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बहू की चूत ससुर का लौडा
दोस्तो मैं यानी आपका मित्र राजशर्मा ससुर बहू की मस्त चुदाई की कहानी लेकर हाजिर हूँ दोस्तो वैसे तो आपको मेरी सारी कहानियाँपस्न्द आती हैं पर ये कहानी कुछ ज़्यादा ही मस्ती भरी है ये मेरा वादा है कि ये कहानी आपको ज़रूरपस्न्द आएगी . तो दोस्तो चलिए कहानी की तरफ चलते हैं .राज अपने कमरे में उदास बैठा है, और कमरे की खाली दीवारों को घूर कर अपने दुखी मन को शांत करने की कोशिश कर रहा है। वह 44 वर्ष काएक तंदूरूस्त हट्टा क़ट्टा गोरा आदमी... Continue reading
बहू की चूत ससुर का लौडा दोस्तो मैं यानी आपका मित्र राजशर्मा ससुर बहू की मस्त चुदाई की कहानी लेकर हाजिर हूँ दोस्तो वैसे तो आपको मेरी सारी कहानियाँपस्न्द आती हैं पर ये कहानी कुछ ज़्यादा ही मस्ती भरी है ये मेरा वादा है कि ये कहानी आपको ज़रूरपस्न्द आएगी . तो दोस्तो चलिए कहानी की तरफ चलते हैं .राज अपने...
राज नहाने चला गया और उसे बग़ीचे की सेक्सी लड़कियाँ याद आ रही थीं और उसका लौड़ा खड़ा हो गया। आऽऽह क्या मस्त दूध थे और क्या उभरी हुई गाँड़ थी। वह अपने लौड़े को दबाए जा रहा था। तभी उसके ध्यान में शशी का बदन और उसके सलवार में चिपके चूतड़ आये और वह मज़े से मुस्कुराया और सोचा कि शायद उसको चोदने में भी बड...
राज ने दोबारा से उसके होंठ चूमे और बोले: मुझे पता है तुम स्त्री हो ही नहीं। असल में तुम तो अभी छोटी सी लड़की हो जिसे कभी प्रेम मिला ही नहीं। और वह प्रेम मैं तुमको दूँगा ज्यादा बहुत प्रेम , ढेर सारा प्यार। समझी? उसने अब उसे अपने बदन से भींच लिया और उसकी गर्दन चूमने लगा। शशी भी अब कमज़ोर पड़ने लगी थी...
राज की उँगलियाँ पूरी भीग गयी थीं। शशी ने सिसकारियाँ भरते हुए अपना सिर उसकी छाती में छिपा लिया। अब वह गहरी सासें ले रही थी। राज ने उसको हिलाया और उसकी आँखों में देखकर बोला: मज़ा आया शशी? कैसा लगा? शशी: आऽऽहहहह बाऊजी ज्यादा बढ़िया लगा। आपकी उँगलियों में तो चमत्कार है। मज़ा आ गया। राज: ऊँगली से इतना मज...
बदन की गरमी थी कि बढ़ती ही जा रही थी। राज उसके होंठों को चूसे जा रहा था । अब उसके हाथ उसकी चूचियाँ भी दबा रहे थे । जल्दी ही वह चूचियाँ चूसने लगा। शशी भी आऽऽह्ह्ह्ह्ह कहकर अपनी मस्ती का इजहार कर रही थी। अब वह नीचे आकर उसके पेट और नाभि को चूमने लगा और दोबारा नीचे जाके उसने उसकी चिकनी बुर को देखा और उस...
The Rajsharma Sex Story of बहू की चूत ससुर का लौडा
बहू की चूत ससुर का लौडा
दोस्तो मैं यानी आपका मित्र राजशर्मा ससुर बहू की मस्त चुदाई की कहानी लेकर हाजिर हूँ दोस्तो वैसे तो आपको मेरी सारी कहानियाँपस्न्द आती हैं पर ये कहानी कुछ ज़्यादा ही मस्ती भरी है ये मेरा वादा है कि ये कहानी आपको ज़रूरपस्न्द आएगी . तो दोस्तो चलिए कहानी की तरफ चलते हैं .राज अपने कमरे में उदास बैठा है, और कमरे की खाली दीवारों को घूर कर अपने दुखी मन को शांत करने की कोशिश कर रहा है। वह 44 वर्ष काएक तंदूरूस्त हट्टा क़ट्टा गोरा आदमी है और उसकीइसे २५ लाख की आबादी वाले शहर में कपड़ों की बड़ी दुकान है।
उसने ये काम बड़े ही छोटे लेवल पर चालू किया था पर आज वहएक ज्यादा ही शानदार शोरूम का मालिक था। पर पिछलेएक महीने से वह शोरूम पर नहीं गया था। शोरूम पर उसका जवान बेटा जय ही बैठ रहा था जो कि २५ वर्ष का हो चला था। उसकीएक २४ वर्ष की बेटी भी है जिसकी शादी को तीन वर्ष हो चुके हैं और वहएक दूसरे शहर में रहती है।
राज के दुःख का कारण ये है किएक महीने पहले उसकी पत्नी का किसी बीमारी से देहांत हो गया। वह अपनी पत्नी से ज्यादा प्रेम करता था और उसे दुःखइसे बात का है कि बिना किसी पूर्वाभास के वह बीमार हुई और क़रीबएक महीने में स्वर्गवासी भी हो गयी। सभी रिश्तेदार आए थे और अब सभी अपने घर पुनः चले गए । आख़िर में जाने वाली उसकी बेटी थी । अब सबके जाने के पश्चात वह दोबारा तन्हा महसूस कर रहा था। बेटे जय ने कहा भी कि काम में मन लगाइए ताकि दुःख कुछ कम हो जाए, पर वह अभी भी सामान्य नहीं हो पाया था।
