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कहानी ठाकुर परिवार की है. चार लोगों केइसे परिवार मे बाहरसे देखने पर सभी कुछ सामानया ही था लेकिन इसके अंदर कितने गहरे राज छुपे हुए थे ये कोई नही जनता था. परिवार का मुखिया ठाकुर सोमराज सिंह. उँची कद काठी का पुरुष था.
पढ़ने लिखने मे कुछ ज्यादा तेज नही था वोइसलिये उसने नौकरी नही बल्कि अपना स्वयं का बिसनेस शुरुआत कर दिया था ज्यादा पहले ही. आज के टाइममे अपने शहर के सबसे राईस लोगों मे शुमार था ठाकुर सोमराज सिंह.
उसकी पत्नी नीलू सिंह. देखने म... Continue reading
कहानी ठाकुर परिवार की है. चार लोगों केइसे परिवार मे बाहरसे देखने पर सभी कुछ सामानया ही था लेकिन इसके अंदर कितने गहरे राज छुपे हुए थे ये कोई नही जनता था. परिवार का मुखिया ठाकुर सोमराज सिंह. उँची कद काठी का पुरुष था. पढ़ने लिखने मे कुछ ज्यादा तेज नही था वोइस...
नीलू और सोम ने बाथरूम में चुदाई करने में ज्यादा देर नहीं लगायी. इसके पहले बड़े सरे रोमांचक काम ये लोग कर चुके थे.लेकिन कभी ये आनंद नहीं लिया था.बच्चों के हाथों पकडे जाने का डर. अपने आप में ये भी बड़ी चीज होती है.लगभग हर कपल शादी के पश्चात और खासकर बच्चे होने...
अगलेएक दो दिन तो आराम से ऐसे ही बीत गए.बच्चों को अपने लिए कुछ कुछ सामन लेना था और चूँकि वो बाजार नहीं जानते थेइसलिये सोम उनके संग बराबर रहा और उनकी खरीदारी करवाता रहा. भानु अपना लैपटॉप तो ले के ही आया था लेकिन संग ही उसनेएक कंप्यूटर और ले लिया नया.और रानी न...
दूसरी तरफ कमरे का दरवाजा खोल के काकी अन्दर आई.सोम और नीलू अन्दर पहले ही नंगे बैठे हुए थे बिस्टर पर. काकी -एक राउंड हो गया क्या?? सोम - नहीं .नीलू कह रही थी की काकी आ जाएँ दोबारा शुरुआत करते हैं. बड़ी देर कर दी आने में? काकी - हाँ बच्चों के कमरे की लाइट चालू...
अब तीनो के लिए और वेट करना मुश्किल था.अब तक काकी की सारी भी खुल चुकी थी और वो भी उन दोनों की ही तरह एकदम नंगी हो गयी थी. काकी का बदन अब भी बहुत टाइट था.इतनी उम्र के पश्चात भी इतना टाइट बदन होना अपने आप में बड़े कमाल की बात थी. नीलू सोम और काकी अक्सर संग साथ...
Incest Sex Story : परदे मे रहने दो (Full Story)
कहानी ठाकुर परिवार की है. चार लोगों केइसे परिवार मे बाहरसे देखने पर सभी कुछ सामानया ही था लेकिन इसके अंदर कितने गहरे राज छुपे हुए थे ये कोई नही जनता था. परिवार का मुखिया ठाकुर सोमराज सिंह. उँची कद काठी का पुरुष था.
पढ़ने लिखने मे कुछ ज्यादा तेज नही था वोइसलिये उसने नौकरी नही बल्कि अपना स्वयं का बिसनेस शुरुआत कर दिया था ज्यादा पहले ही. आज के टाइममे अपने शहर के सबसे राईस लोगों मे शुमार था ठाकुर सोमराज सिंह.
उसकी पत्नी नीलू सिंह. देखने मे ज्यादा सुंदर नही थी लेकिन दोबारा भी आकर्षक थी.
उसमे कुछ ऐसा था जो नज़र खीच लेता था. नीलू सिर्फ़ हाउसवाइफ थी. उन दोनो के जुड़वा बच्चे थे.
एक लड़काएक लड़की. लड़के का नाम भानुप्रताप और लड़की का नाम नंदिनी था. नंदिनी को सभी प्रेम से रानी कहते थे.
भानु को हमेशाइसे बात की शिकायत रहती थी की उसका नाम पुराने जमाने का है लेकिन बेचाराइसे बारे मे कुछ कह नही सकता था.
सोमराज ज्यादा ही कड़क पुरुष था और उससे बात करना हरएक के लिए ज्यादा मुश्किल होता था.
यह रहा परिवार का फॉर्मल इंट्रो. ये लोग उत्तरप्रदेश के कानपुर मे रहते थे. भानु और रानी दोनो ही शुरुआत से ही बोरडिंग स्कूल मे डाल दिए गये थे.
उन्हें सिर्फ़ छुट्टियों मे ही अपने घर आने का मौका मिलता था. लेकिन दोनो माता पिता उनसे मिलने के लिए वर्ष मे काई बार उनके बोरडिंग स्कूल अवश्य जाते थे.
दोनो बच्चे पढ़ने मे ज्यादा अच्छे थे. और दोनो ने हमेशा ही अपने परिवार से ज्यादा प्रेम पाया था.
नीलू अपने बच्चों पर जान छिडकती थी और उनकी हर तमन्ना पूरी करती थी.
सोमराज कुछ ४७ वर्ष के थे. नीलू ४५ की थी. दोनो बच्चों की उम्र २१ वर्ष की थी. अब शुरुआत करते हैं इनकी कहानी.आज रानी और भानु अपने कॉलेज से अपना कोर्स ख़त्म कर के अपने घर लौट रहे हैं.
दोनो ने बी कॉम किया है. दोनो अलग अलग शहर के कॉलेज मे थे. दोनो की छुट्टियाँएक संग ही शुरुआत ही थी.
आगे का उन्होने अभी कोई प्लान नही किया था. वो कुछ लंबे टाइमके लिए अपने घर पर ही रहना चाहते थे. आज दोनो के आने का इंतजार नीलू को ज्यादा ज़्यादा था. लेकिन सोमराज कुछ ज़्यादा खुश नही था.
सोम भी अपने बच्चों से ज्यादा प्रेम करता था. लेकिन उनके घर पर रहने का मतलब ये था की सोम के कुछ काम बंद होने वाले थे.
सोम अपने घर मे जिस तरीके से रहता था वो उसे बदलना पड़ता था. जब भी बच्चे घर आते थे.
लेकिन पिता के रूप मे वो खुश भी था की उसके बच्चे इतने सालों के पश्चात अपने घर आ रहे हैं औरइसे बार उनके पास रहने के लिए ज्यादा टाइम है.
नीलू समझ रही थी की सोम के मान मे क्या चल रहा है. उसे भी काफ़ी सारे बदलाव करने थे स्वयं मे. बच्चों के प्रेम मे ज्यादा ताक़त होती है.
दोनो ने सोच लिया था की कुछ टाइमके लिए ये नये तरीके की जिंदगी भी जी के देख ली जाए.
कहानी का पहला दिन.भानु और रानी आज दोपहर की फ्लाइट से आने वाले हैं. उनकी फ्लाइट का टाइम ३ बजे का है.
अभी दिन के नौ बाज रहे हैं. सोम और नीलू अपने लौन मे बैठे हुए हैं. ठंडी का टाइमहै. अंदर घर का स्टाफ घर की सफाई कर रहा है.
सोम - नौकरों को सभी समझा दिया है ?
नीलू - हाँ. समझा तो सभी दिया है. पता नही कैसे कर पाएँगे. कहीं कुछ बिगड़ ना दें.
सोम- बिगाड़ देंगे तो इनकी मा चोद दूँगा मैं.
नीलू - सबसे पहले तो आप ही बिगाड़ेंगे सारा खेल. अब बंद कीजिए ऐसे गली देना. बच्चे आ रहे हैं और आप अभी तक मा बहनएक कर रहे हैं सभी की.
सोम - सॉरी. गुस्से मे निकल गया.
नीलू - आपके इसी गुस्से की वजह से हमारी पोल खुल जाएगी बच्चों के सामने.
सोम - अब नही बकुँगा गाली. बस ये लास्ट थी. क्या क्या कह दिया है स्टाफ को.
नीलू - कुछ नही बस इतना कह दिया है की अब तुम लोग कभी घर मे आ जा सकते हो. जब भी भानु और रानी आवाज़ दें तो उनकी बात सुनना और काम करना.
सोम - ओके.देख्ना ये है की इनमे से कोई अपनी ज़ुबान न खोले बच्चों के सामने.
नीलू - यदि किसी ने कुछ कह दिया तब तो अवश्य उसकी मा चोद देना.
सोम - मुझे तो बड़ा ज्ञान दे रही थी.
अब स्वयं की ज़ुबान को क्या हुआ?
नीलू - सॉरी . लेकिन सच मे मुझे ज्यादा डर लग रहा है.
कितने ऐश मे जीते थे हम लोग. लेकिन अब सभी बंद हो जाएगा.
लेकिन क्या कर सकते हैं बच्चे भी तो हमारे हैं.उन्को भी तो हमारे प्रेम की ज़रूरत है. वैसे भी हमने कभी अपने बच्चों को अपने पास नही रहने दिया.
देखो ना दोनो २१ वर्ष के हो गये लेकिन कभीएक महीने भी नही रहे होंगे घर पर.
हमेशा या तो हम उनके स्कूल चले जाते थे याउन्को कहीं और घूमने ले जाते थे.
सोम- हाँ सही कह रही हो. लेकिन दोबारा भी मुझे लगता है की हमारे बच्चे हमारे ज्यादा क्लोज़ हैं.
नही तो देखो ना दूसरों केबच्चे अपने मा बाप से सभी छुपा लेते हैं. हम तो दोबारा भी लकी हैंइसे मामले मे.
नीलू - हन.रोज बात होती रहती थी हमारी बच्चों से इसीलिए ऐसा हैंअहि तो हमारे बच्चे भी हमसे दूर हो जाते.
सोम - इसीलिए कहता हूँ तुम बेकार मे परेशन मत हो. सभी कुछ ठीक ही होगा.देख्ना हम कोई ना कोई तरीका खोज ही लेंगे. और दोबारा वैसे भी बच्चे जवान हैं.
वो लोग सारा दिन घर पेर तो रहेंगे नहि.कहिनबाहर् जाएँगे ही. तो हमारे लिए वोएक मौका तो है ही.
नीलू - ऐसे तो कई मौके मिलेंगे लेकिन उसमे वो बात कहाँ.
सोम - आएगी. वो बात भी आएगी और वो मज़ा भी आएगा. तुम देखती जाओ बस. जल्दी जल्दी मे चुदाई करने का मज़ा ही कुछ और है.अर्रे देखो ये नौकरों ने अभी तक हमारा कमरा सॉफ नही किया क्या.ज़रा देख के आओ.
