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बदलाव
मेरा नाम अमित है, मैं दिल्ली(रोहिणी) का रहने वालाएक इंजीनीयर हूँ. मैं 23 वर्ष का लड़का हूँ .इसे घटना से पहले मैंने किसी लड़की के संग सेक्स नहीं किया था. मुझे नहीं मालूम था कि मुझे मेरा पहले सेक्स के लिएबाहर् नहीं जाना पड़ेगा. मैं ज्यादा शर्मीला था मगर मेरे चरित्र में बदलाव किस तरह हुआ वो मैं बताने जा रहा हूँ.
हमारा खानदान ज्यादा बड़ा है, मेरे पापा की 5 बहनें हैं जिनमें से तीन दिल्ली में ही रहती हैं. कहानी तब की हैं जब मैं बी टेक के तीसर... Continue reading
बदलाव मेरा नाम अमित है, मैं दिल्ली(रोहिणी) का रहने वालाएक इंजीनीयर हूँ. मैं 23 वर्ष का लड़का हूँ .इसे घटना से पहले मैंने किसी लड़की के संग सेक्स नहीं किया था. मुझे नहीं मालूम था कि मुझे मेरा पहले सेक्स के लिएबाहर् नहीं जाना पड़ेगा. मैं ज्यादा शर्मीला था मगर मेरे चरित्र में बदलाव किस तरह हुआ वो मैं ब...
चित्रा के संग सेक्स करते हुए पकड़े जाने के पश्चात दीदी की आग शांत करने की जिमेदारी मेरे मजबूत लौड़े पर आ गई. मगर शादी की वजह से भैया-भाभी ने ऑफिस से छुट्टी ले ली तो कोई मौका नहीं मिल रहा था. मगर कहते है न जहाँ चाह वहाँ राह. शादी से दो दिन पहले सभी मंदिर गए थे. मगर दीदी के सर में दर्द थाइसलिये दीदी घ...
सुबह नीचे आने के पश्चात मुझे ज्यादा ग्लानि महसूस हो रही थी कि मैंने अपनी बहन के संग सेक्स किया मगर मुझे रह-रह कर उसकी उसकी मस्त चूचियों की चुसाई और उसकी चूत की खुशबू भी याद आती. मैं दोबारा अपने कमरे में वापिस चला गया. तभी दीदी मेरे कमरे में आई तो मैं वहाँ से उठ कर जाने लगा. तभी उन्होंने मेरा हाथ पकड...
दीदी स्वाति और चित्रा के संग सेक्स का आनंद लेने और दीदी के संग सेक्स करने की आजादी मिलने के पश्चात मैंने बहुत दिनों तक उनके संग सेक्स किया. मगर कहते हैं ना जिस तरह बुरे दिन ज्यादा दिन तक नहीं रुकते उसी तरह अच्छे दिन भी ज्यादा दिनों तक नहीं रुकते. दीदी की शादी तय हो गई और वो घर छोड़ कर अपने ससुराल चल...
मैं पलंग पर लेट गया और भाभी की चूत चूसने लगा. मैंने धीरे-धीरे से उनकी चूत पर काट लिया, भाभी जोर से चिल्ला उठी. थोड़ी ही देर में हमने दोनों ही पानी छोड़ दिया. फिर मैंने प्रिया को उठाया और… बिस्तर पर सीधा लिटा दिया और उनके उपरि आ गया. प्रिया की चूत को देख कर ही मैं समझ गया कि भाभी को चुदवाने का बहुत त...
The Rajsharma Sex Story of बदलाव (Incest Special)
बदलाव
मेरा नाम अमित है, मैं दिल्ली(रोहिणी) का रहने वालाएक इंजीनीयर हूँ. मैं 23 वर्ष का लड़का हूँ .इसे घटना से पहले मैंने किसी लड़की के संग सेक्स नहीं किया था. मुझे नहीं मालूम था कि मुझे मेरा पहले सेक्स के लिएबाहर् नहीं जाना पड़ेगा. मैं ज्यादा शर्मीला था मगर मेरे चरित्र में बदलाव किस तरह हुआ वो मैं बताने जा रहा हूँ.
हमारा खानदान ज्यादा बड़ा है, मेरे पापा की 5 बहनें हैं जिनमें से तीन दिल्ली में ही रहती हैं. कहानी तब की हैं जब मैं बी टेक के तीसरे वर्ष में था. मेरी बड़ी बुआ के लड़के की शादी थी, मेरी सबसे छोटी बुआ की लड़की चित्रा भी आई थी, उम्र 18 साल, गोरा बदन, सेक्सी, लंबाई 5 फीट 6 इंच और उसके मम्में करीब 34 और गांड 36 की होगी. चित्रा 20 से कम की नहीं लगती थी.