अपनी सोचो सेबाहर् आते हुए राज ने टीवी ऑन कर लिया , अचानक टेलीविजन का चैनल बदलते हुएएक फ़िल्म लग गयी जिसमेंएक भरे बदन की हीरोईंन बारिश के पानी में भीग रही थी और उसके ज्यादा ही मादक अंग साड़ी से दिख ज़्यादा रहे थे और छुप कम रहे थे। ये देखकर अचानक उसके लंड ने झटका मारा और उसका हाथ अपने लंड पर चला गया और वह उसे दबाने लगा। उसे अभी अभी महसूस हुआ कि आज पूरे दो महीने के पश्चात उसके लंड में हरकत हुई है। वरनाएक महीने की पायल की बीमारी औरएक महीने का दुख – उसका तो लंड- जैसे खड़ा होना ही भूल गया था।
उसे बड़ा बढ़िया लगा और वह लंड को सहलाता ही चला गया। दोबारा उसने उसे अपनी लूँगी और चड्डी सेबाहर् निकाल लिया और अपने बड़े बड़े बॉल्ज़ को सहलाते हुए उसने मूठ्ठ मारनी शुरुआत की। उसका क़रीब ८ इंचि मोटा लौड़ा उसकी मूठ्ठी में आधा भी समा नहीं रहा था। क़रीब १० मिनट उसे हिलाते हुए पायल के संग बिताए हुए मादक लमहों को याद करते हुए वह झड़ने लगा। उसे लगा कि वह पायल के मुँह में झड़ रहा है। और वह पहले की तरह उसका गाढ़ा वीर्य स्वाद लेकर पीते जा रही है।
पर जब उसने आँख खोली तो अपने को तन्हा पा कर उसने आह भरी और पायल को याद करके उसकी आँख भर आइ।
हालाँकि वह पायल को ज्यादा प्रेम करता था पर अनेक संपन्न मर्दों की तरह वह भी कभी कभी इधर वहाँ मुँह मार लिया करता था उसकी कमज़ोरी भरे बदन की कम उम्र की लड़कियाँ थीं। उसने कई लड़कियों से मज़े लिए पर कभी भी किसी से रिश्ता नहीं बनाया। ज़्यादातर लड़कियाँएक रात की ही मेहमान होती थीं। बस सिर्फ़ तीन लड़कियों से ही उसके सम्बंध अपेक्षाकृत लम्बे चले, यही कोई तीन चार महीने। इसके बारे में आगे कहानी में पता चलेगा, कि किन हालातों में उन तीन लड़कियों से उसका रिश्ता बना।
आज उसने अपना वीर्य साफ़ किया और पश्चात में सोफ़े पर आकर दुकान का हिसाब देखने की कोशिश किया। दिन के ११ बज गए थे। जय को दुकान गए १ घंटा हो चुका था। तभी कॉल बेल बजी। उसने दरवाज़ा खोला और सामने कांता खड़ी थी। वह घर की नौक रानी थी और पायल की ज्यादा चहेती थी। उसकी उम्र करींब ३५ वर्ष की थी और वहएक चूसे हुए आम की तरह थी। वह आकर किचन में चली गई। वह घर के सभी काम करती थी और अब पायल के जाने के पश्चात खाना भी बना देती थी।
जय अपने काम में लग गया और तभी कांता वहाँ झाड़ू लगाने लगी। उसके सुखी हुई काया उसके सामने थी और दो महीने का प्यासा राज ये सोचने लगा कि क्या इसे ही चोद लूँ? पर जब साड़ी से उसकी नीचुड़ि हुई चूचियाँ देखा तो उसका लौड़ा शांत हो गया। उसने अपना ध्यान काम में लगाया।
तभी कांता का मोबाइल बज उठा और वह किचन में उसे लेकर बात करने लगी। थोड़ी देर पश्चात वहबाहर् आयी और बोली: साहब, मुझे छुट्टी जाना होगा क्योंकि मेरी बहु को बच्चा होने वाला है। कम से कम तीन महीने लगेंगे।
राज: अरे तो हमारा क्या होगा? तुम किसी को काम पर लगा कर जाओ।
कांता: जी साहब, कल से मेरी भतीजी आएगी , उसका नाम शशी है वही काम करेगी, मेरी अभी उससे बात भी हो गई है।
राज: ओह उसको खाना बनाना आता है ना?
कांता: हाँ आता है वो कई सालएक परिवार में काम की है उसको सभी आता है। आजकल ख़ाली है तो आपके इधर काम कर लेगी।
राज: क्या शादीशुदा है?
कांता: जी हाँ शादी को ७ वर्ष हो गए हैं। मगर बेचारी को कोई बच्चा नहीं है। इसके कारण दुखी रहती है।
राज: ओह ऐसा क्या? अब ये तो भगवान की मर्ज़ी है ना ?
कांता दोबारा अपने काम में व्यस्त हो गई और राज भी अपने काम में लग गया। दोबारा उसने जय को फ़ोन लगाया: बेटा तुम्हारा कल का हिसाब ठीक है , अब तुम बढ़िया काम कर रहे हो। आज मुझे तुमसेएक ज़रूरी बात भी करनी है। रात को मिलते हैं।
रात को जय क़रीब ९ बजे घर पहुँचा और वो दोनों खाना खाए। पश्चात में राज बोला: बेटा, आज मैं तुमकोएक बात कहना चाहता हूँ, मैं पायल के जाने के पश्चात ज्यादा तन्हा हो गया हूँ, मैं सोच रहा था कि मैं दूसरी शादी कर लूँ। तुम्हारा क्या ख़याल हैइसे बारे में?