अगर सॉफ हो गया हो तो कमरे मे चलते हैं. अंदर से बंद कर लेंगे औरएक चुदाई कर लेंगे जल्दी से.
नीलू - हाँ मैं भी यही सोच रही थी. रूको मैं देख के आती हूँ.
नीलू ने बारी बारी से सभी कमरे देखे.उसे ज्यादा जल्दी भी थी क्योंकि बच्चों को लेने के लिए एयरपोर्ट जाने में भी अब ज्यादा टाइमनहीं रह गया था.
वो जिस जिस भी कमरे में जाती वहां उसे कुछ न कुछ कमी दिख जाती थी.
उसने नौकरों को बुलाने के बजाय स्वयं ही काम करना शुरुआत कर दिया.
उधेर नीचे सोम बैठा नीलू की आवाज का वेट कर रहा था की कितनी जल्दी नीलू इशारा कर दे और वो जल्दी जा के उसके उपर चढ़ाई कर दे.
जब ज्यादा देर तक उसे नीलू की आवाज नहीं आई तो उसने ही आवाज दी.
जवाब आया की इधर तो ज्यादा काम बाकी बचा है.आओ जरा मदद कर दो दोबारा हमें एयरपोर्ट भी जाना है.
इतना तो सोम को नाराज करने के लिए बहुत था.वो उसी टाइमनौकरों पर चिल्लाने लगा की हरामखोर हैं सभी कोई काम ठीक से नहीं करते.
लेकिन दोबारा उसे ही ख्याल आया की अभी चिल्लाने के चक्कर में जोएक मौका है चुदाई करने का कहीं वो न हाथ से निकल जाये.
तो वो भी जल्दी भाग के उपर गया और नीलू के संग काम करवाने लगा.
दरअसल ये दोनों ही पति पत्नी दिन रात चुदाई करते थे तो उनके पुरे घर में चुदाई से जुडी हुई चीजें ही फैली हुई थीं.
नौकरों को तो ये बात मालूम थी की उनके मालिक मालकिन कैसे हैं लेकिन बच्चों के सामने ये सभी जाहिर नहीं होने देना चाहते थे.
बहुत सफाई करने के पश्चात भी नौकरों ने कुछ चीजें मिस कर दी थीं.जैसे स्वयं उन्ही के बेडरूम में टीवी की टेबल के नीचे ही ज्यादा सारी पोर्न फिल्म और पोर्न वाली पत्रिकाएं रखी हुई थी.
नीलू के कुछ चुदाई वाले स्पेशल कपडे भी बहार रह गए थे.इसी तरह की छोटी छोटी चीजें अभी भी घर में बिखरी हुई थी.
सबसे बड़ी दिक्कत की बात तो ये थी की दोनों घर में अकेले ही रहते थेइसलिये वो कब कहाँ किस स्थान पर चुदाई करना शुरुआत कर देंगे इसका भी कुछ हिसाब नहीं था.
भानु और रानी दोनों के ही नाम से घर में कमरे तो थे लेकिन वो लोग कभी घर में रहे नहींइसलिये उन कमरों का उपयोग भी इन्ही पति पत्नी की चोद्लीला के लिए ही होता था.
और वहां भी इसी तरह के सामान बिखरे हुए थे अभी भी.
इसीलिए सोम इतना नाराज हो रहा था नौकरों पर की इतने दिनों से सफाई के लिए कहा हुआ है लेकिन घर साफ़ नहीं
हुआ.
घर के ये वफादार नौकर आपसे पश्चात में मिलेंगे.अभी सोम और नीलू का हाल सुनिए.
जैसे ही सोम कमरे के अन्दर आया तो देखा की नीलू ने हाथ में ज्यादा साडी पत्रिकाएं उठाई हुई हैं और कुछ उठा रही रही है.
सोम - ये अभीबाहर् ही रह गयी हैं.???
नीलू- हाँ वही तो. पुरे घर में इतने दिनों से सफाई चल रही है लेकिन ये सामान है की ख़त्म ही नहीं होता.
सोम- ये हरामजादे नौकर भी न.
कोई काम ठीक से नहीं करते.
नीलू -उन्को गाली पश्चात में दे लेना अभी काम करवाओ हमें दोबारा जाना भी है न.
सोम- अरे तो क्या उसी में सारा टाइमनिकल जायेगा.एक बार चोद लेते हैं न जल्दी से दोबारा पता नहीं कब मौका मिले.
नीलू- बिलकुल नहीं. पहले ये सभी काम करवाओ दोबारा मार लेना.
सोम- लेकिन इतना टाइम ही कहाँ है हमारे पास.
नीलू- तो जल्दी जल्दी हाथ चलाओ न जब से मुंह चला रहे हो.आओ जल्दी से काम करवाओ.
सोम चिढ के मुंह बना तो लेता है लेकिन जनता है की नीलू सही कह रही है.
दोनों जल्दी जल्दी से चीजें समेटने में लग जाते हैं.
भानु और रानी दोनों ही २१ वर्ष के हो चुके हैं.खुद सोम और नीलू के बीच सिर्फ दो वर्ष का ही अंतर है.
हालांकि सोम दो वर्ष छोटा है नीलू से.नीलू की उम्र करीब ४७ वर्ष और सोम की उम्र ४५ वर्ष की है.इनकी शादी कब कैसे किन हालातों में हुईइसे पर पश्चात में रौशनी डाली जाएगी.
अभी तो गौर करने वाली बात ये है की दुनिया में शायद ये एकलौते ऐसे मम्मी बाप होंगे जो अपने बच्चों के आ जाने से अपनी चुदाई में पड़ने वाली बाधा से चिंतित थे और वो भी इतने ज्यादा चिंता में थे.
दोनों काम के संग साथ बातें भी कर रहे थे.
सोम - इतने दिनों से हमें पता है की बच्चे आने वाले है लेकिन दोबारा भी ये सभी काम ख़त्म क्यों नहीं हुआ.
नीलू - पता तो तुम्हें भी था न लेकिन तुमने भी ध्यान नहीं दिया की टाइमनजदीक आ रहा है तो दोबारा मुझे क्यों दोष दे रहे हो ?
सोम - तुम्हें दोष नहीं दे रहा हूँ बल्कि हैरान हूँ की हमने इतनी बड़ी लापरवाही कैसे कर दी?
नीलू - तुम्हें हैरानी होती होगी मुझे तो नहीं हो रही.यह सभी तुम्हारे हलब्बी लंड का नतीजा है.
जब देखो खड़ा रहता है. न स्वयं कुछ करते हो न मुझे काम करने देते हो.जब देखो तुम्हें बस चुदाई चाहिए होती है.उसी का नतीजा है ये सब.
सोम- लेकिन हम तो इतनी बड़ी पार्टीज मैनेज कर लेते हैं दोबारा ये इतनी सी बात कैसे नहीं मैनेज हुई हमसे.
नीलू - मैंने सोचा था कीएक रात पहले सभी ठीक कर लूंगी.
सोम - तो दोबारा किया क्यों नहीं? क्या करती रही कल रात?
नीलू - मैं करती रही या तुम करते रहे? मैंने तो कहा था कल ही की रात में सरला को मत बुलाना. वो छिनालएक बार चुद के कभी नहीं सोती.एक बार शुरुआत होती है तो पुरे मोहल्ले से चुदने के पश्चात ही सोती है.
फिर भी तुमने नहीं मानी बात और बुला लिया उसे भी.
सोम - मैंने तो ये सोच के बुलाया था की तुमइसे काम में बिजी रहोगी तो मैं उसे चोद लूँगा तब तक.
नीलू - हाँ वो तो जैसे इतनी सीधी है.रात भर तुमसे लंड लेती रही और मेरी भोस में मुंह डाल के बैठी रही.आज सुबह आँख भी देर से खुली उसके कारन.
सोम - हाँ लेकिन आनंद तो आया न.कुछ भी कहो सरला है बड़ी नमकीन.
नीलू - हाँ वो तो है लेकिन उसके नमक के चक्कर में अब जो हमारी आफत हो रही है उसका क्या.
सोमू मैं तो स्वयं बड़ी परेशां हूँ की अब कैसे ये सभी रंग रेलियाँ किया करेंगे हम लोग.
सोम - चिंता न करो.कुछ न कुछ रास्ता निकाल लेंगे.और दोबारा हमारे फार्म हाउस तो है ही इसी काम के लिए.वहां जा जा के बुझाएंगे अपनी ठरक.
नीलू - हाँ ऐसा ही कुछ करना पड़ेगा.
इतनी देर में उन्होंने अपना कमरा करीब सेट कर लिया था और दोबारा भानु का कमरा भी सेट हो गया था.
वो लोग अब रानी के कमरे में थे.इस कमरे में वो लोग अक्सरबाहर् के लोगों के संग मजे करते थे.
तो इधर तो और भी ज्यादा सामन पड़ा हुआ था.अब एयरपोर्ट के लिए निकलने में सिर्फएक घंटा रह गया था.दोनों ने जल्दी जल्दी हाथ चलाना शुरुआत किया.
काफी चीजें वहां से हटा देने के पश्चात जब नीलू कमरे केएक कोने में कड़ी कमरे का मुआयना कर रही थी तब सोम ने सोचा की अभी सही टाइमहै राउंड लगाने का.
नीलू ने सलवार कुरता पहना हुआ था.और जाने के पहले वो कपडे चेज करने वाली थी.यह बात सोम भी जनता था.
यह दोनों ही चुदाई के टाइमखूब हंगामा करते थे.एक दुसरे को गाली देते थे.एक दुसरे को जोर से करने के लिए उकसाते थे और इनके बीच सेक्स में कुछ भी गन्दा नहीं था.यह सभी कुछ करने के शौक़ीन थे.सब कुछ.
सोम जैसे ही नीलू के पीछे आ के खड़ा हुआ.नीलू भी समझ गयी की सोम का क्या मूड है.
उसने बिना किसी देरी के अपनी सलवार का नाडा खोल दिया और सलवार सर्र से नीचे सरक गयी.
कुरते के बड़े बड़े कट उसकी जाँघों से ले के कमर तक थे.
सोम ने भी अपनी ज़िप खोल ली थी.अभी इनके पास ज्यादा रस ले के चुदाई करने का टाइमनहीं था.इसलिए सीधे ही चुदाई करने के सिवा कोई रास्ता नहीं था.
नीलू ने अभी भी कमरे को ताकना जारी रखा था.हाँ वो अब नीलू के पलंग पर अपनीएक टांग चढ़ा चुकी थी.इससे उसकी चूत खुल गयी थी.सोम पीछे आया.उसने न थूक लगाया न कुछ.बस नीलू के पीछे आ के उसने चूत के मुंह पर अपना लंड सेट किया.औरएक समय के लिए थम गया.नीलू ने अपना बैलेंस बनाया और दोबारा सर को हलके से हिलाया जैसे सोम को इशारा कर रही हो की डाल दो अन्दर और सोम नेइसेएक इशारे के बादएक समय भी नहीं गंवाया और अपना पूरा ९ इन्च का लम्बा लंड नीलू की चूत मेंएक झटके से घुसेड दिया.