शादी के घर में भीड़ की वजह से बुआ और चित्रा हमारे घर पर रुकी. शादी को अभी चार दिन बाकी थे मगर शादी के घर में कितने काम होते हैं ये तो हम सभी जानते हैं.
इसलिए मम्मी बुआ के घर मदद के लिए सुबह ही चली जाती थी और मेरी बहन स्वाति भी नौकरी पर चली जाती थी. मेरी बहन स्वयं खूबसूरत जिस्म की मालकिन है वो 24 वर्ष की है कोई भी उसे देख ले तो चोदे बिना ना छोड़े! उसका पूरा बदन कसा हुआ है.
मेरा भाई-भाभी भी नौकरी पर चले जाते थे और घर में मैं और चित्रा बचते थे मगर दोबारा भी मेरी चित्रा से बात करने की हिम्मत नहीं होती थी क्योंकि तब मैं थोड़ा शर्मीला था.
एक दिन की बात हैं मैं और चित्रा घर पर अकेले थे तभीएक सेल्सगर्ल ने दरवाजा खटकाया.
मैंने दरवाजा खोला तो मैंने देखा कि वो ब्रा बेचने के लिए आई थी.
उसने कहा- घर में कोई लेडी है?
मैंने मना किया, तभी चित्रा आई और बोली- रुको मुझे खरीदनी है!
मगर उसकोपस्न्द नहीं आई और उसने मुझे शाम को उसके संग मार्केट चलने को कहा तो मैंने हाँ कर दी.
बाज़ार में सबसे पहले हमने कुछ खाया दोबारा उसने कहा कि उसे ब्रा-पेंटी खरीदनी है.
फिर हमने शॉपिंग की और भी बहुत सामान खरीदा. घर आते-आते शाम के छः बज गए. जब हम घर पहुँचे तो भाई घर पर पहले से था. भाई थोड़ा थका हुआ था तो जाकर सो गया. चित्रा भी अपने कमरे में चली गई और मैं टीवी देखने लग गया.
थोड़ी देर में किसी ने मुझे पीछे से आवाज लगाई, मैंने मुड़ कर देखा तो वो चित्रा थी, वो बोली- मैं कैसी लग रही हूँ?
चित्रा सिर्फ ब्रा-पेंटी पहने थे और वो किसी परी से कम नहीं लग रही थी. उसे देखते ही मेरा लंड खड़ा हो गया मगर वो मेरी बुआ की लड़की थीइसलिये मैंने अपने आप को रोक लिया और उससे कपड़े पहन कर आने के लिए कहा.
रात को मेरे ख़यालों में सिर्फ चित्रा और उसके चूचे घूम रहे थे और हाथ अपने आप पैंट के अंदर जा रहा था.
मैं उठा और चित्रा के कमरे की ओर बढ़ा. मैंने देखा कि चित्रा वहाँ नहीं थी और उसकी ब्रा वहाँ पड़ी थी. मैंने उसे उठाया और अपने कमरे में ले जाकर ब्रा लंड पर रख कर चित्रा के नाम की मुठ मारने लगा.
मैं मुठ मार रहा था, इतने में पीछे से आवाज़ आई. मैं मुड़ा तो देखा तो चित्रा थी.
मुझे अपनी हरकत पर शर्म आ रही थी और मैंएक बुत की तरह वहीं खड़ा रहा. चित्रा अंदर आई और चादर लेकर बिना कुछ कहे चली गई.
अगले दिन मैं चित्रा से नजर नहीं मिला पा रहा था, मैंने माफी मांगने की सोची.
जब सभी चले गए तो मैं चित्रा के कमरे में गया. चित्रा ने काले रंग का सूट पहना था. मैं कुछ कहता इससे पहले चित्रा ने कहा- मैं तुमसे प्रेम करती हूँ!
और ये कह कर उसने मुझे गले लगा लिया.
मैं भी सभी कुछ भूल गया और चित्रा को चूमने लगा. आज मेरा भी सपना सच हो गया मैं कब से उसे ख्यालों में चोद रहा था, कब से उसके नाम की मुठ मार रहा था, आज वो चूत मेरी होने वाली थी. थोड़ी ही देर में उसकी साँसें तेज़ चलने लगी.
मैंने अपनेएक हाथ से उसके चूचे मसलने चालू कर दिए और दूसरे हाथ से सलवार के उपरि से उसके चूतड़ दबाने लगा. दोबारा मैंने उसकी सलवार का नाड़ा खोल दिया और पेंटी के अंदर हाथ डालकर उसकी चूत सहलाने लगा.
वो सिसकारियाँ लेने लगी और संग में हल्का सा विरोध भी कर रही थी.