जय चौक कर बोला: क्या पापा, ये क्या बोल रहे हैं आप? कितना अजीब लगेगा प्लीज़ ऐसा मत करिए।
राज: यदि मैं नहीं कर सकता तो तुम कर लो। बेटा, घर मेंएक स्त्री होनी ही चाहिए। घर स्त्री के बिना अधूरा होता है।
जय: ठीक है पापा, यदि आप ऐसा चाहते हो तो यही सही।
राज: अब ये बताओ कि तुम्हारी कोई गर्ल फ़्रेंड है?
जय: पापा आप जानते ही हो कि मेरी किसी लड़की से दोस्ती नहीं है। मुझे तो दुकान से ही फ़ुर्सत नहीं मिलती।
राज: तो दोबारा मैं तेरे लिए लड़की देखनी शुरुआत करूँ?
जय: ठीक है पापा आप देखिए । काश मॉ होती तो ये काम वो करतीं? है ना?
राज: हाँ बेटा वो तुम्हारी शादी का ज्यादा अरमान रखती थी पर बेचारी के अरमान पूरे ही नहीं हो सके।
थोड़ी देर और बातें करके वह दोनों अपने अपने कमरे में सोने चले गए।
सुबह ५ बजे उठकर राज फ़्रेश होकरएक घंटे की सैर पर गया। वहाँ बग़ीचे में कई लड़कियाँ और औरतें भी ट्रैक सूट में अपने गोल गोल चूतरों को उभारे घूम रही थीं और राज का मन बड़ा बेचेंन हो रहा था। उनकी छातियाँ भी दौड़ने के दौरान उपरि नीचे होकर उसकी ट्रैक सूट के अंदर उसके हथियार को कड़ा किए जा रहीं थीं। इसी हालत में वह पुनः आया और कमरे में बैठ के पसीना सुखाने लगा। तभी काल बेल बजी और उसने दरवाज़ा खोला।
बाहरएक दुबली सी लड़की खड़ी थी। वह समझ गया कि ये शशी ही होगी। उसने पूछा: तुम शशी हो ना?
शशी: जी साहब मैं ही कांता चाची की भतीजी हूँ।
राज: आओ अंदर आओ ।फिर उसने उसे पूरा घर दिखाया और कहा : पहले चाय बना दो। किचन सेबाहर् आते हुए उसने शशी को भरपूर निगाहों से देखा। वह कोई २०/२१ से बड़ी नहीं दिख रही थी। दुबली पतली , छाती भी छोटी और चूतरों में भी कोई ख़ास उभार नहीं। वह उसकी टाइप की तो लड़की है ही नहीं। उसे तो भरी हुई लड़की अच्छी लगती है।
थोड़ी देर पश्चात वह चाय लायी । चाय लेते हुए वह बोला: तुम सच में शादी शूदा हो? ज्यादा छोटी सी दिखती हो ।
शशी: जी साहब मेरी शादी को सात वर्ष हो गए हैं । वैसे मैं ऐसी ही पतली दुबली हूँ शुरुआत से ।
राज: क्या उम्र है तुम्हारी? दिखती तो २०/२२ की हो।
शशी: जी मैं २७ की हूँ। पतली होने के कारण शायद छोटी लगती हूँ। दोबारा वह अपने काम में व्यस्त हो गयी। राज सोचने कहा कि साली थोड़ी सी भरे हुए बदन की होती तो कुछ मज़ा ले भी लेता पर ये तो मरी हुई चुहिया जैसी है। क्या मज़ा आएगा इसके साथ।
थोड़ी देर पश्चात वह उसके कमरे में झाड़ू लगा रही थी तो उसकी क़ुरती उपरि चढ़ गयी थी और उसके चूतड़ सलवार से दिख रहे थे। राज सोचने लगा कि इतनी भी बुरी नहीं है। मज़ा लिया जा सकता है। जय अभी भी सो रहा था, वह अक्सर ८ बजे से पहले नहीं उठता था।
राज ने बात चलायी: कौन कौन घर में है तुम्हारे?
शशी : मेरा पति और मेरी सास।
राज जानबुझ कर पूछा: और बच्चे?
शशी उदास होकर बोली: जी नहीं हैं।
राज: शादी को सात वर्ष हो गए? डॉक्टर को दिखाया कि नहीं?
शशी: जी दिखाया है वो बोले कि मेरे में कोई कमी नहीं है। और मेरा मर्द तो डॉक्टर के पास जाने को राज़ी ही नहीं है। क्या कर सकती हूँ भला मैं!
राज: ओह तो कमी उसी में होगी । सास कुछ बोलती नहीं तुमको?