सरसराता हुआ लंड बिना किसी बाधा के पूरा जड़ तक नीलू की चूत में समां चुका था.और नीलू के मुंह से आह निकली.यस डैडी.इसके पहले भी ये दोनोंएक दुसरे के संग ज्यादा सरे रोल प्ले कर चुके थे.
लेकिन आज इसी मौके पांव नीलू के मुंह यस डैडी निकलना किसी बड़े संजोग से कम नहीं था.
या ये किस्मत का तरीका था कुछ संकेत करने का.पता नहीं क्या था.दोनों का ध्यानइसे समयइसे बात पर नहीं था.सोम ने शुरुआत से ही धक्कों की गति तेज रखी थी.
दोनों को जल्दी से झाड़ना जो था.नीलू हर धक्के पर थोडा और झुक जाती थी सामने की तरफ और सोम हर धक्के पर उसके उपर झुकता जा रहा था.
जैसे जैसे सोम के धक्के तेज होते रहे वैसे वैसे ही नीलू की आवाज भी तेज होती रही.यस डैडी गिव इट टू मी.यस डैडी फक मी.यस डैडी.आआआआआ.और सोम और तेज धक्के देता जा रहा था.और दोबारा नीलू ने कहा स्लैप मी.और सोम ने बिना किसी देरी केएक जोरदार थप्पड़ नीलू की गांड पर जमा दिया.
यह कोई प्रेम से सहलाने वाला थप्पड़ नहीं था.बल्कि गुस्से में मारा गया थप्पड़ था.
नीलू को ऐसे ही चपतपस्न्द थी अपनी गांड पर.और उसएक चपत ने उसका आनंद दुगना कर दिया.नीलू ने दोबारा से हुंकार भरी .
यस डैडी हिट मी हार्ड.और उसके पश्चात तो सोम नेएक झड़ी लगा दी थप्पड़ों की.
नीलू की गांड दो मिनट में ही लाल हो गयी.और लंड और चूत का खेल भी पुरे जोर पर था.
नीलू बार बार उसे यस डैडी कह रही थी और सोम भी उसी जोश में उसे बुरी तरह से पेल रहा था.और दोबारा दोनों ही अपनी चरम पर पहुचने वाले थे.सोम ने नीलू की छोटी को पीछे से पकड़ लिया और जोर से खीच दिया.
नीलू का सर और पीठएक आर्क शेप में मुद गयी और सोम नेएक गहरे धक्के के संग अपना पानी नीलू की बुर में निकाल दिया जहाँ उससे मिलने के लिए नीलू की बुर ने पहले ही अपने पानी का झरना बहा दिया था.
इतनी तेज चुदाई और जोरदार मारपीट के पश्चात भी दोनों थके नहीं थे.दोनोंइसे उम्र में भी ज्यादा जोश वाले थे.लेकिन इसके पहले की दोनों कुछ कहते या सोचते पीछे से सुधा की आवाज आई.
सुधा - बेटा अब आप दोनों को निकलना चाहिए.रस्ते में यदि कहीं जाम लग गया तो मुश्किल हो जाएगी.
नीलू - हाँ हम बस जाने ही वाले थे.
सुधा - ये लो तुम्हारे कपडे मैं ले आई हूँ.
सोमू बेटा तुम भी चेंज कर लो.लाओ ये सलवार कुरता मुझे दे दो नीलू और ये पेंटी भी उतर दो.
नीलू - पेंटी तो ठीक है रहने दो इतना टाइम कहाँ है.
सुधा - नहीं नहीं. उतार के जाओ.यह दूसरी वाली पहन लो.वैसे भी तुम्हारी ये थोंग वाली पेंटी मुझे बड़ी अजीब लगाती हैं.
यह तो एकदम दरार में घुस जाती हैं और दोबारा मन हो चाहे न हो रगड़ती रहती हैं अन्दर ही अन्दर.बेकार में तूफ़ान मचा देती हैं.
अभी तुम लोग अच्छे काम के लिए जा रहे हो.इसलिये ये थोंग पेंटी न पहनो तुम.यह नार्मल टाइप वाली ले आई हूँ तुम्हारि अलमारी से ये पहन लो.
सोम - तुम कहाँ रह गयी थी सुधा काकी.हम लोग कितने परेशां थे.देखो न.कितना सामन फैला हुआ था.अभी तक उसी में लगे थे.
सुधा - तुम लोग मेरी बात तो सुनते नहीं हो. वरना अब तक तो सभी हो गया होता.
चलो कोई बात नहीं.तुम जाओ.मैं इधर देख लूंगी और क्या क्या करना है.लाओ सोम तुम्हारा लंड पोंछ दूं.नीलू की बुर इतना पानी लगा देती हैइसे पर की टपकने लगता है.
नीलू - हाँ हाँ ये कहो न काकी की तुम्हें भी चूसने का मन कर गया है.
सुधा - तो क्या हुआ? सोम मेरा भी तो कुछ लगता है न?
नीलू - हाँ सुधा काकी.मैंने कब मना किया है.सोम तुम्हारा भी लगता है.हम सभी का लगता है सोम.इस पर मेरा अकेले का हक नहीं है.
हम सभी का है.तुम चूस के जल्दी से साफ़ कर लो तब तक मैं रेडी हो जाती हूँ और दोबारा हम सीधे चले जायेंगे.
सुधा काकी कौन है और इन दोनों से उसका क्या रिश्ता है.यह सभी आगे पता चलेगा.इतनी भी क्या जल्दी है.????
घर से निकल के दोनों गाड़ी में आ गए और एयरपोर्ट की तरफ चल पड़े.
उम्मीद के विपरीत दोनों ने सभी काम टाइमरहते निपटा लिए थे और उनके पास अभी भी बहुत टाइम था की वो आराम से चल के एयरपोर्ट पहुच जायेंगे.
सोम को वैसे भी तेज गाड़ी चलानापस्न्द नहीं था.दोनों बातें करते हुए एयरपोर्ट की तरफ जा रहे थे.
नीलू - जिस दिन सुबह सेएक राउंड न लग जाये मेरा बदन खुलता ही नहीं है.लगता है जैसे पुरे बदन में अकड़न सी हो.
सोम - हाँ मेरा भी वही हाल है.सुबह उठ के नाश्ता मिले या न मिले लेकिनएक बार चुदाई तो मिलनी ही चाहिए.
नीलू - सुनो वो काकी के लिए भी कुछ सामान लेना था तो मैं सोच रही थी की तुम भी संग चलते.
सोम - ऐसा क्या सामान लेना है जो मैं भी संग चलूँ?
नीलू - काकी ने ही कहा था की तुम्हें कह दूं बाकी तुम स्वयं ही समझ जाओगे.
सोम - मैं नहीं समझा.पूरी बात बताओ.
नीलू - वो दोनों बच्चे आ रहे हैं न.तो काकी ने कहा की दोनों की जांच कर लेनी चाहिए.
अभी दोनों बहुत दिनों तक घर में ही रहेंगे.या हो सकता है की अब वो हमेशा ही हमारे संग रहें.तो हमारे पास बहुत टाइमहैउन्को सभी कुछ समझा के उनकी जांच करवा लेने का.
सोम - हाँ हाँ.काकी नेएक दिन कहा तो मुझसे भी था लेकिन मैं ध्यान नहीं दे पाया.हाँ ठीक कहती हो.अभी ही सही टाइमहै.अभी दोनों को समझा देंगे तो जांच के लिए शायद मान जाएँ.लेकिन पश्चात में तोउन्को ये कहने में स्वयं हमें ही शर्म आने लगेगी.
नीलू - हाँ काकी भी यही कह रही थी की जितनी जल्दी जांच हो जाये उतना ही अच्चा है.
इससे पहले की ये बात आगे बढ़ पाती नीलू के सेल परएक कॉल आ गया.यह उसकी हीएक सहेली का कॉल था.
नीलू - हेल्लो शालू कैसी हो.
शालू - एकदम मस्त हूँ यार.तू सुना कैसी है.
नीलू - मैं भी एकदम अच्छी हूँ.और बड़े दिनों पश्चात मेरी याद आई तुझे.
शालू - नहीं याद.कई दिनों सेबाहर् थीइसलिये बात नहीं हो पाई.तू सुना क्या चल रहा है.कहाँ हो अभी तुम.?
नीलू - अभी तो एयरपोर्ट जा रही हूँ.
शालू - कोई गेस्ट आ रहे हैं क्या? नयी पार्टी ओर्गेनायिज़ कर रही हो क्या? मुझे भी बताना.बहुत दिन हो गए याद अय्याशी नहीं की.
नीलू - अरे नहीं रे पगली.मेरे बच्चे दोनों घर आ रहे हैं.उन्हें लेने जा रही हूँ.
शालू - ओह्ह .अरे वाह ये तो बड़ी ख़ुशी की बात है.
नीलू - हाँ हम लोग भी ज्यादा खुश हैं.
शालू - लेकिन यार इससे तो तुम दोनों की लाइफ एकदम बदल जाएगी.
नीलू - हाँ वो तो है.लेकिन बच्चों के संग रहने का सुख भी तो है.
शालू - हाँ सही कह रही हो.लेकिन बेचारे सोम भाईसाहब का क्या होगा.
नीलू - ये तुम उन्ही से पूछ लो. ( नीलू ने सेल स्पीकर पर कर दिया )
सोम - नमस्कार भाभी जी.
शालू - नमस्कार भाईसाहब कैसे हैं आप.
सोम- हम तो अच्छे हैं लेकिन आप तो हमें बिलकुल भूल ही गयी हैं.
शालू - अरे नहीं भाईसाहब ऐसा नहीं है.वो बस इधेर उधेर थोडा बिजी थी.और कोई बात नहीं.
सोम - ठीक है.मुझे लगा कहीं हमसे तो कोई खता नहीं हो गयी जो आपनेइसे तरह हमसे मुंह मोड़ लिया है.
शालू - अरे नहीं ऐसा कुछ नहीं है.और दोबारा कोई स्त्री आपके नीचे आने के पश्चात भला आपसे कैसे मुंह मोड़ सकती है.
नीलू - ओये मैं सभी सुन रही हूँ.मेरे पति को लाइन मत मार तू.
शालू - हाँ तो कौन सा तेरे पीठ पीछे करती हूँ.तू स्वयं ही तेल लगा के उनका लंड डलवाती है मेरी चूत में मेरी सौतन.
नीलू - सौतन मैं नहीं तू है मेरी.
सोम - हाँ हाँ दोनोंएक दुसरे की सौतन ही बनी बैठी रहना.लेकिन अब जरा दोनों स्वयं पर कण्ट्रोल रखना.
अब घर का माहौल बदलने वाला है.भाभी जी आप भी थोडा ध्यान रखना.