फिर उसने मेरे होंठों पर अपने होंठ रख दिये और पंद्रह मिनट तक हमएक दूसरे के होंठ चूसते रहे. दोबारा उसके पश्चात मैंने उसका कुर्ता उतार दिया और दोबारा ब्रा भी उतार दी.
उसके चुचे ऐसे लग रहे थे जैसे दो रसदार संतरे!!
मैंने उसकेएक चूचे को मुँह में ले लिया और दूसरे को हाथ से मसलना शुरुआत कर दिया. उसकी सिसकारियाँ बढ़ती ही जा रही थी. दोबारा उसने मेरी पैंट खोलकर मेरा लंड पकड़ लिया और मेरे लंड को दबाने लगी.
मुझे लगा जैसे मैं जन्नत में पहुँच गया. इतने में मैंने उसकी पेंटी नीचे सरका दी. उसने मेरी टी-शर्ट भी उतार दी. अब हम दोनों बिल्कुल नंगेएक दूसरे के सामने खड़े थे. उसकी चूत पर हल्के-हल्के बाल थे.
फिर मैंने चित्रा को अपनी बाहों में समेटा और उसे पलंग पर लिटा दिया और जीभ से उसकी चूत चाटने लगा वो तो जैसे पागल हो उठी.
वो बोली- भैया, मुझे भी आपका लंड चूसना है!
उसके पश्चात हम दोनों 69 की अवस्था में आ गए. हम दोनों पंद्रह मिनट तक एक-दूसरे को ऐसे ही चूसते रहे और हम दोनोंएक एक करके झड़ गए. दोबारा हमएक दूसरे के उपरि लेट गए. थोड़ी देर में हम दोबारा गर्म हो गए और मैं दोबारा उसके चूचे चूसने लगा तो वो बोली- भैया, रहा नहीं जाता अपना लंड अंदर डाल दो!
उसकी चूत कुंवारी थी और मैं उसको दर्द नहीं पहुंचाना चाहता थाइसलिये मैंने थोड़ी वेसलिन लेकर उसकी चूत की मालिश कर दी.
मेरा लंड 7 इंच लंबा और 3 इंच मोटा है.
उसके पश्चात मैंने अपना लंड चित्रा की चूत पर लगाया और हल्के-हल्के लंड को अंदर करने लगा पर अंदर जा ही नहीं जा रहा था क्योंकि उसकी चूत कुँवारी थी. मैंने हल्का सा धक्का लगाया तो वो तड़प गई और उसके मुँह से आह की आवाज़ निकल गई. मेरे लंड का सुपारा अंदर जा चुका था. दोबारा मैंने हल्के-हल्के अंदर डालना चालू किया और बीच-बीच में हल्का धक्का भी मार देता जिससे उसकी चीख निकल जाती. उसकी चूत ज्यादा कसी हुई थी. अब तक मेरा पूरा लंड उसकी चूत में जा चुका था दोबारा मैं हल्के हल्के अपने लंड को अंदरबाहर् करने लगा.
शुरू में तो उसे थोड़ा दर्द हुआ दोबारा वो भी मेरा संग देने लगी. हम दोनों चुदाई का पूरा आनन्द ले रहे थे.
फिर हम दोनों बीस मिनट तक चुदाई का आनन्द लेते रहे और दोबारा वो झड़ गई. मैं भी बस झड़ने वाला था दोबारा हम दोनों ने एक-दूसरे को कस के पकड़ किया और दोबारा अपना अपना पानीएक दूसरे में मिला दिया और उसके पश्चात हम एक-दूसरे में समा गए.
हम दस मिनट तक ऐसे ही पड़े रहे और उसके पश्चात बाथरूम में जा कर एक-दूसरे को स्वच्छ किया. हम लोग उस वक़्त भी बिल्कुल नंगे थे.एक दूसरे को स्वच्छ करते वक़्त मैंने उसे कई बार चूमा भी जिससे मेरा लंड दोबारा खड़ा हो गया, मैंने अपना लंड उसके मुँह में डाल दिया और वो उसे दस मिनट तक चूसती रही. दोबारा हम दोनों नंगे हीबाहर् आ गए.
मैंनेबाहर् आकर देखा तो स्वाति दीदी पलंग पर बैठी थी. मैं अपने लंड कोएक कपड़े से छुपाने लगा.
दीदी ने आकर मुझेएक तमाचा मार दिया और बोली- ये क्या कर रहे थे.
तब चित्रा ने स्थिति को संभालते हुए कहा- मैंने कहा था! हम आगे से ऐसा कुछ दोबारा नहीं करेंगे.
तब कहीं जाकर दीदी शांत हुई और मैं वापिस अपने कपड़े पहनने लगा तो दीदी बोली- अपनी दीदी की आग शांत नहीं करेगा?