शशी: दिन भर ताने सुनाती है और बेटे की दूसरी शादी की भी धमकी देती है।
राज: ओह ये तो बड़ी समस्या है। वैसेएक बात बोलूँ , तुमको अपने बदन का ख़याल रखना चाहिए। इतनी दुबली हो यदि गर्भ ठहर भी गया तो बच्चा भी तेरे जैसा दुबला ही होगा ।
शशी: साहब ग़रीब लोग हैं हम लोग। आपके जैसा खाने पीने को थोड़े मिलता है।
राज हँसते हुए बोला: चलो अब हमारे घर में रहोगी तो तुम वही खाओगी जो हम खाएँगे। और जल्दी ही तगड़ी हो जाओगी।
शशी उसको अजीब निगाहों से देख रही थी, शायद ये समझने की कोशिश कर रही थी कि ये बुज़ुर्ग उसमें इतनी दिलचस्पी क्यों दिखा रहा है। वैसे उसे ये कुछ बुरा नहीं लगा। ये सच है कि उसे ज़्यादा अटेन्शन नहीं मिलता था।इसलिये साहब का उसमें दिलचस्पी लेना उसे बढ़िया ही लग रहा था।
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राज नहाने चला गया और उसे बग़ीचे की सेक्सी लड़कियाँ याद आ रही थीं और उसका लौड़ा खड़ा हो गया। आऽऽह क्या मस्त दूध थे और क्या उभरी हुई गाँड़ थी। वह अपने लौड़े को दबाए जा रहा था। तभी उसके ध्यान में शशी का बदन और उसके सलवार में चिपके चूतड़ आये और वह मज़े से मुस्कुराया और सोचा कि शायद उसको चोदने में भी बड़ा मज़ा आएगा।
वह नहा करबाहर् आया और टी शर्ट और लोअर पहन कर तैयार हुआ और किचन में जाकर शशी को बोला: दो ग्लास केसर बादाम डाल कर दूध बनाओ। संग ही २ सेब केले और नाशपाती भी काट के लाओ। शशी ने हाँ में सिर हिलाया और काम में लग गयी।
थोड़ी देर में वहएक ट्रे में दूध का दो गिलास और फल काटकर लायी। और सामने टी टेबल पर रख दिया जो कि सोफ़े के सामने रखा था।
राज नेएक गिलास दूध उठाया और उसके हाथ में दे दिया। शशी ने प्रश्न सूचक नज़रों से देखा और बोली: छोटे सांब उठ गए क्या? उनको देना है?
राज: अरे वो तो ९ बजे उठेगा। ये तुमको पीना है। मैंने कहा था ना कि तुमको तगड़ी बनाना है। तो चलो पीओ अब।
वह हैरान होकर उसको देखी और राज ने दूसरा गिलास उठाया और पीने लगा। और दोबारा से उसे पीने का इशारा किया। वह धीरे-धीरे से पीने लगी। साफ़ लग रहा था कि उसे ज्यादा बढ़िया लग रहा था।
फिर राज ने फल की प्लेट उठायी और पास ही खड़ी शशी को बोला: लो फल भी खाओ।
वह झिझकते हुए बोली: साहब पेट भर गया।
राज ने उसके पेट की तरफ़ इशारा करके कहा: देखो इतना छोटा भी नहीं है तुम्हारा पेट कि इसमे फल की भी स्थान नहीं हो। चलो खाओ। दोबारा उसका हाथ पकड़कर पास में बिठाया और उसके मुँह में सेब काएक टुकड़ा डाल दिया। वो थोड़ी सी परेशान दिख रही थी, पर खाने लगी।
राज: सुबह से कुछ खाया है? उसने नहीं में सिर हिलाया। तब उसनेएक टुकड़ा और उसके मुँह में डाल दिया। अब राज भी खाने लगा और उसे। भी खिलाए जा रहा था। शशी को कभी इतना अटेन्शन नहीं मिला था सो वह भी इन पलों का आनंद लेने लगी। फल ख़त्म होने के पश्चात राज बोला: शाबाश, ज्यादा बढ़िया। दोबारा उसके हाथ को पकड़कर बोला: आधे घंटे के पश्चात मैं पराँठा और ओमलेट खाऊँगा, वो भी मेरे और अपने लिए भी बना लेना। संग ही खाएँगे। ठीक है?
शशी: जी साहब । दोबारा वह खड़ी होने लगी तो राज ने उसका हाथ छोड़ दिया। वह किचन में चली गयी। राज भी पेपर पढ़ने लगा। जय अभी भी सो रहा था।
आधे घंटे के पश्चात वह नाश्ता डाइनिंग टेबल पर लगा दी। उसने राज के लिएएक प्लेट भी लगा दी थी।
राज: तुम्हारी प्लेट कहाँ है? मैंने कहा था ना कि जो मैं खाऊँगा वही तुमको भी खाना है। चलो प्लेट लाओ और बैठो यहाँ।
शशी: साहब मैं खा लूँगी, अभी आप खालो।
राज: पक्का पश्चात में खा लोगी?
शशी: पक्का खा लूँगी।
राज: बढ़िया चलोएक कौर तो मेरे हाथ से खाओ। ये कहकर उसने उसके मुँह मेंएक कौर डाला और वो उसको खाते हुए किचन में चली गयी। उसने बड़े प्रेम से गर्म गरम पराँठे खिलाए और राज ने भी उसकी पाक कला की ज्यादा तारीफ़ की। वो शायद तारीफ़ की भी भूकी थी क्योंकि वह ज्यादा ख़ुश हो गयी थी। दोबारा राज ने दो कप चाय माँगी। जब वह चाय लायी तो उसने उसे ज़िद करके अपने बग़ल में बैठाया और चाय पीने को बोला। वह चुपचाप चाय पीने लगी।
राज: तुम्हारा पति तुम्हें प्रेम तो करता है ना?
शशी की आँख गीली ही गयी और बोली: जैसे आज आपने इतने प्रेम से खिलाया ऐसे भी आजतक उसने मुझे सात वर्ष में कभी नहीं पूछा। वो स्त्री को बसएक काम के लिए ही समझता है।
राज ने भोलेपन से पूछा: किस काम के लिए?