शालू - हाँ हाँ जरुर.आप चिंता न करें भाईसाहब.कोई परेशानी नहीं होगी मेरी वजह से.मैं धयन रखूँगा.
नीलू - बढ़िया शालू हम पश्चात में बात करते हैं. ( नीलू ने कॉल काट दिया )
सोम - शालू ने ठीक ही किया उस पुरुष से डाइवोर्स ले के.वो तो साला किसी काम का नहीं था.
नीलू - हाँ हाँ काम के तो तुम हो.शालू का नाम सुना नहीं की लार टपकाने लगे.
सोम - तो तुम क्यों जल रही हो.तुम्हें कौन सी कमी है.
नीलू -.मैं क्यों जलूँगी.जले मेरी जूती.मेरे सामने तो सौ शालू भी कुछ नहीं हैं.
सोम - अरे तुम्हारे सामने तो कोई भी कुछ नहीं है.यार बड़ा मन कर रहा हैएक राउंड और लगाने का.लेकिन हम लोग पार्किंग लोट में पहुच गए हैं.अब तो कुछ संभव नहीं है.
नीलू - संभव कैसे नहीं है.अभी फ्लाइट आने में कुछ देर होगी.और एयरपोर्ट पर बाथरूम तो हमेशा ही ज्यादा अच्छे होते हैं.आओ आज सरकार की दी गयी सेवाओं का लाभ उठायें.
हम भी तो टैक्स देते हैं.
सोम - हाँ हाँ.सही कह रही हो.अभी इतना टाइम तो है ही.मैं जल्दी से पार्क करता हूँ.
दोनों इतने में ही रेडी हो गए थे.सोम ने कुरता पायजामा पहना हुआ था और नीलू ने जीन्स और लॉन्ग शर्ट.
कार पार्क कर के दोनों जैसे ही एयरपोर्ट की लॉबी में गए वहां उन्होंने सीधा बाथरूम खोजा की किस तरफ है.
लेडीज वाले सेक्शन में जाने का प्लान था क्योंकि लेडीज बाथरूम में स्थान ज्यादा होती है.
दोनों पूरी तेज स्पीड से पैदल चल रहे थे.और एकदम मूड में थे लेकिन बाथरूम के ठीक पहले ही पीछे से सोम केएक कस्टमर ने आवाज दे दी.वो भी इधर एयरपोर्ट पर था और उसे इगनोरे नहीं कर सकता था सोम.तो दोनों को मन मसोस कर रुक जाना पड़ा उसकी आवाज सुन के.
कुछ देर इधर वहां की फॉर्मल बात होती रही और दोबारा फ्लाइट की घोसना हो गयी.
फ्लाइट आ गयी थी और कुछ ही देर में बच्चे चलते हुएबाहर् आने वाले थे दोनों के.
नीलू ने उस कस्टमर को excuse me कहा और बाथरूम के अन्दर चली गयी.सोम वही खड़ा रहा और इतनी देर में वो पुरुष भी वहां से चल गया.
तभी नीलू बहार निकली.और उसने अपने हाथ की दो उँगलियाँ सोम की तरफ कर दी.
सोम ने उसे देखा और इशारे में पुचा की क्या है.नीलू ने हलके से सिर्फ इतना कहना की चूत का रस लगा के लायी हूँ अन्दर से.चाटो.और सोम ने बिना किसी देरी के वो उँगलियाँ अपने मुंह में ले ली.
लॉबी में खासी भीड़ थी लेकिन देखने वाला कोई ये नहीं कह सकता था की नीलू की उँगलियों में क्या लगा होगा जो सोम ऐसे उसे मजे से चाट रहा है.
सोम ने उन उँगलियों से पूरा रस चाटा और दोबारा उँगलियाँ मुंह से निकल दी.
नीलू और सोम दोनों ही ज्यादा कातिल नज़रों सेएक दुसरे को देख रहे थे.और दोबारा दोनों वेटिंग वाली लाइन में आ गए जहाँ दोनों भानु और रानी का इन्तेजार करने लगे.दोनों के दिल ज्यादा तेज धड़क रहे थे.दोनों की ही अंडरवियर में आग लगी हुई थी और दोनों के अन्दर का पेरेंट्स वाला प्रेम भी जाग रहा था.
इतने लम्बे टाइमके पश्चात वो अपने बच्चों के संग रहने वाले थे.इस टाइमयह कहना मुश्किल था की दिल की ये बढ़ी हुई धड़कन उस प्रेम के कारन थी याएक दुसरे के लिए जागी हुई वासना के कारन.
रानी ने अभी हाल ही में मास कम्युनिकेशन की डिग्री पूरी की थी.उम्र पुरे २१ साल.देखने में बेहद सुन्दर और चंचल.इस उम्र में आ कर लड़कियों को सेक्स के बारे में करीब सभी कुछ मालूम हो जाता है और मौका मिलने पर वो आजमा भी लेती हैं.
रानी भी मौका चुकने वालों में से नहीं थी.
उसने भी सेक्स को आजमाया हुआ था.
लेकिन दूसरी लड़कियों में और रानी में ये अंतर था की वो इसके लिए अभी पागल नहीं हुई थी.
जैसा हम दूसरी कहानियों में देखते हैं की लड़कियां बस गीली चूत ले के चलती रहती हैं और जो भी मिल जाये उससे चुद जाती हैं रानी वैसी नहीं थी.
उसने सेक्स कम बार ही किया था लेकिन सेक्स के बारे में उसने पढ़ा ज्यादा कुछ था.
तंत्र सेक्स तक की कई सारी किताबें रानी ने ज्यादा बार पढ़ी थी.
वो किसी भी टाइमपोर्न फिल्म्स के पुरे इतिहास के बारे में बात कर सकती थी क्योंकि उसने दुनिया भर की पोर्न फिल्म्स देखि हुई थी.लड़कों को कैसा मोहित करना है इसमें भी उसे महारत हासिल थी.
यहाँ तक की वो लड़कियों के संग भी सेक्स करने से परहेज नहीं करती थी.
लेकिन इसका मतलब ये नहीं था की कोई भी उसे चोद सकता था.
वो ज्यादा सेलेक्टिव थी अपने सेक्स पार्टनर्स के बारे में और शायद इसीलिएइसे जवान उम्र में भी उसने सिर्फ कुछ ही बस किसी लड़के के संग सेक्स का एहसास किया था.
वो सेक्स के बारे में सोचती ज्यादा थी.उसके अपने सपने सेक्स के बारे में ज्यादा जंगली स्टाइल के होते थे.और उसी तरह का सेक्सपस्न्द था.
रानी सेक्सी दिखने की लिए नंगी होना जरुरी नहीं समझती थी.
जैसा की आप पिक्स में देख रहे हैं उसकी पोषक हमेशा ही ज्यादा शालीन और सुन्दर होती थी.हाँ ये बात भी है की रानी हमेशा ही फिटिंग के कपडे पहनती थी.
उसे बदन को नंगा कर के दिखाना पसनद नहीं थी लेकिन वो अपने बदन की बनावट को कपडे के उपर से भी ज्यादा अच्छे से नुमाईश कर सकती थी.और वो यही करती थी.
सलवार कुरता भी पहनती तो उसमे सलवार इतनी ज्यदा टाइट होती थी की ध्यान से देखने पर गांड का शेप ज्यादा अच्चा दीखता था.
कुरता हमेशा ही गहरे गले का होता था.शरीर से चिपका हुआ.लेकिन वो दुपट्टा हमेशा से ज्यादा सलीके से ओढ़ती थी जिससे की सिर्फ ये अंदाजा लगता था की इसकी चूचियां बड़ी बड़ी हैं लेकिन चूची नंगी हो के नहीं दिखाती थीं.
रानी को यहीपस्न्द था.उसे लड़कों में आग लगा देना बहुतपस्न्द था.
अगर आप ये सोच रहे हैं की बस अब तो रानी घर में आ गयी है और अब वो पहले ही दिन से रंडी बन के रहेगी और पहले अपने बाप से दोबारा भाई से चुदेगी तो आप गलत सोच रहे हैं.
रानी के दिल में अपनी फॅमिली के लिए ज्यादा प्रेम था और वो कभी अपनी हवास मेंउन्को हिस्सेदार बनाने के सपने नहीं देखती थी.
तो ये न सोचें की अब बस अगले ही दिन से घर में खुल्लम खुल्ला चुदाई शुरुआत होने वाली है.
हमारी रानी अपने रंग में आ जाये तो ज्यादा बड़ी रंडी है लेकिन वो इतनी आसानी से अपने रंग में नहीं आती है.उसे उकसाना ज्यादा ही मुश्किल काम है.
लेकिनएक बार रानी को चुदास चढ़ जाये तो दोबारा वो सभी कुछ भूल जाती है.फिर उसे कुछ दिखाई नहीं देता सेक्स के सिवा.
एक बार उसके बॉयफ्रेंड ने उसे गर्म कर दिया और वो जैसे ही चुदाई करने को हुए वो झड गया.
रानी ने उसे दोबारा से रेडी करने की ज्यादा कोशिश की लेकिन उसका लंड ही नहीं खड़ा हुआ.
रानी ने उसे तीन चार थप्पड़ रसीद किये और बहार भगा दिया.प्यार अपनी स्थान है लेकिन जब सेक्स का टाइम हो तो प्रेम नहीं बल्कि जंगली वासना की पुजारिन है रानी.
उसे गर्म करने के पश्चात यदि शांत नहीं किया गया तो वो किसी नागिन की तरह हो जाती है.और तब तक लंड के लिए तरसती रहती है जब तक उसकी ठोक के चुदाई न कर दी जाए.
घर लौटने के बारे में रानी भी ज्यादा खुश थी.
कई दिनों से उसका कोई यार नहीं था अय्याशी करने के लिए.अपने आखिरी दिनों में वो काम में और अपनी पढाई में ही इतनी ज्यदा उलझी हुई थी की उसे ये सभी करने की फुर्सत ही नहीं मिली.
अपने घर आते टाइमवो रस्ते भर यही सोच रही थी की देखती हूँ वहां शायद कोई मिल ही जाये मजेदार आदमी.
रानी ने अभी तक सिर्फ लड़कों और लड़कियों के संग ही जवानी का भोग किया था.और इधेर कुछ टाइमसे उसके मन में किसी बढ़िया तगड़े मर्द या अनुभवी स्त्री के संग कुछ करने की इच्छा होने लगी थी.
इसकी वजह तो कुछ खास नहीं थी.वो बस सेक्स में कुछ नया करना चाहती थी.
दूसरा परिचय भानु का.अपनी बहन के विपरीत भानुएक नंबर का हरामी था.
भानु इतना बड़ा वाला हरामी थी की कोई कुतिया भी उसके सामने गर्म हो के आ जाये तो उसे भी छोड़ने में भानु को कोई दिक्कत नहीं होगी.