यह कह कर दीदी मुझे चूमने लगी और चित्रा ये सभी देखती रही मगर मैंने कहा- दीदी, मम्मी आने वाली है. हम दोनों तो कभी भी कर सकते हैं.
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चित्रा के संग सेक्स करते हुए पकड़े जाने के पश्चात दीदी की आग शांत करने की जिमेदारी मेरे मजबूत लौड़े पर आ गई. मगर शादी की वजह से भैया-भाभी ने ऑफिस से छुट्टी ले ली तो कोई मौका नहीं मिल रहा था. मगर कहते है न जहाँ चाह वहाँ राह.
शादी से दो दिन पहले सभी मंदिर गए थे. मगर दीदी के सर में दर्द थाइसलिये दीदी घर पर ही रुक गई. जैसा कि मैंने पहले भाग में बताया था, दीदी ज्यादा ही सेक्सी है,एक दम गोरा रंग, कसा हुआ शरीर, तनी हुई चूचियाँ जो बड़ी थी. दीदी की चूचियों को देखते ही मेरा लंड सलामी देने लगता था. मैं पहले भी कई बार दीदी के नाम की मुठ मार चुका था मगर मैंने सपने में भी नहीं सोचा था कि इतनी मस्त चूत का मैं कभी राजा बनूँगा.
सभी के जाने के पश्चात मैं दीदी के कमरे की तरफ बढ़ा मगर तबीयत खराब होने की वजह से दीदी सोई हुई थी.उन्को सोया देखकर मैं वापिस अपने कमरे में आ गया और अपनी किस्मत को कोसने लगा. मैंने कमरे का दरवाजा बंद किया और दीदी के नाम की मुठ मारने लगा.
थोड़ी देर के पश्चात सभी घर वापिस आ गए.
मैंने मम्मी से कहा- मैं अपने मित्र के घर जा रहा हूँ!
तो चित्रा ने संग चलने को कहा. मैं चित्रा की शरारत समझ गया और मैंने भी हाँ कह दी.
मैंने अपने और चित्रा के सेक्स के बारे में अपने मित्र योगेंद्र को पहले ही बता दिया था. हम सभी उसे योगी कहते थे. वो भी आज इंजीनियर है हम दोनोंएक दूसरे से कोई बात नहीं छुपाते. जब मैं उसके घर पहुँचा तो योगी के अलावा उसके घर में कोई और नहीं था. वैसे योगी के घर में उसके माता-पिता के अलावा उसकी दो बहनें भी हैं.
योगी के घर पहुँचने के पश्चात हम तीनों बात करने लगे. योगी चित्रा की तारीफ करने लगा, वैसे योगीएक नंबर का ठर्की है. दोबारा उसने हमें बीयर पेश की. चित्रा ने मना किया मगर मेरे कहने पर चित्रा ने हाँ कह दी. चित्रा को थोड़ी चढ़ने लगी जिसके कारण वो अंगड़ाई लेने लगी जिससे चित्रा के चूचों की गोलाई साफ-साफ दिखने लगी जिसे देखकर मेरा लंड खड़ा हो गया.
मैंने योगी की तरफ देखा तो उसका लंड भी साँप की तरह खड़ा था.
फिर मैंने चित्रा को देखा और उसके होंठो पर अपने होंठ रख दिये और उसे बाहों में उठा कर योगी के कमरे में ले गया.
योगी भी पीछे-पीछे आ गया, मैंने उसका सूट उतार दिया और दोबारा उसकी ब्रा का हुक भी खोल दिया और दोबारा मैंने चित्रा की पेंटी भी निकाल दी और उसकी चूत चाटने लगा. दोबारा योगी भी उसके होंठ चूमने लगा मगर चित्रा ने योगी का भी कोई विरोध नहीं किया.
फिर मैंने अपना मोबाइल निकाला और योगी को बिना बताए चित्रा और योगी की फोटो खींच ली. योगी तो चित्रा को चूमने में लगा हुआ था. अब चित्रा पूरे होश में थी और वो हमारा पूरा संग दे रही थी शायद वो भी दो-दो लंड का मजाएक संग लेना चाहती थी. दोबारा योगी उसके चूचे चूसने लगा और मैंने अपना लंड चित्रा के मुँह में डाल दिया.
मैंने योगी को हटाया और चित्रा को घोड़ी बनने के लिए कहा और अपना लंड उसकी गांड पर रख कर रगड़ने लगा. इतने में योगी ने अपना लंड चित्रा के मुँह में रख दिया. चित्रा पहली बार गांड मरवा रही थीइसलिये मैंने पहले उसकी गांड पर क्रीम की मालिश की और दोबारा उसकी गांड में हल्का सा धक्का दिया तो वो चिल्लाने की कोशिश करने लगी मगर योगी का लंड उसके मुंह में थाइसलिये वो चिल्ला भी नहीं सकी.