शशी ने नज़रें झुका लीं और बोली: वही जो मर्द को चाहिए पलंग में स्त्री से।
राज: ओह अब समझा। सच में तुम्हारा मर्द ऐसा है? ये तो बड़ी अजीब बात है।
शशी: साहब हम ग़रीब औरतों का यही हाल है?
राज ने उसकी पतली कलाई पकड़ी और उसको सहलाने लगा और बोला: देखो तुम कितनी दुबली हो? मैं तो तुमको तगड़ी करके ही मानूँगा।
शशी हँसकर बोली: क्या आप मुझे तगड़ी बना कर पहलवानी करवाओगे?इसे पर दोनों हँसने लगे।
फिर शशी अपने काम में लग गई, थोड़ी देर पश्चात जय भी उठकर आया और राज ने उसके लिए भी चाय मँगवाई। शशी चाय लाई और जय को नमस्कार की। राज ने बताया कि ये नई नौकशशी है। जय ने ओह कहकर चाय पी। दोबारा दोनों बाप बेटा दुकान की बात करने लगे। पश्चात में जय नहाने चला गया। राज ने शशी को उसके लिए नाश्ता और लंच के लिए डिब्बा भी बनाने को कहा।
जय तैयार होकर नाश्ता करके लंच का डिब्बा लेकर १० बजे दुकान चला गया। अब घर में दोबारा से दोनों अकेले हो गए। थोड़ी देर पश्चात राज ने शशी को आवाज़ दी और बोला: मैं ज़रा बाज़ार जा रहा हूँ, तुम्हें कुछ चाहिए? दोबारा अचानक उसकी निगाहें उसकी बड़ी बड़ी आँख पर पड़ीं और उनमेंएक सफ़ेदी सी देखकर वह उसका हाथ पकड़ा और उसकी उँगलियों के नाख़ून को चेक किया और बोला: अरे तुमको तो आयरन की कमी है , ऐसी ही कमीएक बार मेरी पत्नी को भी हो गयी थी, तभी तुम इतनी कमज़ोर हो। मैं आज दवाई लाउँगा। ये कहकर उसने उसका हाथ छोड़ा औरबाहर् निकल गया।
वो पास के बाज़ार मेंएक दुकान में गया और वहाँ अपने मित्र से मिला जिसने उसका बड़े तपाक से स्वागत किया। इधर उधर की बातों के पश्चात चाय पीकर राज बोला: यार, मैंने जय की शादी करने का फ़ैसला किया है, तेरी निगाह में कोई लड़की है उसके लायक तो बताना।
दोस्त: हाँ यार क्यों नहीं , थोड़ा सोच लेने दे जैसे ही ध्यान में आएगा बताऊँगा।
राज: ठीक है भाई दोबारा चलता हूँ।
वहाँ से निकल कर वह दवाई की दुकान से मल्टीविटामिन और आयरन टॉनिक ख़रीदा और कुछ ज़रूरी चीज़ें लेकर घर आया।
शशी को उसने पानी और चम्मच लाने को कहा। दोबारा उसने दो दो चम्मच दोनों दवाइयाँ उसको अपने हाथ से पिलायीं। शशी की आँखों में आँसू छलक आए। आज तक किसी ने भी उसकी इतनी फ़िक्र नहीं की थी। राज ने उसके आँसू पोंछें और झुक कर उसका माथा चूम लिया और बोला: अरे रो क्यों रही हो, अब तो जल्दी ही तुम तगड़ी हो जाओगी और दोबारा कुश्ती लड़ना। वह भावुक होकर बोली: आप ज्यादा अच्छे हैं साहब, मैं आपको बाऊजी बोल सकती हूँ क्या?
राज ने उसे खींचकर अपने से लिपटा लिया और बोला: क्यों नहीं अवश्य बोलो। और उसके गालों पर चिमटी काट दी। वह हँसते हुए भाग गयी। अब जब भी मौक़ा मिलता राज उसके हाथ पकड़ लेता और कभी गाल भी सहला देता।
इस बीच राज ने अपने रिश्तेदारों को भी फ़ोन किया और जय के लिए लड़की ढूँढने को कहा।
इसी तरह पाँच दिन निकल गए और अब भी राज शशी को अपने हाथ से ही फल खिलाता और दवाई भी पिलाता। शशी की झिझक अब काफ़ी कम हो गयी थी। कई बार वह उसे अपने से चिपका लेता और प्रेम से उसके गाल भी सहला देता। क़रीब पाँच दिनों में ही दोनों नेएक तरह का बोंड सा हो गया था। राज का अकेलापन दूर हो गया था और शशी भी अटेन्शन की भूकी थी जो उसे भरपूर मिल रहा था। वो सुबह आती दोबारा २ बजे अपने घर चली जाती और दोबारा ५ बजे से ८ बजे तक रात का खाना बना कर चली जाती। राज उसके तीनों टाइम के खाने का ध्यान रखता और उसे खिलाकर ही छोड़ता था।इसे तरह के अच्छे खाने और ख़ुश रहने के कारण उसके चेहरे मेंएक चमक सी आने लगी थी और बदन भी थोड़ा सा गदराने सा लगा था।
क़रीबएक हफ़्ते के बादएक दिन सुबह जब उसने शशी के लिए दरवाज़ा खोला तो उसकी आँख के नीचे गाल में सूजन थी। वह चौंक कर बोला: शशी क्या हुआ ? ये चोट कैसी?