इसे भगवन की दें ही समझिये की भानु को लड़की को देख के ही भानु कोएक फीलिंग सी हो जाती थी की कौन सी लड़के चुदासी चल रही है.और दोबारा वो उसी पर डोरे डालने लगता था.
भानु को प्रेम मुहब्बत से कुछ लेना देना नहीं था.उसका भी यही सोचना था की प्रेम इश्क ये सभी फ्री में चुदाई करने के बहाने हैं और कुछ नहीं.
रानी तो सेक्स में ज्यादा सेलेक्टिव थी लेकिन भानु के संग ऐसा कुछ नहीं था.वो तो बस जो मिल जाये जहाँ और जैसे मिल जाये चूत मरने में यकीन रखता था बस.यही कारन था की जवान होने से ले के अब तक के दो तीन सालों में उसने अनगिनत औरतों लड़कियों के संग सम्बन्ध बना लिए थे.
भानु बदन से ज्यादा कोई फिल्म स्टार जैसा नहीं था.औसत कद था.साधारण काठी थी.जैसा हम इन कहानियों में पढ़ते हैं की १० इन्च का हलाबी लंड था वैसा लंड भी नहीं था उसके पास.
उसका लंड मुश्किल से ६ इन्च का था बस.लेकिन मोटा ज्यादा था और सबसे खास बात तो ये की भानु को अपने लंड पर गजब का कण्ट्रोल था.
वो चाह ले के अभी लंड खड़ा नहीं करना है तो बड़ी से बड़ी रंडी भी उसके सामने नंगी नाच के मर जाएगी लेकिन भानु का लंड खड़ा नहीं होगा.
और यदि भानु सोच के अभी उसे झाड़ना नहीं है तो दोबारा ज्यादा बहुत देर लगातार चुदाई करने के पश्चात भी न तो थकता था और न ही उसका लंड झाड़ता था.
हम पोर्न मूवी में देखते हैं की बड़े बड़े लंड वाले ही असली मर्द होते हैं.
लेकिन भानु को अपने उस औसत कद के लंड पर भी ज्यादा यकीन था.और होता भी क्यों नहीं.उसने अपने इसी लंड से कई सारी चूतों को ठंडक पहुचाई थी.
वो तो बस घर पहुचने के इन्तेजार में था.उसे यकीन था की इधर भी वो अपने लिए चूत ज्यादा जल्दी खोज लेगा.
भानु और रानी दोनों हीएक ही शहर में रहते थे लेकिनएक संग नहीं रहते थे.
पहले दोनों नेएक संग हीएक फ्लैट किराये पर लिया था लेकिन जैसे जैसे दोनों अपनी सेक्स लाइफ में एक्टिव होते गए दोनों के लिएएक ही स्थान पर रहना थोडा मुश्किल होने लगा.
शुरू शुरुआत में तो दोनों ने उसमे भी एडजस्ट करना चाह लेकिन वो संभव नहीं हुआ.
पहले पहले कई बार रानी अपने बॉयफ्रेंड को अपने फ्लैट ले आती थी या भानु अपनी किसी मित्र को अपने संग ले आता था लेकिन अगली सुबह दोनों के लिएएक दुसरे से आँख मिलाना थोडा मुश्किल हो जाता था.
दोनों ही जानते थे की कल रात को उन्होंने क्या किया है और अपने घर में वो ज्यादा शरीफ समझे जाते हैं लेकिन उनकी हकीकत कुछ और है.
हालाँकि दोनोंएक दुसरे की सेक्स लाइफ को ले के ज्यादा कूल थे लेकिन दोबारा भी थे तो दोनों भाई बहन ही.
कितना भी कूल क्यों न हो जाएँ लेकिन रिश्ता जो है वो तो रहेगा ही.और फिरएक दिन दोनों ने ही सोचा की सेक्स को छोड़ नहीं सकते और ऐसे झिझक में रह कर भी आनंद नहीं आएगा तो भानु ने अपने लिए नया फ्लैट किराये पांव ले लिया था.पैसों की तो कमी थी नहीं.उसने नया फ्लैट भी पास ही में लिया था.और अक्सर वो रात का खाना रानी के संग उसके फ्लैट पर ही खता था.
दोनों में अक्सर खुल केर ये भी बात होती थी की आजकल उनकी सेक्स लाइफ में क्या चल रहा है.लेकिन उसमे भीएक सलीका अभी भी बरकरार था.
सोम और नीलू कम से कमइसे बात पर गर्व कर सकते थे की उनके दोनों बच्चे नंबरएक के चुदासे होने के पश्चात भी अपने रिश्ते का ख्याल रखते थे.
भानु तो शुरुआत से ही थोडा लापरवाह थाइसे मामले में.और तीन बार उसने अपनी मित्र को पेट से भी कर दिया था.
उस टाइमरानी ने ही औषधीय प्रॉब्लम ठीक करवाई थी.और भानु का संग दिया था.
और बार बार उसे हिदायत भी देती रहती थी की जरा कंडोम लगा लिया करो.नहीं तो किसी दिन कोई गोद में दे देगी ये कह के की लो अपने बच्चे लो पालो.
भानु भी उसकी बात को हमेशा
गंभीरता से लेता था.घर आने के पहले दोनों के बीचइसे बारे में भी बहुत बात हुई थी की अब घर में जा के ये सभी अय्याशी बंद कर देनी होगी.यह भी अजीब इत्तेफाक ही था की वहां इनके पेरेंट्स इसी बात को ले के चिंतित थे और इधर उनके बच्चों को भी अपनी अय्याशी बंद होने की बड़ी चिंता थी.खैर.अब तो घर पहुच ही गए थे.
कुछ न कुछ रास्ता खोज निकालने की उम्मीद इन दोनों को भी थी.
दोनों ही बच्चे अपनी मम्मी से ज्यदा क्लोज थे.ऐसा तो हर घर में होता है की मम्मी ही घर का आधार होती है.
रानी अपनी लाइफ की हर बात अपनी मम्मी से शेयर करती थी.और इशारों इशारों में ही उसने नीलू को बता दिया था की उसकी सील टूट चुकी है.और भानु ने भी ऐसा कारनामा कर लिया है ये बात भी नीलू को रानी ने ही बताई थी.लेकिन दोनों मेंइसे बात को ले के कोई बहस नहीं हुई थी और ना ही दोनों गंदे तरीके सेइसे बारे में बात करती थीं.
जैसे पेरेंट्स बाकि बातों के बारे में बच्चों को सलाह देते हैं वैसे हीइसे मामले में नीलू ने सिर्फ इतनी सलाह दी थी की कोई परमानेंट नुक्सान नहीं होना चाहिए और दोनों अपनी सेहत का ख्याल रखना.रानी ने जब ये बात भानु को बताई तो उसे ज्यादा अजीब लगा की उसकी मम्मी जानती है की वो कितना बड़ा चुदासा लड़का है और जो अपनी से बड़ी बड़ी उम्र की औरतों की चूत में भी घुसने से परहेज नहीं करता.
हाँ रानी ने अपने बारे में इतनी ज्यादा जानकारी नहीं दी थी.उसने ये नहीं बताया था नीलू को की वो जब चुदना चाहती है तो उसे घोड़े का लंड भी कम लगने लगता है.
गन्दी जोरदार और दर्दनाक चुदाई का शौक शायदइसे पुरे घर के खून में ही था.
अभी वो सबइसे बात से अनजान थे लेकिन जबएक ही छत के नीचे रहना हो तो ज्यादा दिन तक ज्यादा बातें छुपी नहीं रहती.
वहां एयरपोर्ट पर जब सबका मिलन हुआ तो सभी ज्यादा बहुत खुश हुए.
जैसा की औरतों के संग होता है.नीलू और रानी तो थोडा भावुक भी हो गए और उनकी आँखें भी भर आयीं थीं.
सब गाड़ी में बैठ के घर आ गए थे.घर में आते ही सबसे पहलेउन्को उनके अपने अपने रूम दिखा दिए गए और घर के बाकि सिस्टम के बारे में बता दिया गया.
घर में सबसे ज्यादा काम सुधा काकी के हाथ से ही होते थे.वो भी बच्चों को अपना ही मानती थी.और
बच्चे भी उसे काकी ही कहते थे.
हालांकि रिश्ता दादी का था लेकिन उसे सभी काकी ही कहते थे.
घर के बाकी स्टाफ से भीउन्को मिलवाया गया.भानु ने नोटिस किया की घर में मर्द स्टाफ सिर्फ दो ही हैं.बाकी सभी औरते हैं और सभी औरतें बदन के मामले में बड़ी टाइट हैं.
उस टाइमउसने शायद ये न सोचा हो की इन औरतों केइसे बदन का घर में कौन कौसे उपयोग करता है.
घर के बाकि हिस्सों को देख के पता लगा की उपर वाले फ्लोर मेंएक अलग से बाथरूम बनाया गया है जिसमेएक बड़ा साइज़ का जकुजी लगा हुआ है.
घर के चरों तरफ लॉन है और सेफ्टी के नजरिये से घर के कई हिस्सों में कैमरा लगे हुए हैं.
भानु सभी चीजें ज्यादा गौर से देख रहा था और रानी कोइसे सभी पर कोई रूचि नहीं थी.वो बस देख रही थी की घर में क्या क्या है.
दोनों इसी घर में पैदा हुए थे लेकिन बचपन के ज्यादा कम दिनइसे घर में बीते थे दोनों के.
कुछ बातचीत होने के पश्चात सभी अपने अपने कमरे में गए.यह तय हुआ की सभी नाहा धो के कुछ देर पश्चात खाने की टेबल पर मिलेंगे.रानी और भानु अपने कमरे में आ गए और सोम और नीलू अपने बेडरूम में.
नीलु - अभी तक तो सभी ठीक ही हो रहा है.
सोम - हाँ. तुम तो बेकार ही इतना परेशां हो. अरे सभी ठीक होगा.बच्चे समझदार हैं.
नीलू - हाँ वो तो हैं ही.अच्चा वो एयरपोर्ट पर कौन अपनी मम्मी चुदा रहा था?
सोम - हाँ वो ऐसे हीएक बन्दा था.कोई खास नहीं था.
नीलू - लेकिन साले ने ज्यादा गलत टाइम पर डिस्टर्ब किया था. पता है मैं एकदम गीली थी.
उस टाइमसोच रही थी की आज तुम्हें लेडीज टॉयलेट में घुसा के तुमसे रगड़ के चुद्वौंगी.
सोम - हाँ गर्म तो मैं भी था.लेकिन अब क्या करता.उसने रोक लिया तो मुझे एकदम चले पहुँचना ठीक नहीं लगा. पता नहीं हमारे बिसनेस में कौन कब कैसे काम आ जाये,.
नीलू - हाँ ठीक ही किया तुमने.अब चलो नाहा लेते हैं.
सोम - संग में??
नीलू - हाँ. क्यों?
सोम - और बच्चे?
नीलू - उनका क्या?
