साँझा पलंग साँझा बीबियाँ
प्रिय पाठक गण , अकसर मेरी कहानिया लम्बी होती हैं और शायद कुछ लोगोँ को बोरिंग भी लगे, क्यूंकि मैं कहानियों में पटकथा पर और जो भावावेश और जज्बा होता है उस पर ज्यादा बल देता हूँ। ये कहानी वैसे तो साधारणसी है पर इसमें वही जज्बातों आपको दिखेंगे। यदि आपमें धैर्य एवं जज्बातों को परखने की शूक्ष्मता के लिए जो टाइमऔर सोच चाहिए उसका अभाव है तो आपको मेरी कहानी नहीं भाएगी।
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राज और कमल की दोस्ती स्कूल में मशहूर थी। उनके घर नजदीक ही थे और उनके माता पिताएक दूसरे को जानते थे। वह शुरुआत से सेकंडरी हाई स्कूल तक संग साथ पढ़े, क्रिकेट खेले और बहोत मस्तियाँ भी की। कमल राज सेएक क्लास सीनियर था। उनकी दोस्ती कैसे इतनी गहरी हुयी इसके पीछेएक कहानी थी। कहानी कुछइसे तरह थी की जब राज छठवीं क्लास में था तब उसीकी स्कूल में सीनियर क्लास मेंएक हट्टाकट्टा लड़का था जो हमेशा राज का मजाक उड़ा कर राज को तंग करता रहता था। एकबार जब राज ने उसका विरोध किया तो उसने राज कोएक घूंसा मारा। राज गिर गया और उसके दाँतो से खून बहने लगा। तब कमल ने उस मोटे लड़केकी पिटाई की और राज को बचाया। उस लड़के से लड़ते कमल को भी चोटें आयीं और बहुत खून निकला।
पर बात यहां ख़तम नहीं हुई। वही मोटा लड़का शहर के पुलिस अफसर का बेटा था। कमल से पिटाई होने के पश्चात वह तिलमिला उठा था औरएक दिन मौक़ा मिलते ही उसने राज को स्कूल छूटते ही स्कूल केबाहर् ही अपने दोस्तों के संग मिलकर अपनी गाडी में उठवा लिया और राज को शहर केबाहर् दूरएक नाली के पास पिटाई करके लहू लुहान हालत में फेंक दिया।
कमल जैसे ही स्कूल सेबाहर् निकला तो बच्चों ने उसे बताया की राज को उस मोटे लड़के ने दोस्तों से मिलकर कैसे अगुवा किया था। कमल आग बबूला हो गया, पर उसे राज की चिंता थी। वह जल्दी अपनी साइकिल पर निकला और उस मोटे लड़के के घर केबाहर् कुछ पौधों की आड़ में छुपकर वह मोटे लड़के का इंतजार करने लगा। जब वह लड़का अपने घर पहुंचा की कमल ने लपक कर गाड़ी में बैठे हुए मोटे लड़के की गर्दन दबोच ली और जोर से दबायी। वह लड़का छटपटा ने लगा और कमल के हाथों से चार करारे थप्पड़ रसीद होने पर उसने अपना गुन्हा कुबूल किया। कमल के कहने पर उसने राज को जहां पिटाई कर के छोड़ा था वहाँ ले गया।
उसी गाडी में कमल राज को अस्पताल ले गया और उसकी जान बचाई। मोटे लड़के के पिता जो पुलिस में थे वह बड़े सज्जन थे। अपने बेटे की करतूत पर बड़े शर्मिन्दा हुए और बेटे को सबके सामने
दो थप्पड़ लगाए और कमल और राज के माता पिता को बेटे की शिकायत ना करने के लिए प्रार्थना की। राज के मम्मी बाप तो कमल के पाँव पकड़ कर उसका अहसान मानने लगे।इसे वाकये के पश्चात राज के माता पिता कमल के घर आये और उसकी बड़ी तारीफ की। राज और कमल के कुटुंब की दोस्ती और गहरी हो गयी। राज की मम्मी और कमल की माताजीएक दूसरे की पक्की सहेलियाँ बन गयीं। राज कमल को बड़े भाई की तरह मानने लगा। कमल हमेशा उसे छोटे भाई की तरह प्रेम करता था। राज की मम्मी कमल को इतना प्रेम करती थी की वह सबको कहती थी की "अगर मेरी बेटी होती तो मैं कमल के संग उसकी शादी जरूर करती।"