फिर मैं धीरे-धीरे अंदरबाहर् करने लगा और बीच-बीच में हल्के धक्के मार देता जिससे उसकी चीख निकल जाती. मैं तीस मिनट तक उसकी गांड मारता रहा. इतनी देर में वो दो बार झड़ गई. जैसे ही मैं झड़ने वाला था मैंने अपना लंड निकाल और पूरा पानी उसके मुँह में डाल दिया.
हम तीनों पलंग पर लेट गए. हम पंद्रह मिनट तक ऐसे ही लेटे रहे दोबारा मैंने अपने होंठ दोबारा से चित्रा के होंठों पर रख दिये. उसके पश्चात हम बाथरूम में जाकर एक-दूसरे को स्वच्छ करने लगे. दोबारा हम तीनों नंगे हीबाहर् आ गए तो योगी ने चित्रा को पकड़ लिया और चित्रा के चूचे चूसने लगा. उसने चित्रा को बाहों में लेकर उसे पलंग पर लिटा दिया तो चित्रा बोली- अभी मैं थक गई हूँ!
मगर योगी ने उसकीएक नहीं सुनी और अपना लंड उसकी चूत में डाल दिया तो वो दर्द के मारे चिल्ला उठी.
योगी पंद्रह मिनट तक उसकी चूत मारता रहा. दोबारा वो दोनों जाकर नहाये और दोबारा हम तीनों ने अपने कपड़े पहने और मैं और चित्रा वापिस घर आने लगे.
तभी चित्रा ने योगी के होंठों पर अपने होंठ रख दिए और थेंक-यू कहा और दोबारा हम दोनों वापिस घर आ गए.
चित्रा और मैं बहुत थक गए थेइसलिये हम दोनों मेरे कमरे में जाकरएक ही पलंग पर सो गए. जब मैं सो कर उठा तो देखा चित्रा वहाँ नहीं थी.
मैं उठा और चित्रा के कमरे की तरफ बढ़ा मगर चित्रा के कमरे का दरवाजा बंद था और अंदर से आवाजें आ रही थी. मैंने ध्यान से सुना तो चित्रा किसी से बात कर रही थी.
सुनने के लिए मैं दरवाजे के बिल्कुल पास आ गया तो ये कोई और नहीं बल्कि स्वाति दीदी थी.
मैं वापिस अपने कमरे में आ गया क्योंकि मुझे अब स्वाति दीदी का कोई डर नहीं था. मैं फ्रेश होने के पश्चात नीचे आ गया तो स्वाति दीदी और चित्रा पहले से ही नीचे थी. चित्रा ने सूट और स्वाति दीदी ने काले रंग की साड़ी पहन रखी थी. उस साड़ी में दीदी क्या कयामत लग रही थी.
थोड़ी देर में मुझे किसी की मिस कॉल आई मैंने देखा तो वो स्वाति दीदी की थी. मुझे समझते देर न लगी और मैंने रिटर्न कॉल की तो दीदी ने फोन नहीं उठाया.
मैं सीधा दीदी के कमरे की ओर बढ़ा. मैंने दरवाजे को हाथ लगाया तो दरवाजा खुला हुआ था. मैं अंदर गया तो दीदी अंदर थी, उन्होंने लाल रंग की पारदर्शी नाइटी पहन रखी थी. उनकी लाल रंग की ब्रा और पेंटी उस नाइटी में से स्वच्छ दिखाई दे रही थी.
मैंने दरवाजा बंद किया और अंदर आ गया. दीदी मेरे उपरि टूट पड़ी और मेरी टी-शर्ट और बनियान उतार दी और मेरी छाती पर जीभ फेरने लगी.
मैंने भी देर न करते हुए दीदी के होंठो पर अपने होंठ रख दिये और हम दोनों पंद्रह मिनट तक एक-दूसरे को चूमते रहे. दोबारा मैंने दीदी की नाइटी उतार दी और ब्रा के उपरि से ही उनके चूचे मसलने लगा जिससे दीदी मचल उठी. मैंने दीदी की ब्रा का हुक खोल दिया और अपना मुँह दीदी के होंठो से हटा कर उनके चूचे चूसने लगा.
हमें किसी का ड़र नहीं था क्योंकि रात का टाइमथा और ज़्यादातर लोग सो चुके थे.
दीदी ने जोश में आते हुए मेरी पैंट और अंडरवीयर उतार दी और मेरा लंड दबाने लगी. मैंने भी स्वाति दीदी की पेंटी निकाल दी और उनको बाहों में लेकरउन्को चूमने लगा जिससेउन्को भी जोश आ गया और वो भी मेरा पूरा संग देने लगी.