शशी अंदर आयी और ज़मीन पर बैठ गयी और फफक कर रोने लगी। राज थोड़ा सा परेशान हो कर उसको उठाया और सोफ़े पर बिठा कर उसके बग़ल में बैठ गया और उसको अपने से सटा कर उसकी पीठ पर हाथ फेरा और बोला: अरे क्या हुआ? बताएगी भी? क्या मर्द ने मारा?
शशी उसके कंधे पर सिर रखकर रोते हुए बोली: हाँ ज्यादा मारा। ये देखिए, कहते हुए उसने अपना गला भी दिखाया जहाँ लाल निशान थे । दोबारा उसने अपनी सलवार भी पैरों से उठाकर अपनी टांगो को दिखाया जहाँ लाल निशान थे । उसकी बाँह भी लाल हुई जा रही थी। राज उठकर दवाई लाया और उसकी सभी स्थान दवाई लगाया। वह दोबारा से रोने लगी और बोली: मैं मर जाऊँगी। मुझे नहीं जीना।
अब राज ने उसे खींचकर अपनी गोद में बिठा लिया और उसके गाल को चूमते हुए बोला: ऐसा नहीं बोलते। मैं हूँ ना अभी । बढ़िया अब बताओ क्या हुआ था?
शशी: कल रात को वह देर से आया और उसने शराब पी हुई थी। वह पलंग पर आया और मेरी मैक्सी उठाने लगा। मैंने मना किया कि तुम ज्यादा बास मार रहे हो। वह ग़ुस्सा हो गया और चिल्लाया कि साली बच्चा भी नहीं पैदा कर सकती और मुझे करने भी नहीं देती, मादरचोद , आज तेरी लेकर ही रहूँगा। मैं ज्यादा चिल्लायी और रोई पर उसनेएक नहीं मानी और मेरी मैक्सी उठाने लगा। मेरे विरोध करने पर उसने मुझे ज्यादा मारा और आख़िर में उसने अपनी मन की कर ही ली।
राज उसकी बाँह सहलाते हुए बोला: ओह तो वो तुमको ज़बरदस्ती चोद लिया? ये तो बलात्कार हुआ।
शशीएक मिनट के लिए राज की भाषा पर चौकी पर उसके घर में तोइसे तरह की भाषा का उपयोग होते ही रहता था , सो उसने ध्यान नहीं दिया। शशी बोली: क्या करें बाऊजी हम औरतों का तो यही हाल होता है? साला ख़ुद नामर्द है और मुझे बाँझ कहता है। कमीना कहीं का। ये कहते हुए उसने राज की छाती पर अपना सिर रख दिया। वो अभी भी उसकी गोद में बैठी थी।
अब राज ने उसे प्रेम से देखते हुए उसकी बाँह को सहलाते हुए उसके गाल चूमने शुरुआत किए। दोबारा वह उसके सभी लाल निशान को चूमने लगा। उसकी बाँह गाल और गर्दन भी चूमा। दोबारा उसने अपने से जकड़ कर कहा:इसे समस्या काएक ही हल है शशी।
शशी ने उसकी छाती से अपना सिर उठाया और बोली: क्या हल है बाऊजी?
राज उसकी आँखों में देखते हुए बोला: तुम्हें मम्मी बनना पड़ेगा। तभी उस कमीने का मुँह बंद होगा।
शशी: पर ये कैसे होगा?
राज झुका और उसके होंठ चूमकर बोला: मैं हूँ ना,इसे काम के लिए।
शशी चौक कर बोली: आप ये क्या कह रहे हैं? मैं ऐसी स्त्री नहीं हूँ।
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राज ने दोबारा से उसके होंठ चूमे और बोले: मुझे पता है तुम स्त्री हो ही नहीं। असल में तुम तो अभी छोटी सी लड़की हो जिसे कभी प्रेम मिला ही नहीं। और वह प्रेम मैं तुमको दूँगा ज्यादा बहुत प्रेम , ढेर सारा प्यार। समझी? उसने अब उसे अपने बदन से भींच लिया और उसकी गर्दन चूमने लगा।
शशी भी अब कमज़ोर पड़ने लगी थी। उसे भी बढ़िया लगने लगा। वह भी समर्पण के मूड में आने लगी।
राज:एक बात बताओ कि तुम्हारा पति तुम्हें कितने दिन में चोदता है? और कितनी देर चोदता है?
शशी इतने खुले शब्दों से हकला सी गयी: वो वो तीन चार दिन मेंएक बार। क़रीब ५/६ मिनट ही चो– मतलब करते हैं।
राज: ओह इतनी जल्दी झड़ जाता है? तो तुम तो प्यासी रह जाती होगी?
शशी ने सिर हाँ में हिलाया और शर्माकर उसकी छाती में छिपा लिया। राज ने उसके कान को चूमते हुए कहा: जानती हो मैं कितनी देर चोदता हूँ? कम से कमएक घंटा और आधा घंटा तो मैं धक्के ही मारता रहता हूँ।
शशी की आँख फैल गयी वो बोली:एक घंटा? ओह इतना ज़्यादा ?