सोम - अरे किसि ने आवाज लगा दी तो? क्या कहेंगे की हम दोनोंएक संग नाहा रहे थे?
नीलू - दोनो अपने अपने रूम में हैं.कोई नहीं आएगा.तुम लेट मत करो आ जाओ जल्दी से.
सोम - रुको मैं काकी को कह देता हूँ.
नीलू - ओके.मैं तब तक बाथरूम में तुम्हारा इन्तेजार कर रही हूँ.
सोम - हाँ.मैं अभी आता हूँ.तुम नंगी हो जाओ तब तक.
सोम अपने कमरे से बहार आता है और काकी के कमरे की तरफ जाता है.काकी उसी टाइमअपने कमरे में कुछ काम कर रही थी और टेबल पांव झुकी हुई थी.
सोम जब अन्दर दाखिल हुआ तो उसे काकी की उभरी हुई गांड देखने को मिली.सारी के उपर से भी बड़ी बड़ी गोल गोल दिख रही थी.वो काकी के पास गया और उसकी गांड के उपर से ही अपना लंड चिपकता हुआ उस पर झुक गया.काकी समझ गयी.
सुधा- क्या हुआ बेटा?
सोम - कुछ नहीं काकी.मैं और नीलू नहाने जा रहे हैं.तुम जरा ध्यान रखना.
सुधा - संग में नहाओगे?
सोम - हाँ काकी.
सुधा- नंगा नंगी हो के नहाओगे दोनों लोग?
सोम - हाँ काकी.
सुधा - वो तुम्हें साबुन लगाएगी तुम उसे लगोगे?
सोम - हाँ काकी.
(इसे बात के दौरान वो दोनों ऐसे ही टेबल पांव झुके हुए थे और सोम सारी के उपर से ही काकी की गांड के उपर अपना लंड घिस रहा था जो अब अपनी फुल साइज़ में खड़ा हो चुका था)
सुधा- साबुन लगा के दोनों रुक थोड़ी न जाओगे.तुम तोएक दुसरे को रगडोगे भी न?
सोम - हाँ काकी.हाँ.
सुधा- तू पीछे से लेगा या आगे या?
सोम - पीछे से काकी.पीछे से लूँगा.
सुधा - हाय मेरा बेटा कितनी मेहनत करता है.जा जा के नाहा ले.रगड़ ले अपनी पत्नी को.जा
सोम- चिंता मत करो काकी जल्दी ही तुम्हारा नंबर भी आएगा.
सुधा- मुझे
- मुझे क्या चिंता होगी रे.तुम दोनों हो न मेरा ख्याल रखने को.
अब जा मुझे पता है नीलू अब तक तो नंगी हो के तेरा वेट कर रही होगी.
सोम - हाँ काकी.जाता हूँ.तुम अपना ध्यान रखना.औरदेख्ना बच्चे हमें पूछें नहीं.
सुधा- हाँ मैं देख लूंगी.लेकिन तुम लोग ज्यादा देर मत लगाना.
सीधे चुदाई शुरुआत करना.हमेशा की तरह चूसा चासी मत करते रहना घंटे भर.सीधे चूत पर हमला करना लंड से.समझ गया न मेरा रजाबेटा.
सोम - हाँ काकी.हम लोग बस जल्दी हीबाहर् आ जायेंगे.
सोम काकी के कमरे सेबाहर् आ गया.काकी को भी अब जल्दी ही अपनी सारी ठीक करनी थी.
जो की उपर से सोम के रगड़ते हुए लंड के कारन थोडा खुल गयी थी.उसे स्वयं को कण्ट्रोल करना था जिससे बच्चों को कुछ अजीब न लगे.उधर सोम भी जल्दी तेज गति से भाग के अपने रूम के बाथरूम में गया.जहाँ नीलू पहले ही गीली चूत ले के उसका वेट कर रही थी.
सोम के आते ही उसने चिद के कहा.मुझे पता था तू काकी को घिस के आएगा.
अब आ जा जल्दी से कब से पानी बह रहा है मेरी चूत का.आ घुस जा मेरे भोस में.और दोबारा दोनों की काम लीला शुरुआत हो गयी.
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नीलू और सोम ने बाथरूम में चुदाई करने में ज्यादा देर नहीं लगायी.
इसके पहले बड़े सरे रोमांचक काम ये लोग कर चुके थे.लेकिन कभी ये आनंद नहीं लिया था.बच्चों के हाथों पकडे जाने का डर.
अपने आप में ये भी बड़ी चीज होती है.लगभग हर कपल शादी के पश्चात और खासकर बच्चे होने के बादइसे डर से गुजरता है.
सेक्स करने का मन तो होता ही है लेकिन ये खटका भी लगा रहता है की कहीं बच्चे न आ जाएँ.कहींउन्को कुछ गलत न फील हो.कहीं ऐसा न हो की वो कुछ पूछ बैठें.
इस तरह के डर दूसरों की जिंदगी में तो आम ही होते हैं लेकिन नीलू और सोमइसे डर से अनजान थे.
जब से उनके बच्चे कुछ जानने समझने लायक हुए तब से वोबाहर् रहे और इन दोनों को चुदाई में कभी कोई दिक्कत नहीं आई.
आज जब पहली बार वो दिक्कत इन्हें पेश आई तो ये समझ नहीं पा रहे हैं की क्या कैसे करना है.
जैसे अभी इसी बार की बात है की नीलू तो खुलकर चुदने को तैयार थी लेकिन सोम की गांड फटी जा रही थी.खैर.जैसे तैसे दोनों नेएक राउंड ख़त्म किया.
नीलू ने तो कह भी दिया की उसे जरा भी आनंद नहीं आया.सोम ने भी माना की हाँ सेक्स में जरा भी आनंद नहीं आया.लेकिन और करने की फुर्सत नहीं थी.दोनों जल्दी जल्दी तैयार हो केबाहर् आ गए.
खाने की टेबल पर पहुचे तो काकी वहां पहले से ही मौजूद थी.लेकिन भानु और रानी का कहीं अता पता नहीं था.
नीलू ने काकी से इशारे में पुचा तो काकी ने कहा की दोनों अभी भी अपने अपने कमरे में हैं.
नीलू ने दोनों को उनके सेल पर कॉल किया.आजकलएक ही घर में रहने वालेएक दुस्सरे के कमरे में नहीं जाते बल्कि फ़ोन पर बात कर लेते हैं.दोनों ने कहा की वो लोग जल्दी ही नीचे आ जायेंगे.
तब तक सुधा भी नीलू और सोम के संग टेबल पर बैठ चुकी थी.
सुधा - क्या हुआ??
नीलू- जरा भी आनंद नहीं आया.
सुधा - क्यों गांड फट रही थी क्या बच्चों के ख्याल से?
नीलू- हाँ तुम्हें कैसे पता चला काकी?
सुधा- ये तो हरएक के संग होता है.जब मैं तुम्हारी उम्र की थी तो मेरी भी ये हालत होती थी.रात में लगता था की कर लूं और ये डर भी लगता था की बच्चे न जग जाएँ.
सोम- तो कैसे करती थी फिर?
सुधा- तुम्हारे काका बड़े जालिम पुरुष थे.
सारी रात सोते और सुबह ४ बजे उठ जाते.
कहते हैं उस टाइममें सबसे गहरी नींद लगती है.और उसी टाइममें जब घर के सभी लोग गहरी नीन्द में सो रहे होते तो तेरे काका जी भर के लेते थे मेरी और मैं भी मजे से देती थी क्योंकि धीरे-धीरे धीरे मुझे भी पता चल गया था कीइसे टाइममें सच में कोई जाग नहीं रहा होता. सबसे ज्यादा गहरी नींद सोते हैं.और दोबारा जहाँ चाह वहां राह.अगर लेनी है तो दोबारा लेनी है.रास्ता अपने आप मिल जाता है.
सोम- अरे अब वो दिन नहीं रहे.अब तो बच्चे सारी सारी रात जागते हैं.
कब कौन क्या सुन लेगा कुछ पता नहीं.
नीलू -हाँ . मेरीएक सहेली के संग तो प्रॉब्लम हो गयी थी. वो सोचती की रत में घर के सभी लोग सो रहे हैं और जब वो अपने पति से चुदाई करती थो उसका देवर उसका विडियो बना लेता था.
सुधा- पता नहीं तुम लोग पढ़ लिख के कुछ सीखे भी हो या तुम्हारा कॉमन सेंस भी ख़त्म हो गया है.
नीलू - क्यों???
सुधा- मैं ये नहीं कह रही की सुबह चार बजे उठ के करो.लेकिन यदि खोजना चाहोगे तो रास्ता मिलेगा न.ऐसे हाथ पर हाथ रख के न बैठो.
सोम- अरी अभी तो सभी ठीक है.देखना कुछ दिन मेंएक नएक रूटीन बन जायेगा दोबारा ये सभी दिक्कत न आएगी.
सुधा- देखते हैं.वैसे मेरी तरफ से जब भी कोई भी हेल्प चाहिए हो तो बता देना.
उधर दूसरी तरफ भानु का शैतानी दिमाग भी अपने काम में लगा हुआ था.
आजकल टेक्नोलॉजी इतनी ज्यादा बढ़ गयी है की कोई सही तरीके से उसका उपयोग करना जनता हो तो उसके लिए कुछ भी करना ज्यादा आसन हो जाता है.
भानु की नजरें अपने घर के स्टाफ पर टिक गयी थीं.
एक सेएक बढ़कर औरतें और सभी की सभी गुदाज बदन वाली.जिन्हें मसल मसल के जिंदगी का असली सुख मिल सकता है.
भानु को तो वैसे भी हर उम्र की लड़की और स्त्री में दिलचस्पी रहती थी.तो जाहिर सी बात है वो इधर भी कुछ वैसा ही सोच रहा था.
उसने सबसे पहले ये प्लान बनाया की जैसे फिल्म्स में होता है वो सिक्यूरिटी वाले कैमरा का फीड किसी तरह से हासिल करेगा.और घर के स्टाफ की औरतों पांव नजर रखेगा.
शायद कहीं से कुछ बात बन जाये तो उसेबाहर् कुछ खोजना नहीं पड़ेगा.घर में ही काम चल जायेगा.
फिर उसे यद् आया की सभी नीचे वेट कर रहे होंगे.
और रानी की सोच अभी तक सोयी हुई थी.वो तो बस घर आ के खुश थी.उसे अपना सामन थोडा ज्यादा खोल लिया था और अपने रूम को देख के ये सोच रही थी की उसे कैसे सजाना है.
उसके दिमाग में अभी सेक्स के बारे में कोई ख्याल नहीं चल रहा था.
वैसे भी सेक्स का चौबीस घंटे वाला कीड़ा भानु के दिमाग में था.रानी के दिमग में नहीं.
रानी ने भी सोचा की पहले नहा के नीचे चलते हैं.अब तो घर पर ही हैं तो बाकी का काम आराम से करते रहेंगे ऐसे भी क्या जल्दी है.