घरसे राज या कमल कोई भी चीज़ लाते तो वह मिल बाँट कर खाते। उनकी दोस्ती बचपन से ही गाढ़ी हो गयी। राज के लिए भी कमल का वजूद कोई देवी देवता से कम नहीं था। राज को कोई भी छोटा मोटा फैसला करना होता था तो वह कमल से पूछता और वही करता जो कमल उसे कहता। इतना ही नहीं, जब कभी कमल अपने घर में सोया होता था और राज उसे मिलने आता, तो जल्दी कमल के पाँव दबाने लगता था।
कमल स्कूल मेंएक बढ़िया खासा क्रिकेटर माना जाता था। नियमित व्यायाम करने के कारण उसका बदन गठीला और आकर्षक था। अपनी स्कूल की टीम का वह कप्तान था। कमल सुन्दर बदन का, मोहित आँखों वाला और मनमौजी था। उसकीएक आदत थी की वह जो दिल में आता था बोल देता था या कर देता था। कमल मजबूत बदन का था और राज थोड़ा कमजोर, दुबला पतला था। पढ़ाई में राज हमेशा अव्वल आता था। कमल भी पढ़ाई में ठीक ही था।
उनकी दोस्ती बढ़ती गयी और उन दोनों की जोड़ी पुरे स्कूल में मशहूर हो गयी। कमल रंगीन तबियत का था। राज थोड़ा गंभीर किस्म का था। छठी सातवीं कक्षा से ही अक्सर कमल राज से लड़कियों के बारेमें बातें करता। धीरे-धीरे धीरे राज भी कमल के संग स्कूल की लड़कियों के बारेमें बातें करने लगा। जब वह दोनों बात करते तो मालूम होता की उन दोनों की नजर अक्सरएक ही लड़की पर टिकती थी।एक बार कमल ने राज से पूछा, "राज यार हम दोनों कोएक ही लड़की क्योंपस्न्द आती है? यदि हमनेएक ही लड़की शादी के लिए भीपस्न्द की तो क्या होगा?"
राज ने फ़ौरन कहा, "तो दोबारा हम दोनों ही वह लड़की से शादी करेंगे।"
कमल: "परएक लड़की से दो मर्द शादी नहीं कर सकते।"
राज: "तो दोबारा हम क्या करेंगे? तो मैं वह लड़की तुम्हारे लिए छोड़ दूंगा। मैं उससे शादी नहीं करूंगा।"
राजकी बात सुन कर कमल राज को गले लगा कर बोला, "नहीं यार, ऐसा नहीं हो सकता। हमारी यारी के बिच में कोई लड़की नहीं आनी चाहिए। यदि ऐसी नौबत आयी तो हम दोनों अलग अलग लड़कियों से शादी तो करेंगे, लेकिन दोनों लडकियां हम दोनों की पसंदगी की ही होंगीं और हमारी बीबियाँ हम दोनों की होंगी ना की किसीएक की। साँझा पलंग साँझा बीबियाँ."
कमल हंस पड़ा, "यह तो ज्यादा बढ़िया होगा। तब तो हम दोनों हमारी दोनों बीबियों के संग ही रहेंगे और उनके संग मिलजुलकर एन्जॉय करेंगे। कभी तुम मेरी बीबी के संग रहना और मैं तुम्हारी बीबी के साथ। कैसी रहेगी? कहो मंजूर?"
राज नेएक ही समय में कहा, "एकदम मंजूर।"
उस टाइमइतनी समझ नहीं थी की बीबी कोई बपौती संपत्ति नहीं है की उसे मिलजुल कर बाँटा जाये।
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हाई स्कूल पास करने के पश्चात वह दोनों को अलग अलग कॉलेज में दाखिला मिला और वह कुछ सालों के लिए अलग हो गए। पर उनकी बात फ़ोन पर होती ही रहती थी। कमल राज को अपनी हर बात बताता और राज कमल को। फ़ोन पर भी वहएक दुसरेकी टांग खींचते रहते की कोई लड़की फँसी के नहीं।
कमल की शोहरत बढ़ने लगी, क्यूंकि वह क्रिकेट खेलनेमें अव्वल था। उसने अपनी स्कूल को इंटर स्कूल खेलों में चैंपियनशिप दिलाई थी। कॉलेज में वह टीम का कप्तान रहा और वहाँ भी उसने अपने झंडे गाड़ दिए। स्कूल और कॉलेज में लडकियां कमल पर फ़िदा थीं। कॉलेज में खेलते खेलते ही वह रणजी ट्रॉफी में भी खेलने लगा। उसके आकर्षक व्यक्तित्व के कारण वह बहुत लोकप्रिय बना। उसके फोटो खेलकूद के और फैशन के मैगज़ीन में अक्सर आते रहते थे। ये कहा जाता था कीएक नएक दिन वह भारत के लिए जरूर खेलेगा। .