राज: अरेएक बार चुदवा के तो देखो मज़े से मस्त हो जाओगी। और मेरा दावा है कि भगवान ने चाहा तोएक महीने में तुमको गर्भवती कर दूँगा। ठीक है मेरी शशी? ये कहकर वो अब उसके होंठ को चूसने लगा।
हल्दी वाला दूध पिलाएँ
फिर होंठ छोड़कर बोला: चलो अब तुमको हल्दी वाला दूध पिलाएँ। इससे तुम्हारा दर्द भी कम होगा और चोट में भी आराम मिलेगा।
वह उसकी गोद से उठी और राज ने खड़े होकर उसको अपनी गोद में उठा लिया और किचन के प्लेटफ़ार्म पर बिठा दिया और उसके लिए दूध तैयार किया और अपने हाथ से पिलाने लगा। शशी को लगा कि वो ज्यादा भाग्यशाली है जो बाऊजी उसका इतना ध्यान रखते हैं। दोबारा राज ने उसको गोद में लेकर उतारा और पूछा: अब कैसे लग रहा है?
शशी हँसकर बोली: मुझे क्या हुआ है? ऐसी पिटाई तो मेरे लिए आम बात है । चलिए आप बैठिए मैं आपको बढ़िया चाय पिलाती हूँ। राज उसके गाल चूमकरबाहर् आ गया।
थोड़ी देर में वो चाय लायी तो राज ने उसे दोबारा से अपने पास खींच लिया और बोला: तो दोबारा मम्मी बनना हैं नाएक महीने में? अब उसके हाथ उसकी कमर पर था। जिसे सहलाते हुए वह पहली बार उसके चूतड़ पर ले गया और उसको भी हल्के से दबा दिया। शशी भी मस्ती से भरने लगी।
वह बोली: आऽऽह सच में में मॉ बनना चाहती हूँ। आप मुझेएक महीने में मुझे गर्भबती बना देंगे?
वह उसे अपने गोद में बैठाकर बोला: हाँ मेरी शशी पक्काएक महीने में ही तुम गर्भबती हो जाओगी। असल में मैं तुम्हारी जैसी तीन लड़कियों को पहले ही मम्मी बना चुका हूँ और वो भीएक महीने की चुदाई से ही। भगवान ने मुझे शायद तुम्हारी जैसी लड़कियों को मम्मी बनाने के लिए ही पैदा किया है। चलो अब जय के दुकान जाने के पश्चात हम तुमको मम्मी बनाने की कोशिश में लग जाएँगे। ठीक है ना?
यह कहते हुए उसने शशी के होंठ चूमे और पहली बार उसकी छाती पर हाथ रखा और हल्के से दबाया। आऽऽऽऽहहहह क्या ठस छाती थी एकदम कड़क। शशी भी उसके मर्दाने स्पर्श से मज़े से भर गयी। दोबारा उसकी गोद से उठते हुए बोली: बाऊजी, ज्यादा काम है छोड़िए ना।
राज उसे छोड़ते हुए बोला: तो दोबारा पक्का है ना मम्मी बनने का प्रोग्राम ?
शशी हँसते हुए धत्त कहकर भाग गयी। उसकी हँसी में हामी भरी हुई थी।
क़रीब १० बजे जय नाश्ता करके अपना टिफ़िन लेकर घर से चला गया। उसके जाने के पश्चात राज ने सोचा कि वो अपनी ओर से पहल नहीं करेगा, देखते हैं कि शशी को भी कितनी इच्छा है चुदवाने की। वह चुपचाप दुकान का हिसाब देखता रहा। आधा घंटा गुज़र गया और उसनेएक बार भी शशी को नहीं पुकारा।
तभी शशी अपना पसीना अपनी चुन्नी से पोंछते हुए आयी और बोली: बाऊजी, चाय बनाऊँ?
राज ने कहा: नहीं रहने दो। दोबारा काम में लग गया। शशी थोड़ी देर उसको काम करते हुए देखी और बोली: आज ज्यादा ज़्यादा ही काम हो रहा है? क्या बात है?
राज समझ गया कि वह बात आगे बढ़ाना चाहती है , पर वह बनते हुए बोला: हाँ थोड़ा है तो?
शशी अपना मुँह उतार के बोली: ठीक है तो मैं किचन में जा रही हूँ, कुछ काम हो तो बुला लीजिएगा।
राज:एक काम के लिए तो बोला था पर शायद तुम उसके लिए राज़ी नहीं हो।
शशी: कौन सा काम?
राज: वही तुमको मम्मी बनाने वाला काम? तुमने तो हाँ कही ही नहीं?
शशी शर्माकर: ओह वो काम? मैंने नहीं भी तो नहीं कहा।
राज: देखो शशी मैं तुम्हारे संग ज़बरदस्ती नहीं करना चाहता हूँ, तुम्हारे पति की तरह। यदि सच में ये तुम चाहती हो तो चलो आओ और अभी मेरी गोद में बैठ जाओ वरना किचन में चली जाओ। ये कहते हुए उसने अपना काम बंद किया और अपनी टाँगें फैला दी जैसे कह रहा हो आओ शशी इधर बैठो।
शशीएक मिनट के लिए झिझकी और दूसरे ही समय जैसे कुछ फैसला ले लिया हो वह आकर उसकी गोद में बैठ गयी, और अपना मुँह उसकी छाती में छिपा ली। उसके बदन से तेज़ पसीने की महक आ रही थी जिससे वह मस्त होने लगा।
राज अपनी गोद में बैठी उस लड़की को जकड़ लिया और उसके गाल और होंठ चूम लिया। दोबारा उसने उसकी गर्दन में भी चूमना शुरुआत किया।
ये कहानी ससुर और बहु पर लिखी गयी है
शशी बोली: मुझे ज्यादा पसीना आया है , मैं मुँह धो लूँ क्या?
राज उसके पसीने को चाटते हुए बोला: आह्ह्ह्ह्ह्ह क्या स्वाद है तुम्हारा पसीना, चाटने में ज्यादा मज़ा आ रहा है।
शशी: छी इसमे क्या मज़ा आ रहा है?
