी हलचल देख कर मेरे होंठो पर मुस्कान आ गयी। मेने धेरे से पेंट की जिपर नीचे खींच दी। और उसके जांघिये में हाथ डालकर उसका कड़क होता लण्ड पकड़ लिया। मेरा हाथ लगते ही वो सिसक उठा।
"तुम्हारा ये ज्यादा बड़ा है.बहुत मोटा है.लंबा भी खूब है.मुझे नहीं मालूम था ये इतना बड़ा भी हो सकता है" मैं लण्ड को मसलते बोली जो अभी भी मेरी चूत के रस से भीग हुआ था। । लण्ड तेज़ी से अकड़ता जा रहा था। "उफ्फ्फ्फ़ यकीन नहीं होता इतना मोटा लण्ड मेरी चूत के अंदर था.बहुत ज़ोर से ठोका है तुमने मुझे.मेरी चूत में चीस उठ रही है" में आग में घी डालते बोली। उसकी सांसो की रफ़्तार मुझे बता रही थी के वो कितना उत्तेजित है। वो धीरे-धीरे धीरे मेरे हाथों मैं अपना लण्ड ठेल रहा था। "सुनो.मेरे पति आज रात आने वाले नहीं है.अगर तुम कुछ देर और रुकना चाहो तो." वो कुछ नहीं बोला। मेने उसके लण्ड से हाथ हटाये और उसके हाथ पकड़ अपने मम्मो पर रख दिए। वो मेरे निप्पलों को मसलने लगा और में उसकी पेंट की बेल्ट खोलने लगी। उसकी पेंट और जांघिया खुलते ही उसने अपना चेहरा झुकाया और मेरे निप्पल को होंठो में भरकर चुसकने लगा। में दोबारा से उसका लण्ड मसलने लगी। वो मेरे मम्मो को चूस्ता चाटताउन्को दांतो से काट रहा था और में उसे रोक नहीं रही थी।
कुछ देर उससे मम्मे चुसवा कर मेने उसका चेहरा अपने सीने से हटाया और उसके पैरों के पास घुटनो के बल बैठ गयी। मैं जीभ निकाल उसके लण्ड को चाटने लगी। उसकी सिसकारियाँ गूंजने लगी। अब वो मेरे बस में था। सुपाड़े को अपनी जिव्हा से रगर रगड़ कर लाल करने के पश्चात मेने उसे अपने मुंह में भर लिया और उसे चूसने लगी। में अपना मुख हिलाती लण्ड को खूब मज़े से चुसक रही थी। अब उसका लण्ड दोबारा से अपने भयन्कर रूप को धारण कर चूका था। मुझसे इंतज़ार नहीं हो रहा था और उस अजनबी से भी नहीं। उसने मेरे कंधे पकड़ मुझे उठाया। मैं खड़ी हो गयी और हमारे होंठ मिल गए। मुझे चूमते हुए उसने मेरीएक टांग उठा ली और मेरी चूत पर लण्ड दबाने लगा। मेने लण्ड को हाथ से पकड़ रास्ता दिखाया। अगले ही लण्ड का सुपाड़ा चूत में था। में उत्तेजना में उसके होंठ काटने लगी। मेने अपनी टांग उसकी कमर पर लपेट दी और अपनी बाहें उसके गले में डाल दी। उसनेएक हाथ से मेरी टांग को उठाया और दूसरे को मेरी पीठ पर लपेट मेरी चूत में लण्ड पेलने लगा। वो मुझे ठोकने लगा और मैं दोबारा से ठुकने लगी। हम दोनोंएक दूसरे के मुंह में सिसक रहे थे। दोनों चुदाई मेंएक दूसरे की मदद कर रहे थे। उसका मोटा लण्ड मेरी चूत में खचाखच खचाखच अंदरबाहर् हो रहा था।
"कहीं तुम वहीँ तो नहीं जो डांस के टाइमबार बार मेरे मम्मो को मसल रहा था और मेरी गांड में ऊँगली डाल रहा था।" मगर उसने कोई जवाब नहीं दीया। वो बस लगातार मुझे चोदे जा रहा था जेसे उसे ये मौका दुबारा नहीं मिलने वाला था। मेने उसे दुबारा नहीं पूछा। कहीं वो डर कर चुदाई बंद न कर दे। मुझे भी ऐसा कड़क लण्ड शायद दुबारा नहीं मिलने वाला था इसीलिए मेने भी मौके का पूरा फायदा उठाने की सोची और मस्ती में खुल कर चुदवाने लगी। हर धक्के का जवाब में भी बराबर ज़ोर लगा कर दे रही थी। पूरी मस्ती में ठुकवा रही थी।
"ओह्ह्ह गॉडडडडड.ऊऊफ़्फ़्फ़्फ़्फ़्फ़्फ़्फ़्.पेलो.कस कस कर अपना लण्ड पेलो। ऊऊफ़्फ़फ़्फ़ ऐसे ही चुदवाने के लिए में तड़फती थी। और ज़ोर से.और ज़ोर से.हाययययययय.ऊउन्ननगहह्ह्ह् मेरी चूत.मेरी चूत.चोदो मुझे." मेरी बातें उसके जोश को दुगना चुगना कर रही थी। दोबारा यकायक वो रुक गया और मुझसे अलग हो गया। शायद वो आसान बदलना चाहता था। उसने मुझे घुमाया और मेरे सर को निचे की और दबाने लगा। मुझे समघने में देर न लगी और में तरुन्त बेड के किनारे को पकड़ झुक कर घोड़ी बन गयी। उसने पीछे से मेरी कमर को पकड़ा और अपना लण्ड पूरे ज़ोर से मेरी चूत में घुसेड़ दीया।
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Dear writer Juhi, Apun ne update pad Liya h. bole toh bilkul raapchik or dhaasu update diya h. bus Apun kaa doubt clear kr do. kahani adultary h ya fir incest. Agar kahani incest h toh fir obviously yeh uskah beta he h. joo Sunaina Ko dabochkar pel rah h. story kaa theme incest rakkha h. Toh please writer Devi theme say mat bhatakna kyonki incest theme pe adultary kahani padna koy bi reader Ni chahega.
Lage raho agle update kaa entezaar rhega.
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