कॉलेज पास होते ही कमल को उसके क्रिकेट में लोकप्रियता के कारण मुंबई मेंएक बड़ी कंपनी में नौकरी मिली। उधर राज ने कॉलेज में मास्टर्स की डिग्री हासिल करने के लिए और पढ़ाई की।
दो तीन सालों के पश्चात कमल की शादी की बात होने लगी। उस टाइमकमल ने ये शर्त रखी की जो भी लड़की वहपस्न्द करेगा उसे राज भी मिलेगा और हाँ कहेगा तभी बात आगे बढ़ेगी। कुमुद नामकीएक लड़की से शादी के बारेमें बात होने लगी तो कमल ने राज को बुलाया। राज को कुमुद से मिलाया। उसी टाइमकुमुद को पता लगा की कमल के जिंदगी में राज की कितनी अहमियत थी। राज की रजामंदी से कमल की शादी कुमुद के संग तय हो गयी। कमल की शादी में राज उसका ख़ास मित्र बना था।
कुमुद कुछ गंभीर और अपनी उम्र से कहीं ज्यादा परिपक्व सी लड़की थी। पढ़ाई में वह बहुत तेज थी और अपनी कॉलेज में बहुत अच्छे नंबर से अव्वल रहती थी। वह देखने में ज्यादा सुन्दर थी, पर मम्मी बाप की तालीम के कारण वह धर्म में आस्था रखने वाली, शर्मीली और संकुचित विचारों की थी। कुमुद का नाक नक्श सुकोमल और बदन पतला था पर उसके चूची उसके बदन के हिसाब से भरे हुए थे। उसकी कमर और गाँड़ उसके ड्रेस में खूब जँचते थे। राज को सबसे अच्छी लगी कुमुद की आँखें जो बिना बताये जैसे ज्यादा कुछ कह रही थी। कुमुद की आँखों मेंएक गंभीरता और सौम्यता थी जो कुमुद के व्यक्तित्व को भलीभाँती प्रदर्शित करते थे।
कमल ने देखा की राज को उसकी भाभीपस्न्द आयी। कमल ने महसूस किया की कुमुद को देखते ही राज का चेहरा खिल उठता था और उस के चेहरे पर अजीब से जज्बातों दिखाई पड़ते थे। शायद राज को कमल की होने वाली पत्नी कुमुद बहुत भा गयी थी। कमल को लगा की राज के मन में कुमुद के लिये जरूर नरम जज्बातों था। कमल ने राज से पूछा, "यार मेरी बीबी कुमुद कैसी लगी?"
राज जवाब देनेमें थोड़ा हिचकिचाया; पर जब राजने देखा की कमल जवाब लिये बिना उसे छोड़ेगा नहीं तब वह दबी आवाज में बोला, "भाभी ज्यादा सुन्दर है यार।"
राज ने कमल की और कुमुद की जोड़ी की खूब तारीफ़ की। खैर, शादी के दरम्यान उनके बिच खूब हंसी मजाक हुआ। कुमुद भी बहुत खुशनुमा लड़की थी।
राज कॉलेज में ग्रेजुएशन के आखरी वर्ष में पढ़ रहा था उसी दरम्यान रानी कॉलेज में पहले वर्ष में पढ़ती थी। जब राज अव्वल दर्जे से पास हुआ तो रानी पहली लड़की थी जिसने उसे बधाई दी। रानी को देखते ही पहली मुलाक़ात में ही राज उस पर फ़िदा हो गया पर उसने अपने मन के जज्बातों जाहिर नहीं किये। रानी पढ़ाई में थोड़ी कमजोर थी और उसने राज से पढ़ाई में मदद मांगी। राज तो रानी से मिलने के मौके ही ढूंढता था। राज ने रानी को शाम को थोड़ी देर कॉलेज में ही बैठ कर पढ़ाना शुरुआत किया।इसे तरह उनकी मुलाकातों का दौर शुरुआत हुआ।
रानी आधुनिक विचारों वाली लड़की और कॉलेज में खेलकूद में अक्सर अव्वल होती थी। कॉलेज की स्त्री क्रिकेट टीम की वह कप्तान थी। जब भी स्त्री टीम का कोई मैच होता था तो पूरा कॉलेज टीम को सपोर्ट करने पहुंचता था। ये बात और है की सारे लड़के स्त्री टीम को सपोर्ट करने कम और रानी को घूरने ज्यादा आते थे। रानी पुरे कॉलेज की शान थी। रानी के पिता और मम्मी अपने जमाने में माने हुए खिलाड़ी और एथलिट थे। रानी भी उन्हीं के नक़्शे कदम पर शारीरिक क्षमता पर बहुत ध्यान देती थी और खेलकूद के मैदान में और जिम में खासी कसरत एवं परिश्रम कर उसने अपने बदन को फिट रखा था।