राज ने उसकी चुन्नी हटा दी और कुर्ते के उपरि से उसकी कसी हुई चूचियों को पकड़कर दबाते हुए कहा: आऽऽहहह तुम्हारी तो चूचियाँ किसी कमसिंन लौंडिया के जैसी हैं। मस्त सख़्त हैं। क्या गोल गोल हैं शशी। ज़रा इनको दिखाओ ना प्लीज़।
शशी को अपनी गाँड़ के नीचे उसका लौड़ा खड़ा होकर चुभता सा महसूस होने लगा था सो वह भी मस्ती से बोली: आऽऽऽंहहह उतार लीजिए ना क़ुरती हाऽऽऽऽऽय किसने मना किया है। राज के द्वारा किए जा रहे चूचि मर्दन से वह आऽऽऽहहह करे जा रही थी।
राज उसका कुर्ता उतारने लगा और शशी ने अपने हाथ उपरि कर दिए। कुर्ता निकालने के पश्चात उसकी ठोस चूचियाँएक सस्ती सी पुशशी ब्रा में मस्त लग रही थीं। वह उसकी चूचियों को ब्रा के उपरि से ही चूमने लगा।
शशी को अब उसका लौड़ा बुरी तरह से गड़ रहा था और उसने अपनी गाँड़ हिलायी ताकि उसकी चुभन कम हो जाए। अब राज ने ब्रा का हुक भी खोला और शशी ने हाथ उठाकर उसकी ब्रा निकालने में मदद की। राज की आँखों के सामने बड़े सेब की आकार की दो चूचियाँ आ गयीं जिनके काले लम्बे निपल बिलकुल तने हुए थे जो शशी की उत्तेजना को दिखा रहे थे। राज कुछ देर तक उनको एकटक देखा और दोबारा उनपर अपने दोनों पंजे रखा और उनकी सख़्ती और कोमलता को महसूस करने लगा। उसने आज तक इतनी ठोस चूचियाँ नहीं दबायीं थीं। वह उनको ज्यादा देर तक दबाते रहा। दोबारा उसने उसकी बाहों को उठाया और बालों से भरे बग़ल को देखकर कहा: इधर भी जंगल उगा रखा है। दोबारा अपनी नाक लगाके बालों से भरी बग़ल को सूँघा और दोबारा जीभ निकालके वहाँ चाटने लगा। दोबारा वह चूचिया दबाने लगा।
तब शशी बोली: आऽऽऽऽऽह बाऊजी , क्या उखाड़ ही डालोगे इनको?
राज : अरे नहीं, पर क्या करूँ, जी ही नहीं भर रहा है दबाने से । क्या मस्त चूचियाँ है। दोबारा वह झुककरएक चूचि मुँह में ले लिया और चूसने लगा। उसके बड़े मुँह में उसकी आधी से भी ज़्यादा चूचि चली गयी थी और उसकी जीभ निपल को सहलाए जा रही थी और शशी आऽऽऽऽझ्ह्ह्ह्ह्ह बाउजीइइइइइइइइइइ करके सिसकी भर रही थी। अब राज ने उसकी सलवार का नाड़ा खोला। उसने शशी को उठने का इशारा किया तो शशी खड़ी हुई और उसकी सलवार नीचे गिर गयी। अब उसकी पुशशी सी पैंटी में छुपी बुर का हिस्सा दिख रहा था और सभी तरफ़ से घने बाल भी दिख रहे थे । उसने शशी की पैंटी भीएक झटके में उतार दी और उसके सामने काले बालों काएक झुंड था जिसमें से उसकी बुर ज्यादा थोड़ी सी ही दिख रही थी।
राज उसकी जाँघों को सहलाते हुए बोला: ये क्या इतने बाल उगा रखे हैं, कभी सफ़ाई नहीं करती क्या?
शशी: मैं जब कभी टाइममिलता है कैंची से काट लेती हूँ। वैसे भी मेरे पति को तो कोई फ़र्क़ ही नहीं पड़ता, वह तो इसीमे कुछ धक्के मारता है और पाँच मिनट में झड़ जाता है।
राज ने उसे खींच कर अपनी गोद ने बिठा लिया और उसके होंठ चूमते हुए उसकी चूचि और निपल्ज़ दबाकर उसको गर्म कर दिया। दोबारा उसने उसकी बुर को उपरि से सहलाया और बालों को अलग करके उसने दो ऊँगली अंदर डाली और उसको बिलकुल गीला पाकर वह उँगलियाँ अंदरबाहर् करने लगा। उसने सोचा कि आऽऽऽह क्या टाइट बुर है जैसे किसी कुँवारी कन्या की बुर हो। पता नहीं उसका पति उसे चोद भी पाता है या नहीं! वह और ज़ोर से उँगलियाँ हिलाने लगा।
शशी भी जल्दी ही अपने कमर को उछालकर उसकी उँगलियों की चुदाई का मज़ा लेने लगी। दोबारा उसने उसकी clit को रगड़ते हुए उसकी बुर में ऊँगली डालनी जारी रखी । अब शशी आऽऽऽऽऽह्ह्ह्ह्ह बाउuuuuuuजीइइइइइइ कहकर ज़ोर ज़ोर से कमर उछालकर झड़ने लगी। हाऽऽऽऽऽऽऽयय्यय मजाऽऽऽऽऽ आऽऽऽऽऽऽ रहाऽऽऽऽऽ है बाअअअअअउउउउउउउजीइइइइ।
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