दोनों अपने अपने कमरे से नहा के कुछ देर में नीचे आ गए.तब तक सुधा नीलू और सोम अपने लिए आगे का कुछ बंदोबस्त सोचने में लगे हुए थे.
बच्चों को आते देख के वो लोग चुप हुए और टॉपिक चंज कर दिया.
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अगलेएक दो दिन तो आराम से ऐसे ही बीत गए.बच्चों को अपने लिए कुछ कुछ सामन लेना था और चूँकि वो बाजार नहीं जानते थेइसलिये सोम उनके संग बराबर रहा और उनकी खरीदारी करवाता रहा.
भानु अपना लैपटॉप तो ले के ही आया था लेकिन संग ही उसनेएक कंप्यूटर और ले लिया नया.और रानी ने अपने लिए तो कुछ नहीं लिया पर अपने कमरे के लिए बहुत सामान लिया.
फिरएक दिन नीलू की कुछ सहेलियां उसके घर आयीं.सोम उस टाइमअपने ऑफिस में था.रानी अपने कमरे में और भानु अभीबाहर् गया हुआ था.
काकी और नीलू उन सहेलियों को ले के नीलू के कमरे में आ गए थे.काकी उन लोगों के लिए चाय पानी लेने चली गयी.
इंदु - और सुना नीलू तू तो एकदम गायब ही हो गयी यार.
नीलू - अरे नहीं ऐसी कोई बात नहीं. बस बच्चे कुछ ही दिन पहले आये हैं तो उन्ही के संग बिजी थी.
इंदु - हाँ हम लोग तो भूल ही गए थे.तुम लोगों को कभी बच्चों के संग नहीं देखा न.
नीलू- हाँ वो भी पहले बार ही हम लोगों के संग रह रहे हैं.
रीति - तो अब तुम्हें पता चलेगा की हम लोगों की जिंदगी कैसी होती है.
नीलू - क्या मतलब?
इंदु - हाँ और क्या.जब देखो तुम लोग घर में अय्याशी करते थे और हम लोग तुम्हें देख देख जलते थे.अब तुम्हारी भी अय्याशी बंद.
नीलू - अच्चा? क्यों बंद?
रीति - अरे बच्चू अभी तुम्हारी जवानी की हवा निकालनी शुरुआत होगी.तुम बस देखती जाना.
जबएक एक किस के लिए तर्सोगी.जैसे हम लोग तरसते हैं.कहीं कोई देख न ले.कहीं दाग न लग जाये.तुम भी अब ये सभी सोचोगी.
नीलू- मैं कुछ नहीं सोचने वाली ऐसा.देखना मैं तो वैसी ही रहूंगी जैसी पहले थी.
इंदु= ये तो कहने की बातें हैं.वक़्त ही बताएगा.अच्चा सुन वो फार्महाउस वाला ग्रुप कब हो रहा है? बड़े दिन हो गए यार कुछ अरेंज कर न अच्चा सा.
नीलू - हाँ सोचती हूँ उसके बारे में कुछ.बहुत दिन हो गए हमारी पूल पार्टी नहीं हुई.वैसे तुम लोग सुनाओ क्या चल रहा है आजकल.,.
इंदु - कुछ खास नहीं यार.मेरे पति को किसी ने लंड फुलाने की मशीन दे दी
है और कहा है की इससे उनका लंड फूल के दोगुना हो जायेगा.तो पूरी पूरी उसी मशीन में लंड डाल के बैठे रहते हैं.
नीलू- हा हा हा हा.सच में?
इंदु- हाँ यार.उन्हें हमेशा से ही अपने नार्मल साइज़ के लंड से दिक्कत रही है.क्या क्या इलाज नहीं किया.लेकिन तू ही बता लंड की लम्बाई और चूत की गहराई ऐसे बढती है क्या कहीं.
नीलू - हाँ सही कह रही है. लेकिन अब वो कर ही रहे हैं तो कर लेने दे न.और तू सुना रीति तेरा पुरुष क्या गुल खिला रहा है आजकल.
राती - मेरा वाला तो पिचले दो हफ्ते से टूर पर है.आजकल अपने ऑफिस के दो बन्दों से काम चल रहा है.
एक तो अभी बस २२-२३ वर्ष का होगा.हरामखोर से बनता कुछ नहीं है लेकिन झूमता ऐसे है की खा जायेगा.पता है उसके संग सेक्स करने में प्यास तो नहीं बुझती लेकिन कॉमेडी होती है तो आनंद तो आ ही जाता है.
नीलू- ऐसी क्या कॉमेडी होती है?
रीति - अरे ये आजकल के फुस्सी लौंडे साले.किसी काम के तो होते नहीं.स्टेमिना होता नहीं है लेकिन सभी ब्लू फिल्म देख देख के अपने आप को हीरो समझने लगते हैं.
कहता है नया नया पोस बना के करेंगे.मैंने कहा ठीक है बेटा देखती हूँ कितनी ताकत है.
वो मुझे अपने उपर बैठ के कूदने को कह रहा था.मैं भी उसके लंड पर ऐसा फंसा फंसा के कूदी और उसकी गोटियों में ऐसे जोर जोर के झटके दिए की साले से खड़े होते नहीं बन रहा था.
बात तोएक हजार की तय हुयी थी लेकिन मैंने उसे दो हजार उपर से और दे दिए.बेचारे के गोते शोर्ट कर दिए मैंने.
इंदु - तू साली रहेगी छिनाल की छिनाल ही.वो तेरे बगल वाले अंकल का क्या हुआ?
रीति - वो तो बस उपर से छू के ही नहर बहा देता है. उसका क्या होगा ?एक दिन मैंने कहा की अंकल लोगे क्या? आ जाओ आज ज्यादा गीली हूँ.
उस दिन के पश्चात से आज तक तो वो दिखा नहीं मुझे.
इंदु - लेकिन तू तो कहती थी वो तुझे देख देख के लंड घिसता है.
रीति - हाँ तो उतना ही करने के लायक है वो. उससे ज्यादा का उसमे दम नहीं था. मैंने खुल्ला न्योता दे दिया तो उसने तो वो गली ही छोड़ दी.
तीनो सहेलियांएक नंबर की चुदासी औरतें थी.और सबके पति ज्यादा अमीर थे.
नीलू उन सबकी बॉस जैसी थी.सब उसी के पास आते थे.और उन लोगों के ग्रुप सेक्स की पार्टी हमेशा ही नीलू ही प्लान करती थी.
यह लोग बहुत देर तक बैठे रहे और दोबारा अपने अपने घर चले गए.अब काकी और नीलू अकेले थे.
काकी ने इशारे में कहा की रानी अपने कमरे में है.और दोबारा उठ के वो बाथरूम की तरफ चल दी.
नीलू ने भी देर नहीं की और वो भी उसी तरफ चल दी.काकी ने अन्दर आते ही अपनी सारी को उपर करना शुरुआत किया और उसकी सारी पूरी उसकी कमर तक आ गयी.
काकी की उम्र बहुत है.करीब करीब ६० वर्ष की है काकी लेकिनइसे उम्र में भी वो स्वयं को ज्यादा सजा के रखती है.इस बात का इससे बड़ा सबूत और क्या होगा कीएक घरेलु स्त्री जिसकी उम्र ६० वर्ष की है उसकी चूत मेंएक भी बाल नहीं है.झांट एकदम साफ़ है.
चिकनी और वो पूरा हिस्सा भी काला नहीं पड़ा हुआ है.मेरे जिन भाइयों को नहीं पता हैउन्को बता दूं की हम औरतों के उस कोमल हिस्से की बार बार शेविंग करने से वहांएक कालापन आ जाता है.
इसलिए वहां से हेयर रिमूव करना ज्यादा फायदेमंद होता है.लेकिन रेजर का उपयोग ज्यादा आसन होता है.खैर.अगर आगे किसी स्त्री की चूत परइसे तरह का कालापन दिखे तो उसे गन्दी मत समझना.बल्कि वो लगातार बाल साफ़ करते रहने के कारण होता है.
हाँ तो काकी का वो नाजुक हिस्सा अभी भी उतना ही नाजुक था.
उतना ही कोमल था.नीलू ने भी अपनी जीन्स नीचे केर दी थी और अपनी पेंटी भी सिरका दी थी.
काकी ने तो पेंटी पहनना ही कब का बंद कर दिया था.दोनों ने अपनी अपनी टाँगे थोडा सा झुका ली और अपनी चूत के अन्दर दो दो ऊँगली डाल
दिन.
लेकिन ऐसा वो लोग अपनी चूत में ऊँगली करने के लिए नहीं कर रहे थे.बल्कि अगले ही समय उन्होंने अपनी उँगलियाँबाहर् निकालनी शुरुआत केर दी.
औरइसे बार उन दोनों की ही उँगलियों में फंसा हुआ कुछ उन दोनों की ही चूत सेबाहर् आ रहा था.
गरम मौसम में आप लोगों ने ककड़ी बिकते हुए देखि होगी.
एक तो मोटा खीरा होता है औरएक पतली ककड़ी होती है.
वैसी हीएक एक ककड़ी इन दोनों ने अपनी अपनी चूत के अन्दर डाली हुई थी.करीब ४ इंच लम्बी औरएक इंच मोती उस ककड़ी ने उनकी चूत में जरुर खूब घमासान मचाया होगा.क्योंकि जब वो ककड़ी चूत से बहार निकली तो उन दोनों के रस से एकदम भीगी हुई थी.
दोनों ने हौले हौले वो ककड़ी अपनी अपनी चूत सेबाहर् निकाली ताकि कहीं वो ककड़ी अन्दर ही ना टूट जाये.और दोबारा दोनों ने अपनी अपनी चूत की ककड़ी बदल ली.
नीलू वो ककड़ी खा रही थी जो ज्यादा देर से काकी की चूत में थी और काकी वो ककड़ी खा रही थी जो ज्यादा देर से नीलू की चूत में थी.
उधर दूसरी तरफ अब भानु और रानी भी थोडा थोडा बेचैन होने लगे थे.हालांकि अभी उनकी बेचैनी इतनी बड़ी नहीं हुई थी की उसके लिए वो कुछ करने की सोचते लेकिन जब चिंगारी जल जाये तो उसे आग बन्ने में ज्यादा देर नहीं लगाती.
और दोनों के बदन में चिंगारी तो जल ही चुकी थी.
एक रात भानु को नींद नहीं आ रही थी तो वो निकल कर छत पर आया.उसने सोचा था की कुछ देर इधर ठंडी हवा खायेगा दोबारा सोने चला जायेगा.
उसके लिए बिना सेक्स के इतने दिन रहना बड़ा मुश्किल था.उसे पता नहीं था की रानी पहले से ही छत पर थी.
वो जैसे ही उपर आया उसके रानी को वहां पर टहलता हुआ पाया.रानी नेएक टी शर्ट और उसके नीचे छोटे से शॉर्ट्स पहने हुए थे.