फिर मैंनेउन्को पलंग पर लिटा दिया और उनकी चूत चाटने लगा जिससे वो सिहर उठी. मैंने आव देखा न ताव, अपना लंड दीदी के मुँह में रख दिया और दोबारा दीदी उसे लोलीपॉप की तरह चूसने लगी और हम 69 की अवस्था में आ गए. हम पंद्रह मिनट तकएक दूसरे को चाटते रहे और दोबारा मैंने अपना लंड दीदी की चूत पर रख दिया.
मेरी दीदी पहली बार किसी से चुदने वाली थीइसलिये मैं धीरे-धीरे धीरे धक्का मारने लगा. जैसे ही मैं धक्का मारता, दीदी चिल्ला उठती. हमारा चुदाई कार्यक्रम बीस मिनट तक चला. इतने में दीदी दो बार झड़ गई, मैं भी झड़ने वाला थाइसलिये मैंने धक्के मारना तेज़ कर दिया. दीदी को भी अब आनंद आ रहा था. दोबारा मैं भी झड़ गया और हमारा पानी एक-दूसरे में मिल गया. दोबारा हम दोनों एक-दूसरे के उपरि लेट गए, हम बहुत देर तक वैसे ही लेटे रहे और हमएक दूसरे को चूमते रहे जिससे दीदी दोबारा से गर्म हो गई और मेरा लंड भी दोबारा खड़ा हो गया.
मैंने दोबारा से दीदी को चोदा. उस रात मैंनेउन्को चार बार चोदा. हम सुबह तक एक-दूसरे की बाहों में लेटे रहे. सुबह किसी ने दरवाजा खटकाया तो हम डर गए. मैंने खिड़की में से देखा तो वो चित्रा थी. चित्रा को सभी पता थाइसलिये वो चली गई और दोबारा मैं और दीदी उसके पश्चात बाथरूम में जाकर एक-दूसरे को स्वच्छ करने लगे. दीदी अपने चूचों पर पानी डाल-डाल कर स्वच्छ कर रही थी जिसे देख कर मेरा लंड दोबारा से खड़ा हो गया. मैंने दीदी को बाहों में उठाया और पलंग पर लिटा दियाएक बार दोबारा उनकी चुदाई की.
फिर मैंने दीदी से कहा- मुझे तुम्हारी गांड मारनी है!
तो दीदी ने कहा- अभी नहीं! सुबह हो चुकी है, कोई भी आ सकता है. और मेरे भैया राजा, अब तो मैं पूरी तुम्हारी हूँ, कभी भी मार लेना! और अब मुझे अकेले में दीदी नहीं डार्लिंग बोला करो.
फिर हमने एक-दूसरे कोएक लंबा चुंबन दिया और कपड़े पहन कर नीचे आ गए.
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सुबह नीचे आने के पश्चात मुझे ज्यादा ग्लानि महसूस हो रही थी कि मैंने अपनी बहन के संग सेक्स किया मगर मुझे रह-रह कर उसकी उसकी मस्त चूचियों की चुसाई और उसकी चूत की खुशबू भी याद आती. मैं दोबारा अपने कमरे में वापिस चला गया. तभी दीदी मेरे कमरे में आई तो मैं वहाँ से उठ कर जाने लगा. तभी उन्होंने मेरा हाथ पकड़ लिया और मेरे होंठों पर अपने होंठ रख दिये जिससे मेरी बची हुई शर्म भी चली गई और मैं भी उनके होंठ चूसने लगा.
पाँच मिनट तक एक-दूसरे के होंठ चूसने के पश्चात दीदी उठी और वहाँ से जाने लगी तो मैंनेउन्को पकड़ लिया तो वो मुझसे बिल्कुल चिपक गई जैसेएक साँप चन्दन के पेड़ से चिपकता हैं और मैं दोबारा से उनके होंठो का रसपान करने लगा.
मगर दोबारा मम्मी की आवाज़ आई और दीदी नीचे चली गई.
उसके पश्चात शादी की वजह से मैं और दीदी दो दिनों तक सही से एक-दूसरे से बात भी नहीं कर पाये. खैर किसी तरह शादी निपट गई और चित्रा भी अपने घर चली गई. अब दीदी सुबह ही अपनी नौकरी पर निकल जाती और शाम को लेट आतीइसलिये मेरे लिए उनके पास कोई वक़्त नहीं बचता था और रविवार को सभी घर पर होते थे.
शनिवार था, मेरी कॉलेज की छुट्टी थीइसलिये मैं घर पर अपने कमरे में बैठा था तभी मम्मी की आवाज़ आई.