लम्बी, सुन्दर और भरे हुए बदन की रानी जब लेग्गीन पहन कर कॉलेज आती तो सारे लड़के उसकी गाँड़ को घूरते ही रहते। रानी की कमर, जांघें और गाँड़ एकदम सुआकार और सुडौल थी। वह अक्सर जीन्स और टॉप पहनकर कॉलेज आती थी। रानी की कमर के निचेसे उसकी जांघों पर से घूमती हुई उसकी गाँड़ का फैलाव और उसके फुले हुए गालों के बिच की दरार की हलकी सी झलक देखकर लड़के आह भरने लगते। कोई कोई बार जब वह स्कर्ट पहनकर कॉलेज में आती तो रानी की कमल की डंडी के सामान जांघें देखकर अच्छे अच्छों की हालत खराब हो जाती थी और ख़ास कर लड़कों में शर्त लगती थी ये जानने के लिए की उस दिन रानी ने कौनसे रंग की पेंटी पहनी होगी।
कॉलेज में रानी को स्त्री टीम में क्रिकेट खेलते हुए देख कर कई लड़के रानी पर मरते थे और उसके करीब आने की भरपूर कोशिश करते थे। रानी का बढ़िया खासा फैन क्लब था, पर रानी को राज ज्यादा बढ़िया लगा क्यूंकि वह उसकी हर बात मानता था, रानी के बारेमें हमेशा चिंतित रहता था और उसकी ज्यादा इज्जत करता था। दोनों में मुलाकातें होती गयीं और देखते ही देखते दोस्ती प्रेम में बदल गयी।
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राज कमल को रानी के संग प्रेम के बारे में बताता था। उसने कमल से कहा की कई बार उसने रानी को किस किया और उसके स्तनों का आनंद लिया था। राज रानी के भरे हुए स्तनों के बिच कैसे अपना सर सटा कर कई बार रानी की गोद में लेट जाता था ये बताते राज और कमल दोनों अपने हाथों से हस्तमैथुन कर अपना माल निकालते थे। पर रानी ने राज को उससे आगे बढ़ने की कतई इजाजत नहीं दी। रानी का कहना था की पहले शादी दोबारा सभी कुछ। राज ने कमल से और अपने माता पिता से रानी के बारेमें बात की तो सभी बड़े खुश हुए। दोनों की शादी की बात होने लगी।
राज ने ख़ास कमल कीपस्न्द जानने और रानी से मिलाने के लिए कमल को बुलाया। फिर भी रानी कमल से पहले मिली नहीं थी पर कमल की क्रिकेटर के रूप में शोहरत से वह भली भाँती वाकिफ थी। पहली बार रानी को जब पता चला की कमल राज का मित्र है, तब रानी की ख़ुशी का ठिकाना ना रहा। कमल उसका हीरो था। क्रिकेट खेलनेमें वह कमल को अपना आदर्श मानती थी और उसके बारेमें अखबारों में बड़े चाव से पढ़ती रहती थी। रानी ने तो कमल के कई फोटो अपने रूम में दीवारों पर सजा रखे थे। रानी कमल को मिलते ही उसकी दीवानी हो गयी।
कमल की रानी से जब पहली बार मुलाक़ात हुई तो कमल भी रानी को देखता ही रह गया। रानी की तेज और कटीली आँखों ने कमल के दिल को जैसे अपनी नजर की छुरी से काट सा दिया। रानी के पुरे फुले हुए बड़े स्तनों को वह देखता ही रह गया। रानी के घने लम्बे बाल देखते ही बनते थे। वह उतनी सुन्दर पीछे से थी जितनी आगे से।
जब राज ने कमल से रानी के बारे में पूछा और उस से शादी करने की इजाजत मांगी तब कमल ने उसे फ़ौरन हाँ कह दिया। उन शुरूआती मुलाकातों में ही रानी और कमल की भी अच्छी खासी दोस्ती हो गयी थी।
रानी से मिलने के पश्चात जब राज ने कमल से पूछा की क्या कमल को रानीपस्न्द है? तब कमल के मुंह से अनायास ही निकल गया की, "यार तेरी गर्ल फ्रेंड तो बड़ी मस्त है।"