उसने ब्रा नहीं पहनी थी और पेंटी भी वो नहीं पहना कर्री थी रात में.भानु भी वहां अपने टी शर्ट और शॉर्ट्स में ही आया था.
भानु - इधर क्या कर रही है?
रानी - नींद नहीं आ रही थी सो थोड़ी देर के लिए उपर आ गयी.तुझे भी नहीं आ रही?
भानु - हाँ यार.बड़ी बोरियत सी हो रही है.करने के लिए कुछ है नहीं इधर पर.
रानी - हाँ यार.वही तो.अभी हमें कुछ ही दिन हुए हैं इधर आये और मुझे तो लगता है की जैसे कितने सालों से मैंने कुछ किया ही नहीं है.
भानु - मेरा भी वही हाल है.
रानी – नीचे देख के आया था? सबा लोग सो गए?
भानु – नहीं.मम्मी के कमरे की लाइट जल रही थी शायद. थोड़ी थोड़ी रौशनी आ रही थी. मैंने ध्यान से देखा नहीं.
रानी – वो लोग भी रात में लेट से सोते हैं.
भानु – तू क्या कर रही थी अब तक?
रानी – सिस्टम पेएक मूवी पड़ी थी वही देख रही थी.उसमे भी बोर हो गयी.
भानु – कौन सी मूवी थी? दे न मुझे भी देखने को.
रानी – तेरे वाली नहीं थी.मेरे वाली मूवी थी. तेरे टाइप वाली मेरे पास नहीं है.
भानु – तू तो हर टाइमबस ताना ही मारा करती है.मैं कोई नार्मल वाली मूवी नहीं देख सकता क्या?
रानी – देखता होगा. मुझे नहीं पता.मैंने तो नहीं देखा तुझे नार्मल वाली मूवी देखते हुए.
भानु – तो तूने मुझे वो वाली मूवी देखते हुए भी तो नहीं देखा है कभी.
रानी – देखा है. कई बार तू सिस्टम चालू कर के सो जाया करता था अपने पुराने वाले फ्लैट में. कई बार मैंने तेरे रूम में आकर तुझे चादर ओढाई है और सिस्टम पांव मूवी बंद की है.
भानु – सच में?
रानी – हाँ . कई बार.
भानु – कभी बताया नहीं तूने.
रानी – इसमें क्या बताने वाली बात थी? मुझे लगा तो थोडा ओड फील करेगा सुन के की मैंने तुझे ऐसे देख लिया.इसलिए नहीं बताया.
भानु – हाँ सही किया.कभी कभी मुझे लगता है की हमारे बीच भाई बहन वाली कोई बात रह ही नहीं गयी है. तूने मुझे हर हाल में देख लिया. मैंने भी तुझे हर हालत में देखा है.
रानी – तूने मुझे कब देख लिया?
भानु – नहीं. देखा नहीं है.लेकिन सुना ज्यादा बार है.तुझे याद है तेरा वो सीनियर था न वो हरयाणवी जाट,,,,उसके संग तो तेरा हंगामा इतना ज्यादा होता था की कई बार तो मैं तकिये की नीचे कान दबाने के सोने की कोशिश करता था दोबारा भी तेरी चीखें आती थी मेरे रूम तक.
रानी – ओ बाप रे.सच में ?
भानु – हाँ.मैं क्या पुरे पड़ोस वाले भी सुनते होंगे तेरी चीखों को तो.इतना जोर जोर से चीखता है क्या कोई?
रानी – तो मुझे मना करना चाहिए था न.कोई क्या सोचेगा मेरे बारे में?
भानु – मैंने क्या कह के मना करता ? मुझे भी लगा की तुझे बेकार में परेशानी होगीइसलिये नहीं कुछ कहा.
रानी – हाँ ठीक किया. लेकिन दोबारा भी लोग क्या सोचते होंगे?उन्को तो यही पता था की फ्लैट में सिर्फ हम दोनों रहते हैं. तोउन्को तो ये लगता होगा की वो चीखें हमारी हैं?
भानु – ये बात मुझे भी कई बार फील हुई की कहीं लोग ऐसा न सोचते हों.फिर मुझे लगा की यदि सोचते भी होंगे तो क्या करना हमें.दुनिया का दिमाग है. जो चाहे सोचे.हम किस किस को समझाते फिरेंगे की क्या बात है और क्या बात नहीं है.
रानी – लेकिन यार सच में सोचने वाली बात है.मुझे तो उन दिनों कभीइसे बात का ख्याल ही नहीं आया.अब क्या करें?
भानु- अरे करना क्या है?अब तो हम इधर रहने वाले हैं. वहां के लोग हमारे बारे में क्या सोचते थेइसे बात का क्या ख्याल करना.जाने दे.यह सभी सोच के टेंसन न ले.
रानी – हाँ ये भी ठीक है.और तू सुना क्या प्लान है तेरा.
भानु – किस बारे में?
रानी – अरे अब तक तो तूने अपना अगला शिकार खोज लिया होगा.बता तो दे की किसका नंबर लगने वाला है?
भानु – नहीं यार. अभी तो कोई नहीं खोजा.लेकिन तूनेएक बात नोटिस की घर में.
रानी – कौन सी बात? बता?
भानु – घर इतना बड़ा है दोबारा भी इतना स्वच्छ सुथरा है लेकिन हमारे सामने घर का कोई भी स्टाफ अन्दर काम नहीं करता है.
सब बस बहार के काम करते हैं.कुछ समझ नहीं आया की माजरा क्या है.
भानु – हाँ बात तो सही है. घर भी मेन्टेन है और स्वयं वो भी कितनी फिट हैं. मैं तो सोच रहा था की काकी कितनी फिट हैं याद.उनकी उम्र किनती होगी?
रानी – मेरे ख्याल से तो ६० की होंगी.क्यों?
भानु – यार तूने कहा देखा है किसी ६० वर्ष की स्त्री को इतना फिट?
रानी – तू उनकी फिटनेस को देख रहा है? कमीने.
भानु – नहीं यार. मैं तो ऐसे ही कह रहा था.तू तो बेकार में नाराज हो रह है.
रानी – नाराज नहीं हो रही. बस तेरी टांग खीच रही थी.कह तो तू सच रहा है.दोनों औरतें हमारे घर की ज्यादा फिट हैं.यह तो दोनों मुझे भी मात दे देंगी फिटनेस के मामले में.ओये यार कुछ कर न यार.ऐसे तो हम बोर हो जायेंगे.
भानु – तुझे कब से इतनी खुजली होने लगी?
रानी – क्यों मुझे क्यों न हो?
भानु – नहीं. पहले कभी इतना बेचैन देखा नहीं तुझे. तू तो हमेशा ही कण्ट्रोल में रहती है.
रानी – यार वहां इतने सरे आप्शन रहते हैं कीउन्को तद्पाने में आनंद आता है.यहाँ तो कोई साला मुझे देखने वाला भी नहीं है.किसका कण्ट्रोल ख़राब कर के अपना कण्ट्रोल बनाये रखूं.कोई तो चाहिए न.
भानु – भगवन का शुक्र है.
रानी – मतलब?
भानु – मैं तो समझता था की तूइसे सबसेबाहर् हो गयी है और अब तुझे सेक्स वेक्स में कोई इंटरेस्ट नहीं है और तू साधू बन्ने वाली है.
अब जान के सांस आई की तू भी कम नहीं है. बस लोगों को जला जला के मजे लेती है.
रानी – हाँ तो तेरे जैसा हिसाब नहीं है मेरा की जहाँ भी मौका मिले वही मुंह मार दो.मैं तो खूब टाइम लगाती हूँ.खैर.मुझे ये तो पता है की तुन्ने किसी न किसी को तो चुन ही लिया होगा.तू इतने दिन बिना प्लान बनाये रह ही नहीं सकता.
भानु – हा हा हा हा.मजाक बना रही है मेरा? मैं क्या वहशी हूँ?
रानी –इसे मामले में तो तू है.भूल गया इसके लिए क्या क्या पापड़ बेले हैं तूने और दोबारा तुझे बचाने के लिए क्या क्या पापड बेले हैं मैंने.
चल अब बता भी दे.किसपे निशाना लगाने वाला है तू.
भानु – हाँ हाँ सभी याद है.और सच में अभी तक किसी का नंबर नहीं लगाया है मैंने लेकिन कल से शुरुआत करने वाला हूँ.
रानी – क्या शुरुआत करने वाला है?
भानु – घर में हर स्थान कैमरा लगा हुआ है.मैंने सर्वर खोज लिया है उसका और उसे अपने लैपटॉप से जोड़ लिया है.कल से घर की निगरानी करूँगा.घर की नौकरानियों पर नजर रखूँगा कल से.
रानी – हा हा हा हा मुझे पता था की तूने कुछ न कुछ तो इन्तेजाम कर ही लिया होगा अपने लिए.चल कुछ अच्चा मिले तो मुझे भी दिखाना.अब चलो नीचे.तू भी सो जा और मैं भी सो जाती हूँ.
दोनों उतर के नीचे आ गए.इस दौरान रानी के मन मेंएक बात चल रही थी.वो सोच रही थी की कहूँ या न कहूँ.और उसकीइसे कह्मोशी को भानु ने
भानु – क्या बात है? कुछ कहना है?
रानी – हाँ.नहीं कुछ नहीं.
भानु – अरे बोल न क्या हुआ?
रानी – कोई मूवी है क्या?
भानु – मेरे टाइप वाली मूवी????
रानी – (हिचकते हुए) हाँ.
भानु – तो तू इतना सोच क्यों रही थी इसके लिए??? शर्म आ रही है??? ( भानु अब रानी के मजे ले रहा था.)
रानी –मत दे. रहने दे. नहीं चाहिए.
भानु – अरे अरे अरे.तू तो सच में शर्मा गयी.यार क्या हुआ तुझे??? हमारे बीच ये शर्म अच्छी नहीं लगती.चल कमरे में.देता हूँ. ज्यादा हैं मेरे पास.( वो रानी को हाथ से पकड़ के अपने कमरे में ले गया और रानी के मन में ये बात चल रही थी की शायद उसे भानु से मूवी के लिए नहीं कहना चाहिए था.)
भानु – आज तुझे भी जरुरत आ गयी न.मुझे तो बड़ा कहती थी की ये सभी बेकार चीज है. उसमे असली आनंद नहीं है.आजदेख्ना यही नकली चीजें असली का आनंद देंगी.
रानी – रहने दे मुझे नहीं देखनी.
भानु – ऐसे नखरे तो मत कर जैसे पहले कभी तूने देखि नहीं हो ये मूवी.ओके मैं नहीं लेता और मजे तेरे.तू ये मेरा लैपटॉप ही ले जा.जो मन करे देख लेना.इस वाले फोल्डर में रखा है सभी कुछ.
रानी उसके रूम से लैपटॉप ले के आ गयी.क्या करती उसे भी जोर की खुजली मची हुई थी.
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