मैं नीचे गया तो मम्मी नेएक फ़ाइल मुझे देते हुए मुझे कहा- स्वाति ये फ़ाइल भूल गई है, उसका फोन आया है, तू जाकर ये फ़ाइल उसे उसके ऑफिस में दे आ.
मैंने फ़ाइल उठाई और ऑफिस चल दिया. दीदी का ऑफिस बहुत दूर थाइसलिये मैं गाड़ी ले गया. मैं ऑफिस पहुंचा तो चपरासी ने कहा- मैडम बॉस के संग मीटिंग में हैं! आप इंतज़ार कीजिये.
मगर मुझे घर जाने कि जल्दी थीइसलिये मैं स्वाति के बॉस के कैबिन की तरफ बढ़ गया. मैंने कैबिन का दरवाजा खोलना चाहा तो दरवाजा नहीं खुला, शायद दरवाजा अंदर से बंद था. मैंने खिड़की से झांक कर देखा तो मैं दंग रह गया क्योंकि अंदर दीदी बॉस की बाहों में थी और उनके तन पर कपड़े के नाम पर सिर्फ पेंटी थी और उनका बॉस उनके चूचे चूस रहा था.
दीदी के बॉस का नाम श्यामलाल था और उनकी उम्र 48 थी मगर दोबारा भी वो बहुत जवान दिख रहा था. ये देख कर मेरी आँखों से आंसू आ गए और मैं वापिस दीदी के कैबिन में आ गया.
थोड़ी देर के पश्चात दीदी वापिस अपने कैबिन में आई, मुझे देख कर बोली- तू इतनी जल्दी कैसे आ गया?
मैंने कहा- मैं गाड़ी से आया हूँ.
उनके पीछे उनका बॉस श्यामलाल आया और चपरासी से तीन चाय कह कर मुझे और दीदी को अपने कैबिन में बुलाया.
हम सभी बैठ कर बात कर रहे थे. तभी कंपनी का मैंनेजर अब्दुल आया और कोई फ़ाइल दीदी के बॉस को दी और दोबारा मुझे देख कर चला गया.
चाय पीने के पश्चात मैं कंपनी के गेट से निकला तो मुझे याद आया कि मैं अपनी चाभी तो दीदी के बॉस के कमरे में छोड़ आया. मैं चाभी लेने के लिए वापिस मुडा और दीदी के बॉस के कमरे की तरफ बढ़ा. मैंने दरवाजा खोलना चाहा तो दरवाजा दोबारा से बंद था.
मुझे समझते देर न लगी और मैंने खिड़की से झाँका तो मैंने जो सोचा था उससे ज्यादा देखने को मिला. दीदी का बॉस श्यामलाल और कंपनी का मैंनेजर अब्दुल दोनों मेरी बहन को बड़ी बेदर्दी से चोद रहे थे और मैं कुछ नहीं कर पा रहा था. मगर मैं अंदर भी नहीं जा सकता था और मैं वहाँ खड़ा रह कर देख भी नहीं सकता था क्योंकि मेरी गाड़ी की चाभी अंदर थी. दोबारा मैंने अपना मोबाइल निकाला और दीदी की उसके बॉस और कंपनी के मैंनेजर के संग फोटो खींच लिए.
तभी मैंनेजर उठा और कपड़े पहनने लगा मुझे लगा कि शायद दीदी का चुदाई कार्यक्रम ख़त्म हो गया. मगर दीदी का बॉस रुक नहीं रहा था और दीदी की चूत का भोसड़ा बनाने में लगा था. श्यामलाल अपना जोशीला लंड दीदी की चूत से निकालने को ही तैयार ही नहीं था.
तभी गेट खुला, मैं छुप गया और फ़िर एकदम फ़ुर्ती से सीधा अंदर घुस गया. दीदी और उसका बॉस मुझे देख कर हैरान रह गए.
अब दीदी मुझे तरह-तरह के कारण देने लगी मगर मैंने बिना कुछ कहे चाभी उठाई औरबाहर् आ गया और दीदी के कैबिन में जाकर बैठ गया.
तभी दीदी और उसके बॉस श्यामलाल कपड़े पहन कर दीदी के कैबिन में आ गए और दोबारा दोनों मिल कर तरह-तरह के कारण देने लगे.
दीदी के बॉस ज्यादा ज्यादा घबराए हुए थे शायद उन्हे ये नहीं पता था कि ये चुदाई का कार्यक्रम मैं और स्वाति पहले ही खेल चुके हैं. श्यामलाल ने कहा- तुम ये बात किसी को मत बताना. मैं वायदा करता हूँ कि इसके बदले में तुम जो मांगोगे वो मैं तुम्हें दे दूंगा.