राज ने कमल को झकझोरते हुए कहा, "कमल भैया, मुझे हमाराएक दूसरे से किया वादा याद है। यदि तुम्हें रानी बहुतपस्न्द है तो तुम जब कहो तो मैं तुम्हारे लिए रानी को छोड़ सकता हूँ। शायद रानी को भी कोई आपत्ति नहीं होगी क्यूंकि वह तो वैसे ही आपके पीछे पागल है।"
कमल ने राज से कहा, "तू पागल है? मैं शादी शुदा हूँ। मेरा कहने का मतलब था की रानी मस्त है और तू उसके संग खूब मजे कर।" कमल राज से रानी की ज्यादा तारीफ़ करने से डरता था क्यों की राज कहीं ऐसा ना सोचे की कमल की नजर रानी पर है।
राज ने देखा की कमल भैया मना तो कर रहे थे पर कमल भैया की नजर उस की होने वाली बीबी रानी पर थीइसे बात में कोई शक नहीं था। फिर भी कमल भैया ने ना तो ऐसा वैसा कुछ कहा और ना ही कुछ किया, पर राज समझ गया की कमल भैया को रानी भा गयी है। राज जानता था की रानी थी ही इतनी सुन्दर और देखने में सेक्सी की यदि मौक़ा मिले तो कमल भैया तो क्या, कोई भी मर्द रानी को चोदना चाहेगा।
वह जानता था की कमल भैया तो वैसे ही रंगीन मिज़ाज के थे, तो भले ही वह कुछ ना बोलें पर उनके मन की मंशा क्या होगी वह राज जानता था। उसी वक्त राज ने मनमें प्रण लिया की यदि कमल भैया के मनमें की कहीं न कहीं रानी को चोदने की थोड़ी सी भी इच्छा है तो वह कमल भैया के मन की ख्वाहिश जरूर पूरी करने की भरपूर कोशिश करेगा।
राज ने रानी को साफ़ साफ़ बता दिया था की कमल भैया उसकी आत्मा थे और वह कमल भैया के लिए कुछ भी कर सकता है।एक बार जब रानी ने राज से हंसी मजाक में पूछा की क्या वह कमल को रानी से भी ज्यादा प्रेम करता है तो राज ने पट से कहा, "तुम मेरी जान हो और कमल भैया मेरी आत्मा है। तुम मेरे जिंदगी में अब आयी हो। कमल भैया तो मुझसे बचपन से जुड़े हैं। भगवान् करे ऐसी घडी ना आये, पर यदि मुझे तुम दोनों में से कोईएक को चुनना पड़े तो मैं कमल भइया को चुनूंगा।"
यह सुनकर रानी दंग रह गयी। आज तक रानी ने किसी आदमी में भी अपने मित्र के लिए इतना समपर्ण का जज्बातों कभी नहीं देखा था। पर रानी खुश भी हुई क्यूंकि वह कमल को तो वह वैसे भी अपना हीरो मानती थी और कमल के खेल और उसके व्यक्तित्व की वह दीवानी थी।
राज की शादी में कमल और कुमुद ख़ास मेहमान रहे। राज की शादी के दरम्यान कुमुद की भी रानी से अच्छी खासी दोस्ती हो गयी थी। शादी के पश्चात अक्सर कमल की पत्नी कुमुद राज की बीबी रानी से फ़ोन पर बात करती रहती थी। फ़ोन पर बात करते करते रानी और कुमुद भी ख़ास मित्र बन चुके थे। फिर भी उसके पश्चात ज्यादा मिलना हुआ नहीं।
राज को अहमदाबाद में अच्छे ओहदे वाली सरकारी नौकरी मिली। शादी के पहलेएक डेढ़ वर्ष तक तो राज की और उसकी बीबी रानी की रति क्रीड़ा धमाके दार हुआ करती थी। राज की बीबी रानी पलंग में आक्रमक थी। पर डेढ़ वर्ष गुजरने के पश्चात दोनो का सेक्स का जोश धीरे-धीरे धीरे कम होने लगा। तो कमल का भी तो वही हाल था। राज और कमल फ़ोन पर चर्चा करते यही सोच रहे थे की शादी के पहले उन्होंने सोचा था की शादी के पश्चात खूब मजे करेंगे पर डेढ़ वर्ष के पश्चात ही पति पत्नी कोएक दूसरे से सेक्स करने में आनंद इतनी जल्दी कम कैसे हो जाता है? ख़ास तौर से महिलाओं को तो ये बात सटीक लागू होती है।
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