मगर मैंने कहा- मुझे अभी कुछ नहीं चाहिए जब जरूरत होगी तब मांग लूँगा.
यह कह कर मैं वहाँ से चल दिया, दीदी भी मेरे पीछे आने लगी, शायद श्यामलाल ने दीदी की छुट्टी कर दी थी.
मैं और दीदी गाड़ी में बैठे और हम घर कि तरफ चल दिये मगर दीदी शांत बैठी थी. मैंनेएक सुनसान स्थान पर गाड़ी रोक दी और दीदी के गालों परएक चुंबन दिया और कहा- आपको घबराने या शर्माने की कोई जरूरत नहीं, मैं जानता हूँइसे उम्र में ऐसा हो जाता है.
मैंने इतना कहा तो दीदी की आँखों से आँसू निकल आए और दोबारा हम दोनों नेएक दूसरे को बाहों में भर लिया. उसके पश्चात दीदी ने अपने होंठ मेरे होंठों पर रख दिये. दस मिनट तक दीदी ने अपने होंठ मेरे होंठो से नहीं हटाए.
फिर हम दोनों घर की तरफ चल दिये, मगर घर का दरवाजा बंद था. मैंने डुप्लिकेट चाभी से दरवाजा खोला और और दोबारा हम अंदर आ गए. दोबारा मैंने मम्मी को फोन किया तो मम्मी ने कहा कि वो चार घंटे पश्चात आएंगी.
यह सुनने के पश्चात मेरी खुशी का ठिकाना न रहा क्योंकि आज मेरे पास वो मौका था जो मुझे कई दिनों से नहीं मिल रहा था.
मैं दीदी के कमरे की तरफ बढ़ा तो देखा कि दीदी कपड़े बदल रही थी. आज मुझे दरवाजा बंद करने की कोई जरूरत नहीं थी क्योंकि घर पर कोई नहीं था.
दीदी ने उस वक़्त सफ़ेद टी-शर्ट और जीन्स पहन रखी थी. मैं जैसे ही अंदर घुसा तो दीदी ने कहा- मैं तुम्हारा ही इंतज़ार कर रही थी.
मैं थोड़ा घबरा गया और मैंने कहा- दीदी दीदी!!!
तो दीदी बोली- मैंने तुमसे कहा था कि अकेले में मुझे दीदी नहीं डार्लिंग बोला करो.
दीदी कुछ और बोलती इससे पहले मैंने उसका मुंह बंद करने के लिए अपने होंठ उनके होंठो पर रख दिये और टी-शर्ट के उपरि से ही उनके चूचे मसलने लगा तो दीदी मचल उठी.
इतने में दीदी ने मेरी भी टी-शर्ट और पैंट उतार दी. इससे मैं भी और जोश में आ गया और मैंने भी उनकी टी-शर्ट और जीन्स निकाल दी और पेंटी के उपरि से ही उनकी चूत रगड़ने लगा जिससे वो झड़ गई और उनकी चूत ने पानी छोड़ दिया. मैंने देर ना करते हुए उनकी पेंटी उतारी और उनकी चूत का पानी पीने लगा.
फिर मैंने उनकी ब्रा भी निकाल फेंकी और हम दोनों एक-दूसरे के सामने नंगे खड़े थे. मैंनेउन्को बाहों में उठाकर पलंग पर लिटा दिया और वो मेरा लंड चूसने लगी दोबारा मैंने उनको घोड़ी बनने के लिए कहा.
मैंने पहले उनकी गांड में उंगली डाली तो उनकी गांड ज्यादा कसी नहीं थी. शायद उसके बॉस श्यामलाल पहले भी उसकी गांड मार चुके थेइसलिये मैंने ज़ोर का धक्का लगा दिया जिससे मेरा करीब आधा लंड स्वाति की गांड में समा गया और वो चिल्ला उठी.
फिर मैं धीरे-धीरे अंदर-बाहर करने लगा तोउन्को भी आनंद आने लगा और वो भी मेरा संग देने लगी. मैंने बीस मिनट तक उनकी गांड मारी दोबारा मैंने पानी छोड़ दिया और निढाल होकर पलंग पर लेट गया.
हम दोनों बाथरूम में जाकरएक दूसरे को स्वच्छ करने लगे और दोबारा कपड़े पहन लिए.
अब मैं कभी भी दीदी के संग सेक्स के मजे ले सकता था.
एक लड़का जो थोड़ा शर्मीला था उसका चरित्र अपनी फ़ुफ़ेरी बहन और सगी बहन के संग सेक्स करने के पश्चात बदल चुका था क्योंकि जिस बहन की वो इज्जत करता था वो बहन अब उसकी तथाकथित बन चुकी थी.
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